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आकाश में साथ उड़ने वाले पक्षी बनना चाहें,धरती पर जुड़ी हुई डालियाँ बनना चाहें。

अनंत विरह का गीत

तांग राजवंश・बाई च्यूयी

हान सम्राट रूप पर मुग्ध थे, अनुपम सुंदरी की चाह रखते थे, वर्षों राज्य किया पर उसे खोज न सके।

यांग परिवार की एक कन्या अभी यौवन में आई थी, भीतर के कक्षों में पली थी, लोग उसे जानते नहीं थे।

जन्मजात सुंदरता को छिपाए रखना कठिन था,एक दिन उसे चुनकर सम्राट के पास पहुँचा दिया गया。

मुड़कर एक मुस्कान बिखेरी तो सौ मोहक अदाएँ खिल उठीं, छह महलों की सारी सुंदरियाँ फीकी पड़ गईं।

वसंत की ठंड में हुआछिंग सरोवर में स्नान का अनुग्रह मिला, चिकने उष्ण जल ने मलाई-सी त्वचा को धोया।

दासी ने उसकी कोमल,निढाल देह सँभालकर उठाई,यह उसके पहली बार सम्राट की कृपा पाने का समय था。

云鬓花颜金步摇,芙蓉帐暖度春宵。 बादलों जैसे केश, फूल जैसा मुख और चलते ही झूलता स्वर्ण केशाभूषण;कमल-अंकित परदों की गरमाहट में वसंत की रात बीतती है।

प्रेम की वसंत रात बहुत छोटी लगी, सूरज ऊँचा चढ़ने पर ही उठे;तब से राजा सुबह के दरबार में नहीं गए।

राजा को प्रसन्न करने और भोज में सेवा देने से अवकाश नहीं मिलता, वसंत के हर विहार में साथ रहती है और हर रात केवल उसी को मिलती है।

后宫佳丽三千人,三千宠爱在一身。 अंतःपुर में तीन हज़ार सुंदरियाँ हैं, तीन हज़ारों का सारा प्रेम एक ही पर केंद्रित है।

स्वर्ण कक्ष में सजी सँवरी, मनोहर होकर रात को सेवा करती है, जड़ाऊ मीनार का भोज समाप्त हुआ, नशा वसंत से घुलमिल गया।

बहन-भाइयों सभी को जागीरें मिलीं, अहा, कैसा वैभव उनके घर-द्वार पर चमक उठा।

इससे संसार के माता-पिताओं के मन ऐसे बदले कि पुत्र जन्मने से अधिक पुत्री जन्मने को महत्त्व देने लगे।

ली महल की ऊँचाइयाँ नीले बादलों में समाती हैं, हवा में बहता दिव्य संगीत हर ओर सुनाई देता है।

धीमे गीत और मंथर नृत्य में तार-बाँसुरी के स्वर ठहर जाते हैं, सम्राट दिन भर देखकर भी तृप्त नहीं होते।

युयांग के युद्ध-नगाड़े धरती हिलाते आए, इंद्रधनुषी वसन और पंख-पोशाक का संगीत चौंककर टूट गया।

नौ परकोटों वाली राजधानी में युद्ध की धूल उठी, हज़ार रथ और असंख्य घुड़सवार दक्षिण-पश्चिम चले।

शाही ध्वज डोलते हैं, जुलूस चलता और फिर रुकता है; राजधानी के द्वार से पश्चिम सौ से अधिक ली निकल आया है।

छहों सैन्यदल आगे बढ़ने से इनकार करें तो क्या उपाय, सुंदर भौंहों वाली वह स्त्री घोड़े के सामने तड़पकर मर गई।

फूलदार आभूषण धरती पर पड़े हैं,उठाने वाला कोई नहीं,जेड की कलगी,सोने की चिड़िया और जेड की केशपिन。

राजा मुख ढाँपकर उसे बचा न सका, पलटकर देखा तो रक्त और आँसू साथ बहे।

पीली धूल चारों ओर बिखरी है,हवा उदास बहती है,मेघों तक उठते घुमावदार लकड़ी के पथ से जियानगे पर चढ़ते हैं。

एमेई पर्वत के नीचे राहगीर कम हैं, ध्वजों की चमक खो गई है और सूर्य का प्रकाश फीका है।

शू की नदी का जल नीला-हरा है,शू के पर्वत हरे हैं,पुण्य सम्राट के मन में सुबह-शाम वही प्रेम है。

अस्थायी राजमहल में चाँद का रूप देखकर मन दुखता है,रात की वर्षा में घंटियों की ध्वनि सुनकर हृदय टूटता है。

天旋日转回龙驭,到此踌躇不能去。 आकाश और सूर्य की गति पलटी, सम्राट की सवारी लौट आई;यहाँ पहुँचकर वह ठिठक गया, आगे न जा सका।

मावेई ढलान के नीचे की मिट्टी में, उसका सुंदर मुख नहीं दिखता, बस मृत्युस्थल खाली पड़ा है।

सम्राट और मंत्री एक दूसरे को देखते हैं, सबके वस्त्र आँसुओं से भीगते हैं, पूर्व में राजधानी के द्वार की ओर निहारते हुए घोड़ों को उनकी चाल पर लौटने देते हैं।

लौटकर देखा,ताल और उद्यान सब पहले जैसे हैं,ताइये के कमल और वेइयांग के विलो。

芙蓉如面柳如眉,对此如何不泪垂。 कमल उसके मुख जैसे, विलो उसकी भौंहों जैसे हैं; इन्हें देखकर आँसू कैसे न बहें।

वसंत की हवा में आड़ू और आलूबुखारे के फूल खिलने के दिन, शरद की वर्षा में वूतोंग की पत्तियाँ गिरने के समय।

西宫南内多秋草,落叶满阶红不扫。 पश्चिमी महल और दक्षिणी राजप्रासाद में शरद की घास बहुत उग आई है, सीढ़ियों पर लाल पत्ते भरे हैं, कोई बुहारता नहीं।

लीयुआन के कलाकारों के बाल अब सफेद होने लगे हैं, रानी के कक्ष की सेविकाएँ और सुंदर युवतियाँ बूढ़ी हो गई हैं।

साँझ के महल में जुगनू उड़ते हैं, मन चुपचाप उदास है; अकेले दीप की बाती बार-बार सँवारी, फिर भी नींद नहीं आई।

घंटे और नगाड़े धीमे-धीमे बजते हैं,लंबी रात अभी शुरू हुई है,तारों की नदी उजली है,आकाश में भोर होने को है。

युगल बतखों वाली छत की खपरैल ठंडी है, पाला गहरा है, किंगफ़िशर-कढ़ी रज़ाई ठंडी है—किसके साथ ओढ़ूँ।

जीवन और मृत्यु का लंबा बिछोह वर्षों से चला है,उसकी आत्मा कभी स्वप्न में भी नहीं आई。

लिनछ्योंग का ताओवादी साधु, होंगदू का अतिथि, सच्ची निष्ठा से आत्मा को बुला सकता था।

为感君王辗转思,遂教方士殷勤觅。 राजा की करवटें बदलती व्याकुल स्मृति से द्रवित होकर, तांत्रिक को जी-जान से उसकी खोज करने को कहा गया।

