प्याला उठाकर ढलते सूरज की ओर हूँ, मौन ही पश्चिमी हवा से पूछता हूँ।
श्वेइतियाओ गेथोउ·ढलते सूर्य के सामने मदिरा लिए
शब्दों और पंक्तियों के बीच, कविता का रस पाएँ।
श्वेइतियाओ गेथोउ·ढलते सूर्य के सामने मदिरा लिए
बा शेंग गानझोउ · नदी और आकाश पर बरसती संध्या की झमाझम वर्षा को देखते हुए
मैगपाई-पुल की परी
मु लान हुआ मान · भोज में झांग झोंगगु को शिंगयुआन की सैन्य कमान सँभालने जाते समय विदाई
तितली को फूल से प्रेम · संसार के छोर तक बिछोह के सारे दुख झेले
हाओशी जिन·पर्दे के बाहर अंतिम पहर की हवा
सीमा की ओर पुनः प्रस्थान की पाँच कविताएँ
वूसोंग पर्वत के नीचे वृद्धा श्युन के घर रात्रि-विश्राम
लहरें रेत छानती हैं·नवें महीने की नवमी पर वू जियानशान से मदिरा माँगना