रंग बिरंगे फूल धीरे धीरे आँखों को चकित करने लगे हैं, छोटी घास बस घोड़े के खुर ढक पाती है।
छ्येनथांग झील पर वसंत की सैर
शब्दों और पंक्तियों के बीच, कविता का रस पाएँ।
छ्येनथांग झील पर वसंत की सैर
लू पर्वत के झरने को निहारना
पर्वतीय निवास में शरद की साँझ
गुआनच्यूए मीनार पर चढ़ना
शांत रात के विचार
शीत की गुलदाउदी / गुलदाउदी का चित्र
शाओनियान योउ·बिंगझोउ की छुरी पानी-सी चमकती है
तानपो हुआनशीशा · कमल की सुगंध मिट गई,हरे पत्ते मुरझा गए
वांग च्यांगनान · दूर भटकते निश्चिंत स्वप्न
न्येननूच्याओ·वसंत के भाव
निएननुजियाओ · शितोउ नगर पर चढ़ते हुए दोंगपो के तुकों का अनुसरण