排空驭气奔如电,升天入地求之遍。 आकाश चीरकर वायु पर सवार बिजली-सा दौड़ा, स्वर्ग चढ़ा और धरती में उतरा, हर जगह उसे खोजा।

上穷碧落下黄泉,两处茫茫皆不见。 ऊपर नीले स्वर्ग का छोर और नीचे पाताल तक खोजा, दोनों असीम लोकों में कहीं वह दिखाई न दी।

अचानक सुना कि समुद्र पर एक अमर पर्वत है,वह पर्वत शून्य की धुँधली अनिश्चितता में है。

सुकुमार मंडपों पर पाँच रंगों के बादल उठते हैं, भीतर अनेक मनोहर अमर सुंदरियाँ हैं।

उनमें एक है जिसका नाम ताइझेन है, हिम जैसी त्वचा और फूल सा मुख—लगभग वही जान पड़ती है।

स्वर्ण महल के पश्चिमी कक्ष में जेड के द्वार पर दस्तक दी,फिर श्याओयू से श्वांगछंग को सूचना देने को कहा。

सुना कि हान सम्राट का दूत आया है, तो नौ पुष्पों से सजे परदे के भीतर स्वप्नमग्न आत्मा चौंक उठी।

वस्त्र समेट,तकिया हटाकर उठी और टहलने लगी,मोती के पर्दे और चाँदी की ओटें एक-एक कर खुलीं。

अभी नींद से जागी है, बादलों जैसा जूड़ा एक ओर झुका है, फूलों का मुकुट सँवारे बिना ही कक्ष से नीचे चली आती है।

风吹仙袂飘飖举,犹似霓裳羽衣舞。 हवा में अप्सरा की बाँहें लहराकर उठती हैं, मानो फिर इंद्रधनुषी वस्त्र और पंखों के परिधान वाला नृत्य हो रहा हो।

जेड-सा सुंदर मुख उदास है, आँसू आड़े-तिरछे बहते हैं, मानो वसंत की वर्षा में भीगी नाशपाती के फूल की एक डाली।

स्नेह भरी स्थिर दृष्टि से सम्राट को धन्यवाद दिया, एक बार बिछुड़ने पर स्वर और रूप दोनों धुँधले दूर हो गए।

झाओयांग प्रासाद में प्रेम और कृपा समाप्त हो गए,पेंगलाई महल में दिन और महीने लंबे खिंचते हैं。

回头下望人寰处,不见长安见尘雾。 मुड़कर नीचे मनुष्यों की दुनिया की ओर देखता हूँ; चांगआन नहीं दिखता, बस धूल और धुँध दिखती है।

पुरानी वस्तुओं से ही गहरा प्रेम प्रकट कर सकती हूँ, जड़ाऊ डिबिया और सोने की केशपिन साथ भेजती हूँ।

钗留一股合一扇,钗擘黄金合分钿。 केशपिन का एक काँटा और डिबिया का एक पल्ला अपने पास रखा; सोने की पिन और जड़ाऊ डिबिया को अलग-अलग हिस्सों में बाँटा।

बस मन स्वर्ण आभूषण जैसा दृढ़ हो, तो स्वर्ग हो या धरती, हम फिर मिलेंगे।

विदा के समय स्नेह से फिर संदेश सौंपा, संदेश में वह शपथ थी जिसे दोनों हृदय जानते थे।

सातवें महीने की सातवीं रात, चांगशेंग महल में, आधी रात को जब कोई न था, हम गुप्त बातें कर रहे थे।

आकाश में साथ पंख मिलाकर उड़ने वाले पक्षी बनें, धरती पर परस्पर जुड़ी शाखाएँ बनें।

天长地久有时尽,此恨绵绵无绝期。 आकाश और धरती की चिरायु का भी कभी अंत होगा, इस दुख की निरंतर धारा कभी समाप्त नहीं होगी।

काव्यभाव को बहने दें

काव्यलोक का एनिमेशन

एनिमेशन की सामग्री मूल चीनी में रखी गई है।

एनीमेशन तैयार है।

AI चित्रांकन

अनुवाद

तांग मिंगहुआंग को रूप-सौंदर्य प्रिय था; सम्राट बनने के बाद वे वर्षों तक सुंदर नारी खोजते रहे, पर कोई सफलता नहीं मिली।

यांग परिवार की एक बेटी अभी युवावस्था में पहुँची थी, अत्यंत कोमल और सुंदर। वह अंतःपुर में पली थी और बाहर के लोग उसकी अनुपम सुंदरता से अनजान थे।

जन्मजात सुंदरता और नगर-देश को मोहित कर देने वाले रूप के कारण उसका संसार में अनदेखा रहना कठिन था। सचमुच, अधिक समय नहीं बीता कि वह तांग मिंगहुआंग की एक उपपत्नी बन गई।

वह मुड़कर मुस्कराती तो अनगिनत अदाएँ और मोहकता उमड़ पड़तीं; छहों महलों की रानियाँ और उपपत्नियाँ एक-एक कर फीकी पड़ जातीं।

वसंत की चुभती ठंड में सम्राट ने उसे हुआछिंग कुंड में स्नान की अनुमति दी; गरम, कोमल झरने का जल जमे घी-सी चिकनी उसकी त्वचा को धो रहा था।

दासियाँ उसे सहारा देती हैं,वह जल से निकले कमल जैसी कोमल और लावण्यमयी है,यहीं से उसे सम्राट का स्नेह मिलने लगा।

केश बादलों जैसे और चेहरा फूल जैसा है, सिर पर सुनहरा बूयाओ आभूषण है। कमल-सजे गरम परदे के भीतर सम्राट के साथ वसंत की रात बिताती है।

गहरे प्रेम में वसंत की रात छोटी लगती है, नींद खुलती है जब सूरज बहुत ऊँचा चढ़ जाता है। राजा प्रेम की कोमल दुनिया में इतना डूब गया कि तब से सुबह के दरबार में जाना छोड़ दिया।

सम्राट का स्नेह पाकर उनके साथ मदिरापान में सेवा करती, इतनी व्यस्त कि अवकाश नहीं मिलता। वसंत के दिनों में उनके साथ घूमने जाती और हर रात शयन में उनकी संगिनी होती।

अंतःपुर में उपपत्नियों की संख्या तीन हजार से कम न थी, फिर भी केवल वही सम्राट की कृपा का पूरा आनंद पाती थी।

स्वर्ण महल में शृंगार करती,हर रात लाड़ दिखाती,राजा से अलग न होती;जेड की अटारी में भरपूर मदिरापान और भोज के बाद,नशा उसके आकर्षण में और रस भर देता。

उसके कारण भाई-बहनों को भी जागीरें और सामंती उपाधियाँ मिलीं,यांग परिवार का गौरव सबको ईर्ष्या से भर देता था।

इससे संसार के माता-पिताओं की सोच बदल गई,वे बेटों से अधिक बेटियों को महत्त्व देने लगे。

