मनुष्य को दुख-सुख,बिछोह और मिलन मिलते हैं,चंद्रमा बादलों में छिपता,निर्मल चमकता,पूरा होता और घटता है,इनका पूर्ण होना प्राचीन काल से कठिन रहा है。
शुइदियाओ गेथोउ · उजला चाँद कब से है
शब्दों और पंक्तियों के बीच, कविता का रस पाएँ।
शुइदियाओ गेथोउ · उजला चाँद कब से है
पुसामान · झरे फूल दूर तक बिखरे हैं, घनी छाया विरल हुई
आरंभिक ठंड में नदी पर उमड़ी स्मृतियाँ / आरंभिक ठंड में उमड़ी स्मृतियाँ
बोधिसत्त्व बर्बर·दूर बरामदों और सीढ़ियों पर शरद की घास उग आई है
नीलम-जड़ित मेज़·सुगंधित धूप की लकीरें कोहरे से घनी हैं
ग्रीष्म के दिन दक्षिणी मंडप में शिन दा की याद
भोर में जिंगत्सी मंदिर से निकलकर लिन त्सीफांग को विदा करना
चार पंक्तियाँ · पुराने वृक्ष की छाया में छोटी छतदार नाव बाँधी
तितली को फूल से प्रेम·गरम बारिश और धूप भरी हवा ने अभी जमी बर्फ पिघलाई है