कविता
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छोटे ताल की ठंडी हरियाली में लहरियाँ उठने को हैं,वर्षा थमी,पर सूर्य फिर पश्चिम में है。
रुआनलांगगुई · वसंत की हवा वर्षा को टूटी शाखाओं के चारों ओर उड़ाती है
दसवें महीने योउझोउ पहुँचा,भाले और बरछियाँ बिखरे तारों जैसी थीं。
विद्रोह और विस्थापन के बाद सम्राट की कृपा से येलांग निर्वासित किए जाने पर पुरानी यात्राओं को याद करते हुए अपने भाव लिखकर जियांगश्या के प्रांतपाल वेइ लियांगज़ाइ को भेंट
लोकप्रिय कविताएँ
- आलूबुखारे पकने की बरसाती रात में,दीपक तले अतिथि की प्रतीक्षा
- 幽州思妇十二月,停歌罢笑双蛾摧。 बारहवें महीने योउझोउ की विरहिणी गाना और हँसना छोड़ देती है, उसकी दोनों सुंदर भौंहें दुख से झुक जाती हैं।
- 坐见幽州骑,长驱河洛昏。 आँखों के सामने योउझोउ के घुड़सवार बढ़ते चले गए, उनके लंबे धावे से हुआंगहे और लुओ नदी का क्षेत्र अँधियारा हो गया।
- किसान के घर शरद का काम कठिन है, पड़ोस की स्त्री ठंडी रात में धान कूटती है।
- शरद के रंग और जंगली हंसों की पुकार में कितना दुख है—सब ढलते सूरज में समाया है।
- यह निर्मल शरद के दिनों तक कैसे ठहरता,जब साथ ढलती धूप भी थी और सिकाडों का स्वर भी。
- सूर्य ढल रहा है,फिर भी मन का उत्साह प्रबल है,शरद की हवा में रोग मानो हल्का होने को है。
- सज्जन अपने मर्मज्ञ के लिए प्राण देता है,तलवार उठाकर यान की राजधानी से निकलता है。
- छोटे ताल की ठंडी हरियाली में लहरियाँ उठने को हैं,वर्षा थमी,पर सूर्य फिर पश्चिम में है。
- दसवें महीने योउझोउ पहुँचा,भाले और बरछियाँ बिखरे तारों जैसी थीं。