ली पर्वत पर हुआछिंग महल की जेड जैसी इमारतें और रत्न जैसे भवन बादलों तक उठते हैं,मंद हवा चलती है,तो दिव्य संगीत चारों दिशाओं में फैल जाता है।

मंद गायन और लचीला नृत्य कितने तालबद्ध हैं,बाँसुरी और तारवाद्यों की धुनें सारा भाव पहुँचा देती हैं,सम्राट दिन भर देखते हैं,पर बार-बार देखकर भी नहीं ऊबते。

युयांग के विद्रोह के युद्धनगाड़े कानों को बहरा कर रहे थे, महल में नीछांग युई धुन बजनी बंद हो गई।

नौ परकोटों वाला महल देखते-देखते धूल में घिर गया, राजा बड़ी संख्या में अधिकारियों और सुंदर सहचरियों को साथ लेकर दक्षिण-पश्चिम भाग चला।

रथों का काफिला रुक-रुककर चलता है,छांगआन से पश्चिम की ओर निकले अभी सौ से कुछ अधिक ली ही हुए हैं。

छहों सैन्यदल रुक गए और आगे बढ़ने से इनकार कर यांग यूहुआन को मृत्यु देने की माँग की। सम्राट असहाय था; उसे मावेइ ढलान के नीचे यांग यूहुआन का गला घोंटकर मरवाना पड़ा।

गुइफ़ेई के सिर के आभूषण धरती पर बिखरे पड़े हैं, कोई उन्हें नहीं उठाता। किंगफ़िशर-पूँछ के आकार का आभूषण, सुनहरी चिड़िया और जेड की केशपिन—एक-एक बहुमूल्य शिरोभूषण।

सम्राट बचाना चाहता है,पर असमर्थ है,मुँह ढककर रोता है,पीछे मुड़कर प्रिय उपपत्नी की दुखद मृत्यु का दृश्य देखता है,रक्त जैसे आँसू थमते नहीं।

उदास शरद-पवन झरे पत्ते बुहारती है, पीली मिट्टी की धूल विलीन हो गई है; घुमावदार लकड़ी के मार्ग से गुज़रता काफ़िला ज्येनगे के प्राचीन पथ पर चढ़ गया है।

एमेइ पर्वत के नीचे राहगीर विरले हैं, ध्वजों के रंग फीके हैं और सूर्य-चंद्रमा का प्रकाश बुझा हुआ है।

शू प्रदेश के निर्मल पहाड़ और सुंदर जल सम्राट के मन में विरह जगाते हैं। अस्थायी राजमहल से चाँद देखते हैं तो दृष्टि विषाद से भर जाती है; वर्षा की रात संगीत सुनते हैं तो हर स्वर दुखमय लगता है।

विद्रोह शांत होने के बाद राजा चांगआन लौटे। मावेइ ढलान से गुज़रते हुए वहाँ की वस्तुओं ने उन्हें उसकी याद दिलाई, और वे ठिठककर आगे नहीं बढ़ सके।

मावेई ढलान के नीचे घनी घास के बीच, उजाड़ पीली मिट्टी की कब्र में उस सुंदरी का मुख अब दिखाई नहीं देता; पहाड़ों में बस उसकी समाधि पड़ी है।

सम्राट और मंत्री एक-दूसरे को देखते हैं,आँसुओं से वस्त्र भीग जाते हैं,पूर्व में राजधानी की ओर देखकर हृदय दुखता है,वे घोड़ों को अपनी चाल चलने देते हुए दरबार लौटते हैं।

लौटकर देखा तो ताल और उद्यान वैसे ही थे, ताइये ताल के कमल अब भी खिले थे, वेइयांग महल के झूलते विलो भी नहीं बदले थे।

कमल युहुआन के मुख जैसे खिले हैं, विलो की पत्तियाँ उसकी भौंहों जैसी हैं, इस दृश्य से मन में शोक कैसे न उठे?

वसंत की हवा आड़ू और आलूबुखारे के फूल खिलाती है,वस्तुएँ वही हैं,पर व्यक्ति नहीं,यह दुख असह्य है;शरद की वर्षा वूतोंग के पत्तों पर टपकती है,एकांत दृश्य और भी करुण हो उठता है।

शिंगछिंग महल और गानलू सभागृह हर ओर उजाड़ हैं, शरद की घास उगी है। महल की सीढ़ियाँ गिरे पत्तों से भर गई हैं; लंबे समय से कोई उन्हें बुहारता नहीं दिखा।

कलाकारों के सिर बर्फ जैसे सफेद हो गए हैं, राजमहल की स्त्रियों का यौवन पूरी तरह ढल गया है। रात में महल में जुगनू उड़ते हैं; अकेले दीपक का तेल समाप्त हो जाता है, फिर भी सम्राट सो नहीं पाता।

धीरे-धीरे बजते घंटों और नगाड़ों की आवाजें गिनता हूँ; जितना गिनूँ, रात उतनी लंबी लगती है। दूर चमकती आकाशगंगा को देखता रहता हूँ, जब तक पूर्व में भोर की आभा नहीं फूटती।

जोड़ेदार छत-खपरैलों पर पाले के फूल घनी परत बनाते हैं, ठंडी पन्ना-रंगी रज़ाई में अब कौन राजा के साथ सोता है?

जीवन और मृत्यु के बीच बिछुड़े एक वर्ष बीत गया,तुम एक बार भी मेरे सपने में क्यों नहीं आए?

लिनछ्योंग का दाओवादी साधक उस समय चांगआन में अतिथि की तरह रह रहा था। कहा जाता था कि वह अपने मंत्रबल से गुइफ़ेइ की आत्मा बुला सकता है।

प्रिय उपपत्नी के लिए सम्राट की तड़प ने उसे द्रवित कर दिया। उसने राजाज्ञा स्वीकार की और बिना ढिलाई किए, आठों दिशाओं में वायु पर सवार होकर लगन से खोजने लगा।

बादलों पर सवार होकर आकाश में गया, बिजली की तरह हर दिशा में दौड़ा; स्वर्ग और पाताल में ऊपर-नीचे हर जगह खोजा, पर कहीं कोई परिणाम नहीं मिला।

अचानक सुना कि समुद्र में सफेद बादलों से घिरा एक अमर पर्वत है。

सुघड़,पारदर्शी-से मंडप और अट्टालिकाएँ,पंचरंगी शुभ मेघों पर टिकी हैं। स्वर्गीय अमर और देवांगनाएँ अनगिनत हैं,हर एक की छवि लावण्यमयी है。

उनमें एक का नाम ताइझेन है, त्वचा बर्फ़-सी और चेहरा फूल-सा;लगता है वही यांग गुइफ़ेई है जिसे राजा खोज रहे हैं।

ताओवादी साधक स्वर्ण महल के पश्चिम पहुँचा, जेड से तराशे आँगन के द्वार पर दस्तक देकर धीमे से पुकारा और श्याओयू से कहा कि दासी शुआंगछंग को सूचना देने भेजे।

थाइचन ने सुना कि सम्राट का दूत आया है, तो वह शय्या के पर्दों के भीतर चौंककर जागी। वस्त्र पहने, तकिया हटाया और शय्या के घेरे से बाहर आई। एक-एक कर ओट के परदे खोले और मोतियों की झालरें नीचे कीं।

