एकाकी सराय में वसंत की ठंड से घिरना कैसे सहूँ,कुक्कू की पुकार में ढलता सूर्य साँझ में डूबता है。
ताशाशिंग · छेनझोउ की सराय
शब्दों और पंक्तियों के बीच, कविता का रस पाएँ।
ताशाशिंग · छेनझोउ की सराय
हिम और आलूबुखारे के फूल · दूसरी
बुसुआनत्सि·बर्फीली नदी पर निर्मल चाँद(प्रतिलोम रचना, उलटकर पढ़ने पर 《巫山一段云》 अर्थात वू पर्वत का एक बादल)
दोंग दा से विदाई की दो कविताएँ
हिमपात में फ़ुरोंग पर्वत के एक घर में रात्रि-विश्राम
पूसामान·नई ठंड में मदिरा का असर, खिड़की पर वर्षा की दस्तक
श्ये शिनएन · धीरे ढलती शरद की छटा रोकी नहीं जाती
सानल्यू मंदिर के पास से गुजरना
जियांग युए हुआंग छोंग शान · सोंगशान पहली बार पहुँचने पर
श्युआनचोउ के श्ये थ्याओ भवन में ग्रंथपाल चाचा युन के लिए विदाई भोज
ताशाशिंग · छेनझोउ की सराय
वसंत की नदी पर फूलों और चाँद की रात
नई जोड़ी हुई धुन में विलो की डालियाँ
जियांगछंगज़ी·वसंत का आस्वाद