बादल जैसे केश आधे सँवरे हैं,वह अभी-अभी जागी है,साज-सँवार का समय पाए बिना वेदी से उतरती है,फूलों का मुकुट भी तिरछा पहने है।

अमर लोक की कोमल हवा आस्तीनों को हल्के से लहराती है, मानो निछांग यूयी नृत्य की सुंदर, लचीली मुद्राएँ हों। एकाकी

और उदास चेहरा, जिस पर आँसू लगातार बहते हैं, जैसे वसंत में बारिश से भीगा नाशपाती का फूल।

भावभरी दृष्टि से सम्राट के दूत को देखा और उससे कहा कि सम्राट को हृदय से धन्यवाद पहुँचाए। मावेइ ढलान पर सदा के बिछोह के बाद, समाचार और रूप-दर्शन दोनों दूर और धुँधले रहे हैं।

चाओयांग महल का दांपत्य संबंध बहुत पहले टूट चुका है; पंगलाइ महल का एकाकीपन अभी बहुत लंबे समय तक बना रहेगा।

पीछे मुड़कर नीचे मनुष्यलोक देखता हूँ, चांगआन छिप चुका है, केवल धूल और धुंध रह गई है।

केवल उस समय की निशानियों से अपना गहरा प्रेम प्रकट कर सकती हूँ;यह जड़ाऊ डिबिया और सोने की केशपिन राजा को मेरी याद के लिए ले जाओ।

सोने की केशपिन की एक शाखा और जड़ाऊ डिबिया का आधा भाग अपने पास रखा;केशपिन का सोना चीरकर बाँटा, डिबिया की रत्नजड़ित सज्जा अलग की।

बस हमारे प्रेमी हृदय सोने और रत्नजटित आभूषणों जैसे दृढ़ और निष्ठावान रहें, तो स्वर्ग हो या धरती, फिर मिलने का अवसर अवश्य आएगा।

विदा होते समय उसने साधक से आग्रह किया कि सम्राट तक उसके प्रेम का संदेश पहुँचाए; संदेश की प्रतिज्ञा केवल सम्राट और मैं जानते हैं।

उस वर्ष सातवें महीने के सातवें दिन, छांगशेंग महल में, आधी रात को जब कोई नहीं था, हमने पर्वत और समुद्र की शपथ लेकर प्रेम का वचन दिया था।

आकाश में साथ पंख मिलाकर उड़ने वाले पक्षी बनना चाहें,धरती पर साथ उगी और जुड़ी शाखाएँ बनना चाहें。

आकाश और धरती जितनी दीर्घायु भी अंततः समाप्त होगी, पर जीवन-मरण से जुड़ा यह विरह-दुख कभी समाप्त नहीं होगा।

टिप्पणियाँ

汉皇:मूलतः हान सम्राट वू।यहाँ तांग श्युआनज़ोंग का संकेत।तांगकालीन साहित्य में तांग को प्रायः हान कहा जाता था।

重色:स्त्री-सौंदर्य में आसक्त होना।

倾国:अनुपम सुंदरी।हान काल में ली येनन्येन ने सम्राट वू को यह गीत सुनाया:「北方有佳人,绝世而独立。一顾倾人城,再顾倾人国。宁不知倾城与倾国,佳人难再得。」अर्थात उत्तर में एक अनुपम,अद्वितीय सुंदरी है। उसकी एक दृष्टि नगर को गिरा दे,दूसरी राज्य को। नगर और राज्य के पतन का ज्ञान हो भी,तो ऐसी सुंदरी फिर मिलना कठिन है। बाद में,「倾国倾城」सुंदरी का पर्याय बन गया。

御宇:समस्त संसार पर शासन करना। हान काल के जिया छांगशा की ‘छिन के दोषों पर निबंध’ में है:「振长策而御宇内」 अर्थात् ‘लंबा चाबुक उठाकर समूचे जगत को नियंत्रित करना’।

杨家有女:शूझोउ के गृह प्रशासन अधिकारी यांग श्वेनयेन की पुत्री यांग युह्वान का पालन बचपन से उनके चाचा यांग श्वेनगुई ने किया। सत्रह वर्ष की आयु में(खाइयुआन संवत का तेईसवाँ वर्ष)उन्हें श्वेनज़ोंग के पुत्र शोउ राजकुमार ली माओ की पत्नी बनाया गया। सत्ताईस वर्ष की आयु में श्वेनज़ोंग ने उन्हें गुइफेई की उपाधि दी। बाई जूयी का यहाँ कहना, 「养在深闺人未识」(अंतःपुर में पली, जिसे लोग अभी जानते न थे), जानबूझकर सम्राट की अप्रिय बात को टालने वाला कथन है।

丽质:सुंदर जन्मजात रूप-गुण।

六宫粉黛:महल की सभी राजपत्नियाँ और उपपत्नियाँ। प्राचीन सम्राट के छह महल होते थे, एक मुख्य कक्ष(日常 राजकार्य का स्थान)और पाँच विश्राम कक्ष, जिन्हें मिलाकर छह महल कहा जाता था। 粉黛 मूलतः स्त्रियों के श्रृंगार प्रसाधन हैं; 粉 चेहरे पर लगाया जाने वाला चूर्ण और 黛 भौंहें रंगने का रंग। यहाँ छह महलों की स्त्रियों का संकेत है।

无颜色:अर्थ है कि तुलना में सभी का सुंदर रूप फीका पड़ गया।

华清池:हुआछिंग गरम जलकुंड, आज के शीआन के लिंतोंग ज़िले के दक्षिण में ली पर्वत की तलहटी में है। तांग काल के झेंगुआन के अठारहवें वर्ष तांगछ्वान महल बना;श्यानहेंग के दूसरे वर्ष नाम वेनछ्वान महल हुआ;त्यानबाओ के छठे वर्ष विस्तार के बाद हुआछिंग महल कहलाया। तांग श्वानज़ोंग हर वर्ष शीत और वसंत ऋतु में यहाँ रहते थे।

凝脂:त्वचा की गोरी,कोमल और नम चिकनाई का वर्णन,मानो जमी हुई चर्बी। 《诗经·卫风·硕人》(शीजिंग·वेइफंग·शुओरेन)का कथन है 「肤如凝脂」(त्वचा जमी हुई चर्बी जैसी कोमल और उजली है)。

侍儿:राजमहल की परिचारिका।

新承恩泽:अभी-अभी सम्राट का प्रेम और अनुग्रह प्राप्त हुआ है।

金步摇:सोने का एक केशाभूषण; सोने-चाँदी के तारों से फूल बनाकर उनमें लटकते मोती आदि लगाए जाते हैं। बालों में लगाने पर चलते समय वह सुंदर ढंग से झूलता है।

芙蓉帐:कमल की कढ़ाई वाला पलंग का परदा; परदे की सुंदरता का वर्णन। श्याओ गांग के 《戏作谢惠连体十三韵》 में है:珠绳翡翠帷,绮幕芙蓉帐。(मोतियों की डोरियाँ, नीलहरित झालरें, रंगीन रेशमी आच्छादन और कमल कढ़े परदे。)

春宵:विवाह की पहली रात।

佳丽三千:तीन हज़ार सुंदरियाँ। 《后汉书·皇后纪》 में है:自武元之后,世增淫费,乃至掖庭三千。(वू और युआन सम्राटों के बाद पीढ़ी दर पीढ़ी विलास का व्यय बढ़ता गया, यहाँ तक कि अंतःपुर में तीन हज़ार स्त्रियाँ हो गईं。)यह अंतःपुर की स्त्रियों की बड़ी संख्या बताता है। 《旧唐书·宦官传》 आदि के अनुसार खाइयुआन और तियानबाओ काल में छांगआन के दानेई, दामिंग और शिंगछिंग तीन महलों, राजकुमारों के दस आवासों, राजपौत्रों के बाइसुन प्रांगण, तथा पूर्वी राजधानी के दानेई और शांगयांग दो महलों में कुल लगभग चालीस हज़ार महल सेविकाएँ थीं।

金屋:《汉武故事》में लिखा है कि सम्राट वू बचपन में अपनी बुआ की गोद में बैठे थे। बुआ ने पूछा कि क्या वह उनकी बेटी आज्याओ को पत्नी बनाना चाहेंगे। उन्होंने हँसकर कहा:「若得阿娇,当以金屋藏之。」अर्थात यदि आज्याओ मिल जाए तो उसे सोने के महल में सँजोकर रखूँगा।

列土:जागीर के रूप में भूमि बाँटना। 《旧唐书·后妃传》आदि के अनुसार,यांग गुइफेई की तीन बड़ी बहनें थीं,और श्वानज़ोंग ने तीनों को राज्य-महिला की उपाधियाँ दीं। सबसे बड़ी,जिन्हें बड़ी मौसी कहा जाता था,को हान राज्य की महिला की उपाधि मिली। तीसरी मौसी को गुओ राज्य की महिला,और आठवीं मौसी को छिन राज्य की महिला की उपाधि मिली। गुइफेई के पिता श्वानयान को मरणोपरांत क्रमशः ताइवेइ और छी राज्य के ड्यूक की उपाधियाँ दी गईं। उनकी माता को लियांग राज्य की महिला की उपाधि मिली। चाचा श्वानगुइ गुआंगलू छिंग बने। दूर के चचेरे बड़े भाई श्येन होंगलू छिंग बने। छी शियूशी बने और उन्होंने वू हुइफेई की बेटी,राजकुमारी ताइहुआ से विवाह किया। पितृकुल की बड़ी पीढ़ी की शाखा के बड़े चचेरे भाई गुओझोंग दाएँ प्रधानमंत्री बने। 姊妹:बहनें。

可怜:प्यारा, ईर्ष्या के योग्य।

不重生男重生女:पुत्र जन्म से अधिक पुत्री जन्म को महत्व देना। छेन होंग के 《长恨歌传》 में तत्कालीन लोकगीत दर्ज हैं, जैसे 「生女勿悲酸,生男勿喜欢」(बेटी जन्मे तो दुखी मत हो, बेटा जन्मे तो प्रसन्न मत हो), 「男不封侯女作妃,看女却为门上楣」(बेटे को सामंत पद नहीं मिलता, बेटी राजपत्नी बनती है; देखो, बेटी ही परिवार के द्वार का गौरव बनती है)आदि।

骊宫:ली पर्वत का हुआछिंग महल। ली पर्वत आज के शान्शी के लिनतोंग में है。

凝丝竹:तंत्री और सुषिर वाद्यों द्वारा संगत में धीमी, मृदुल धुन बजाना।

渔阳:एक प्राचीन प्रांत, जिसके अधीन आज के बीजिंग का पिंगगु और थ्येनजिन का जीश्येन आदि क्षेत्र थे। उस समय यह पिंगलू, फानयांग और हेदोंग के तीन सैन्य क्षेत्रों के सैन्य राज्यपाल आन लुशान के अधिकार में था। थ्येनबाओ काल के चौदहवें वर्ष की सर्दियों में आन लुशान ने फानयांग में विद्रोह आरंभ किया।

鼙鼓:प्राचीन घुड़सवार सेना का छोटा नगाड़ा, यहाँ युद्ध का संकेत।

霓(ní)裳羽衣曲:नृत्य-संगीत का नाम, ‘इंद्रधनुषी वस्त्र और पंखों की पोशाक का गीत’। कहा जाता है कि तांग के काइयुआन काल में शील्यांग के सैन्य प्रशासक यांग जिंगशू ने इसे भेंट किया;सम्राट श्वानजोंग ने इसे सँवारा, बोल रचे और यह नाम दिया। संगीत में धुँधले, अलौकिक अमर लोक और दिव्य सुंदरियों की छवियाँ उभारने पर विशेष ध्यान है।

九重城阙:नौ परतों वाले द्वारों की राजधानी,यहाँ छांगआन से आशय है。

烟尘生:युद्ध छिड़ने का संकेत।阙 का अर्थ प्राचीन राजमहल के द्वार के दोनों ओर के मीनारनुमा भवन हैं; व्यापक अर्थ में राजमहल या सम्राट का निवास।《楚辞·九辩》:君之门以九重। अर्थात राजा के द्वार के नौ परकोटे हैं।

千乘(shèng)万骑西南行: हज़ारों रथ और असंख्य घुड़सवार दक्षिण-पश्चिम चले। थ्येनबाओ के पंद्रहवें वर्ष के छठे महीने में आन लुशान ने तोंग दर्रा भेदकर चांगआन की ओर बढ़त की। श्वानज़ोंग, यांग गुइफ़ेई और अन्य लोगों को लेकर यानछ्यू द्वार से दक्षिण-पश्चिम भागे। उस समय साथ के अंगरक्षक अधिक नहीं थे, इसलिए 「千乘万骑」 अतिशयोक्ति है। 乘 चार घोड़ों वाले एक रथ की इकाई है; 骑 एक घोड़े पर सवार एक व्यक्ति की।

翠华:किंगफ़िशर के पंखों से सजा ध्वज, सम्राट के औपचारिक जुलूस में प्रयुक्त। सिमा श्यांगरू की 《上林赋》 में है:建翠华之旗,树灵鼍之鼓。 अर्थात किंगफ़िशर-पंखों के ध्वज खड़े किए, पवित्र घड़ियाल की खाल के नगाड़े लगाए।

百余里:छांगआन से सौ से अधिक ली दूर मावेई ढलान तक पहुँचने को कहता है।

「翠华摇摇行复止,西出都门百余里。」 पंक्तियाँ:‘राजकीय ध्वज डोलते हैं, यात्रा चलकर फिर रुक जाती है, राजधानी के पश्चिमी द्वार से सौ से अधिक ली दूर।’ ली लोंगजी पश्चिम की ओर भागते हुए चांगआन से सौ से अधिक ली दूर मावेई पड़ाव(आज शानशी का शिंगपिंग)पहुँचे। साथ की राजरक्षक सेना ने विद्रोह कर आगे बढ़ने से इनकार किया और जनाक्रोश शांत करने के लिए यांग गुओझोंग तथा उनकी बहन यांग यूहुआन को मारने की माँग की। अपनी रक्षा के लिए श्वानजोंग को यह मानना पड़ा।

六军:सम्राट की सेना।《周礼·夏官·司马》:王六军। अर्थात राजा की छह सेनाएँ होती हैं। नए और पुराने 《唐书·玄宗纪》 तथा 《资治通鉴》 आदि के अनुसार:थ्येनबाओ के पंद्रहवें वर्ष के छठे महीने में गे शुहान थोंग दर्रे पहुँचे; उनके अधीनस्थ हुओबा गुइरेन ने उन्हें बंदी बनाकर आन लूशान के आगे आत्मसमर्पण कर दिया। दर्रा हाथ से निकल गया और राजधानी भयभीत हो उठी। श्वेनत्सोंग ने शू जाने की योजना बनाई, फिर स्वयं अभियान पर निकलने की राजाज्ञा दी; दरबारी समारोह समाप्त होने पर सैनिक और सामान्य जन आतंकित हो उठे। यीवेई दिन की भोर में वे यानछ्यू द्वार से भागे। साथ में केवल प्रधानमंत्री यांग गुओझोंग, वेई ज्येनसू, अंतःपुर अधिकारी गाओ लिशी तथा युवराज, राजकुमार और राजपरिवार की स्त्रियाँ थीं; पौत्रों और उनसे नीचे के अधिकांश परिजन साथ न पहुँच सके। बिंगछन दिन वे मावेई पड़ाव पहुँचे(शिंगफिंग काउंटी के उत्तर में, आज शान्शी में), जहाँ सेनाओं ने आगे बढ़ने से इनकार कर दिया। लोंगवू के प्रधान सेनापति छन श्वेनली ने निवेदन किया:विद्रोही हू राजधानी पर चढ़े हैं और गुओझोंग का वध अपना कारण बताते हैं, पर दरबार और बाहर के लोगों में भी शिकायत और आक्रोश हैं। अब देश संकट में है और महाराज की यात्रा अस्थिर है; राज्य के व्यापक हित के लिए महाराज को जनभावना मानकर गुओझोंग और उसके साथियों को दंड देना चाहिए। उसी समय एक तिब्बती दूत ने पड़ाव के द्वार पर गुओझोंग को रोककर अपनी बात कही। भीड़ चिल्लाई:यांग गुओझोंग विदेशियों से मिलकर विद्रोह कर रहा है! सैनिकों ने पड़ाव चारों ओर से घेर लिया; यांग गुओझोंग और वेई फांगजिन के कुल का वध होने पर भी घेरा न हटा। श्वेनत्सोंग ने गाओ लिशी को कारण पूछने भेजा। उन्होंने लौटकर कहा:सेनापतियों ने गुओझोंग को मार दिया है, पर गुइफ़ेई के महल में होने से लोग भयभीत हैं। तब श्वेनत्सोंग ने लिशी को गुइफ़ेई को आत्महत्या का आदेश देने को कहा।

宛转:मृत्यु से पहले सुंदरी की व्यथा और गहरे विषाद का वर्णन। 蛾眉:प्राचीन काल में सुंदर स्त्री का पर्याय,यहाँ यांग गुइफेई से आशय है। 《诗经·卫风·硕人》:螓首蛾眉。(चौड़ा सुंदर माथा,पतंगे के स्पर्शकों जैसी सुडौल भौंहें。)

花钿:सोने,हरे आभूषणों और रत्नों आदि से बना फूल के आकार का केशाभूषण।

委地:जमीन पर फेंक देना।

翠翘:किंगफ़िशर की पूँछ के आकार का केशाभूषण।

金雀:सुनहरे पक्षी के आकार की केशपिन, जिसका रूप फ़ीनिक्स जैसा होता है(प्राचीन नाम झूछ्वे)。

玉搔头:जेड की केशपिन।《西京杂记·卷二》 के अनुसार,सम्राट वू ने ली फ़ूरन के पास जाते समय जेड की केशपिन से सिर खुजलाया।उसके बाद अंतःपुर की स्त्रियाँ सिर खुजलाने के लिए जेड इस्तेमाल करने लगीं。

云栈:बादलों तक ऊँचा जाता,पहाड़ की दीवार पर बना लकड़ी का रास्ता।

萦纡(yíngyū): घूमते-मुड़ते लिपटना।

剑阁:जियानगे, जिसे जियानमेन दर्रा भी कहते हैं, आज के सिचुआन की जियानगे काउंटी के उत्तर में है;छिन से शू जाने का एक प्रमुख

मार्ग। यहाँ के पर्वत तलवारों जैसे हैं, और जहाँ खड़ी चट्टानें टूटती हैं वहाँ दो पहाड़ द्वार की तरह आमने-सामने खड़े हैं। झूगे लियांग ने शू के प्रधानमंत्री रहते चट्टानें काटकर हवा में लटका हुआ तख्तों का मार्ग बनवाया था, जिससे आवागमन हो सके।

峨嵋山:आज के सछ्वान प्रांत के एमेइशान नगर में। श्वानत्सोंग शू की ओर भागते समय एमेइ पर्वत से नहीं गुजरे थे; यहाँ सामान्यतः शू के ऊँचे पर्वतों का संकेत है।

行宫:राजधानी से बाहर यात्रा करते समय सम्राट का अस्थायी निवास।

夜雨闻铃:रात की वर्षा में घंटियाँ सुनना।《明皇杂录·补遗》:「जब मिंगहुआंग शू पहुँचे,वे दक्षिण-पश्चिम जा रहे थे।श्ये घाटी में प्रवेश करते ही दस से अधिक दिनों तक लगातार वर्षा हुई,वर्षा में पहाड़ी तख्ता-पथ पर उन्होंने सुना

घंटियों की ध्वनि पहाड़ों में प्रतिध्वनित हुई। सम्राट पहले ही प्रिय उपपत्नी के शोक में थे,उन्होंने उसी ध्वनि पर ‘वर्षा में घंटियों की धुन’ रचवाई,ताकि अपना संताप व्यक्त कर सकें。」यहाँ उसी घटना की ओर संकेत है। बाद में 《雨霖铃》 सोंग कालीन त्सि कविता का एक छंदनाम बन गया।

天旋日转:परिस्थितियों का सुधरना। सम्राट सुज़ोंग के झिदे काल के दूसरे वर्ष में गुओ ज़ीयी की सेना ने छांगआन वापस ले लिया।

回龙驭:सम्राट की सवारी का लौटना।

不见玉颜空死处:अर्थ है, सुंदर मुख नहीं दिखता, केवल खाली मृत्युस्थल रह गया है। 《旧唐书·后妃传》 के अनुसार:श्वानज़ोंग शू से लौटे तो उन्होंने राजदूत को यांग गुइफ़ेई के लिए श्रद्धांजलि अर्पित करने भेजा और गुप्त रूप से उसे कहीं अन्यत्र पुनः दफ़नाने का आदेश दिया। पहली बार दफ़नाते समय उसे बैंगनी गद्दे में लपेटा गया था। त्वचा-मांस नष्ट हो चुका था, पर सुगंध की थैली अब भी थी। महल के अधिकारी ने उसे भेंट किया;पूर्व सम्राट उसे देखकर शोकाकुल हुए और दूसरे महल में उसका चित्र बनवाने का आदेश दिया, जिसे वे सुबह-शाम देखते थे।

信马:घोड़े को चाबुक लगाने की इच्छा न होना,उसे अपनी चाल से आगे बढ़ने देना।

太液:हान राजमहल में थाइये नामक एक सरोवर था।

未央:हान राजवंश में वेइयांग महल था। यहाँ ये उल्लेख थांग काल के छांगआन स्थित राजमहल के लिए प्रयुक्त हैं।

春风桃李花开夜:‘वसंत की हवा में आड़ू और आलूबुखारे के फूल खिलने की रात’;एक पाठ में 「春风桃李花开日」 अर्थात् ‘वसंत की हवा में आड़ू और आलूबुखारे के फूल खिलने का दिन’ है।

西宫南苑:एक पाठ में 「西宫南内」 है; राजमहल के भीतरी भाग को 大内 कहा जाता था। पश्चिमी महल से आशय पश्चिमी परिसर के ताइजी महल से है, और दक्षिणी परिसर शिंगछिंग महल था। श्वेनज़ोंग राजधानी लौटने के बाद पहले दक्षिणी परिसर में रहे। शांगयुआन युग के पहले वर्ष में शक्तिशाली हिजड़ा अधिकारी ली फ़ूगुओ ने सम्राट सूज़ोंग का नाम लेकर श्वेनज़ोंग को पश्चिमी परिसर में जाने के लिए विवश किया और उनके विश्वस्त गाओ लीशी, छन श्वानली आदि को निर्वासित कर दिया।

梨园弟子:वे संगीतकार और नर्तकियाँ जिन्हें कभी श्वानत्सोंग ने प्रशिक्षित किया था। 梨园:《新唐书·礼乐志》 के अनुसार, थांग श्वानत्सोंग के समय राजमहल में संगीत सिखाने की संस्था। वहाँ 「坐部伎」 अर्थात बैठकर प्रस्तुति देने वाले कलाकारों में से तीन सौ चुने गए और गीत-नृत्य का प्रशिक्षण दिया गया। वे सम्राट के आदेश पर कभी भी प्रदर्शन करते थे और 「皇帝梨园弟子」 अर्थात सम्राट के ली युआन शिष्य कहलाते थे।

椒房:रानियों और उपपत्नियों का निवास,दीवारों पर सिचुआनी मिर्च मिली मिट्टी का लेप होने से यह नाम पड़ा।阿监:महल की परिचारिका अधिकारी।青娥:युवा महलदासी।《新唐书·百官志》 के अनुसार,अंतःपुर की अनुशासन व्यवस्था में आच्येन और उप-च्येन अधिकारी थे,जिनका दर्जा सातवीं श्रेणी के समकक्ष था。

孤灯挑尽:प्राचीन समय में तेल के दीपक जलाए जाते थे; लौ तेज़ रखने के लिए बीच-बीच में तेल में भीगी बत्ती को थोड़ा आगे खिसकाना पड़ता था।挑尽 से संकेत मिलता है कि रात बहुत गहरा चुकी है। ध्यातव्य है कि तांग काल के महलों में रात को तेल के दीपक के बजाय मोमबत्तियाँ जलती थीं; यहाँ उद्देश्य श्युआनज़ोंग के अंतिम वर्षों के जीवन की दुखमय परिस्थितियों का वर्णन करना है।

迟迟:धीमा। पहर बताने वाली घंटियों और नगाड़ों के आरंभ और विराम का निश्चित समय होता था; यहाँ यह श्वेनज़ोंग की लंबी अनिद्र रात की मनःस्थिति बताता है।

耿耿:हल्की चमक का रूप।

欲曙天:लंबी रात के बाद भोर होने का समय。

鸳鸯瓦: छत पर उलटी-सीधी दिशा में आमने-सामने जुड़ी खपरैलें। 《三国志·魏书·方技传》 में दर्ज है कि सम्राट वेन ने स्वप्न में महल की छत की दो खपरैलें गिरते और मैंडरिन बत्तखों की जोड़ी बनते देखीं। एक ऊपर खुली और एक नीचे झुकी खपरैल के जोड़ को 阴阳瓦, अर्थात यिन-यांग खपरैल, तथा 鸳鸯瓦, अर्थात मैंडरिन बत्तख की जोड़ी वाली खपरैल, भी कहते हैं।

霜华:पाले के फूल।

翡翠衾:ऐसी रजाई जिसके कपड़े पर किंगफिशर पक्षी की कढ़ाई हो। 《楚辞·招魂》:翡翠珠被,烂齐光些。(किंगफिशर के पंखों और मोतियों से सजी ओढ़नी,चमकते रंगों से दमकती है。)यह उसकी बहुमूल्यता बताता है。

谁与共:किसके साथ साझा करूँ।

临邛道士鸿都客:आशय है कि लिनछ्योंग से आया एक दाओवादी साधक चांगआन में रह रहा था।临邛, आज सिचुआन का छ्योंगलाई ज़िला;鸿都, अमरों के निवास का संकेत।

致魂魄:यांग गुइफेई की दिवंगत आत्मा को बुलाना。

方士:अलौकिक विद्याओं वाला व्यक्ति। यहाँ ताओवादी साधक।

殷勤:पूरा प्रयत्न करना।

排空驭气:बादलों और कुहासे पर सवार होकर उड़ना。

穷:पूरी तरह खोजना,हर जगह ढूँढ़ना।

碧落:आकाश。

黄泉:भूमिगत लोक का संकेत।

海上仙山:समुद्र के अमर पर्वत।《史记·封禅书》 के अनुसार,राजा वेइ,श्युआन और येन चाओ ने लोगों को समुद्र में पंगलाई,फ़ांगचांग और यिंगचोउ खोजने भेजा;कहा जाता था कि ये तीन दिव्य पर्वत बोहाई समुद्र में हैं。

玲珑:सुंदर, बारीकी से गढ़ा हुआ।

五云:पाँच रंगों वाले आलोकित बादल。

绰约:हल्की, कोमल और सुंदर देह-मुद्रा।《庄子·逍遥游》:藐姑射之山,有神人居焉,肌肤若冰雪,绰约如处子。अर्थात दूर गूशे पर्वत पर एक दिव्य व्यक्ति रहता है, जिसकी त्वचा बर्फ जैसी है और देह-मुद्रा युवती जैसी कोमल-सुंदर है।

参差:मानो, लगभग।

金阙:《太平御览》 के खंड छियासठ में 《大洞玉经》 से उद्धरण है:शांगछिंग महल के द्वार में दो मीनारें हैं, बाईं स्वर्ण-मीनार और दाईं जेड-मीनार। 西厢:《尔雅·释宫》 में है:“室有东西厢日庙”—जिस भवन के पूर्व और पश्चिम में पार्श्वकक्ष हों, उसे मंदिर कहा जाता है। पश्चिमी पार्श्वकक्ष दाईं ओर है।

玉扃(jiōng):जेड का द्वार। 玉阙(जेड का राजमहल)का एक वैकल्पिक काव्यात्मक रूप।

转教小玉报双成:अर्थ यह है कि अमर लोक के महल में कई आँगन हैं और संदेश क्रमशः आगे पहुँचाना पड़ता है। 小玉:वू के राजा फूछाइ की बेटी। 双成:कथा में पश्चिम की रानी माता की परिचारिका। यहाँ दोनों नाम अमर पर्वत पर यांग ग्वेइफेइ की परिचारिकाओं के लिए प्रयुक्त हैं।

九华帐:सुंदर कढ़ाई वाला परदा।九华 से अनेक स्तरों के पुष्प-अलंकरण का बोध होता है, जो परदे की उत्कृष्टता बताते हैं।《宋书·后妃传》:自汉氏昭阳之轮奂,魏室九华之照耀。 अर्थ:हान के झाओयांग महल की भव्यता से लेकर वेइ के जिउहुआ की चमक तक।

珠箔:मोतियों का परदा।

银屏:चाँदी से सजी ओट-पट्टी।

迤逦:लगातार, एक के बाद एक।

云鬓:एक पाठांतर में 「云髻」 है; स्त्री के घने, सुंदर, बादलों जैसे केशों का वर्णन।

新睡觉:अभी-अभी नींद से जागना। 觉 का अर्थ जागना है।

袂(mèi):वस्त्र की आस्तीन।

飘飖:एक पाठांतर में 「飘飘」 है; दोनों में लहराने या तैरने का भाव है।

玉容寂寞:यहाँ आशय मुख की उदास, म्लान और दुखभरी अभिव्यक्ति से है।

阑干:आड़ी-तिरछी फैली हुई अवस्था। यहाँ पूरे चेहरे पर फैली आँसुओं की धारियों का वर्णन है।

凝睇(dì):एकटक देखना。

昭阳殿:हान सम्राट छंग की प्रिय उपपत्नी चाओ फ़ेइयेन का शयनमहल। यहाँ इससे यांग गुइफ़ेइ का निवासमहल अभिप्रेत है。

蓬莱宫:समुद्र में स्थित पौराणिक अमर पर्वत का महल। यहाँ उस पर्वत पर यांग गुइफ़ेई के निवास का संकेत है।

人寰(huán):मानव संसार。

旧物:जीवनकाल में श्युआनज़ोंग के साथ प्रेम-प्रतिज्ञा की निशानियाँ।

寄将去:दाओवादी साधु के हाथ वापस भेजना।

擘:अलग करना।

合分钿:जड़ाऊ डिबिया की आकृति को दो हिस्सों में बाँटना।

「钗留一股合一扇,钗擘黄金合分钿。」:सोने की केशपिन और जड़ाऊ डिबिया को दो हिस्सों में बाँटकर एक-एक हिस्सा अपने पास रखना।

但令:एक अन्य पाठ में 「但教」 मिलता है; दोनों का आशय ‘बस ऐसा हो कि’ है।

重寄词:विदा होते समय राजप्रिया ने फिर उसे संदेश ले जाने को कहा।

两心知:केवल श्वानजोंग और गुइफ़ेई, दोनों अपने मन में जानते थे।

长生殿: चांगशेंग महल, लिशान के हुआछिंग महल परिसर में स्थित, थ्येनबाओ के प्रथम वर्ष में बना। 「七月」 से आरंभ होने वाली अगली छह पंक्तियाँ कवि की कल्पना हैं। चेन यिनके ने 《元白诗笺证稿·长恨歌》 में लिखा: 「长生殿七夕私誓之为後来增饰之物语,并非当时真确之事实」。अर्थात चांगशेंग महल में सातवीं रात ली गई गुप्त प्रेम-शपथ बाद में जोड़ी गई कथा है, उस समय की प्रमाणित घटना नहीं। 「玄宗临幸温汤必在冬季、春初寒冷之时节。今详检两唐书玄宗记无一次于夏日炎暑时幸骊山。」 अर्थात श्वानज़ोंग गरम झरनों पर शीत ऋतु या आरंभिक वसंत की ठंड में ही जाते थे; दोनों तांग इतिहासों में उनके वृत्तांत की विस्तृत जाँच से गर्मियों की तपन में लिशान जाने की एक भी घटना नहीं मिलती। यहाँ उल्लिखित चांगशेंग महल भी हुआछिंग महल वाला नहीं, बल्कि चांगआन के राजमहल के शयनकक्ष का प्रचलित नाम है।

比翼鸟:किंवदंतियों का एक पक्षी; कहा जाता है कि उसकी केवल एक आँख और एक पंख होता है, इसलिए नर और मादा साथ जुड़कर ही उड़ सकते हैं।

连理枝:दो पेड़ों के तनों का आपस में जुड़कर बढ़ना। प्राचीन लोग इन दोनों वस्तुओं से प्रेमियों के पारस्परिक प्रेम और कभी अलग न होने की उपमा देते थे।

恨:खेद。

绵绵:बिना टूटे लगातार फैला हुआ।

无绝期:समाप्त होने का कोई समय नहीं। एक पाठ में “无尽期”, अर्थात जिसका अंत नहीं, भी है।

रचना का परिचय

《चिरंतन संताप का गीत》 थांग काल के कवि बाई जूयी की एक लंबी कथात्मक कविता है। पूरी कविता थांग सम्राट श्वेनज़ोंग और यांग गुइफ़ेई की प्रेम त्रासदी का सजीव वर्णन करती है। ऐतिहासिक पात्रों और किंवदंतियों के सहारे कवि ने अनेक मोड़ों वाली एक मार्मिक कथा रची है, और कलात्मक चरित्रों के माध्यम से वास्तविक जीवन की सच्चाई को पुनः प्रस्तुत किया है, जिसने सदियों से पाठकों को भावविभोर किया है। इस कविता का बाद की अनेक साहित्यिक रचनाओं पर गहरा प्रभाव पड़ा।

रसास्वादन और विवेचन

इस लंबी आख्यान-कविता में लेखक सधी भाषा, सुंदर बिंबों और कथा तथा गीतात्मक भाव के मेल से आन-शि विद्रोह के बीच तांग श्युआनज़ोंग और यांग गुइफ़ेइ की प्रेम-त्रासदी कहते हैं:उनका प्रेम उसी विद्रोह ने नष्ट किया जिसे उन्होंने स्वयं जन्म दिया, और वे निरंतर उसका मानसिक कड़वा फल भोग रहे हैं। तांग श्युआनज़ोंग और यांग गुइफ़ेइ ऐतिहासिक पात्र हैं, लेकिन कवि इतिहास से बँधे नहीं रहते। इतिहास की हल्की छाया, उस समय की लोककथाओं और गली-मोहल्लों के गीतों से वे एक घुमावदार, कोमल और मार्मिक कहानी विकसित करते हैं, और बार-बार लौटती, विरह से भरी कलात्मक शैली में उसका चित्रण और गायन करते हैं। कविता की कहानी और पात्र कलात्मक रूप में ढले हैं और वास्तविक मनुष्य की जटिल सच्चाई को पुनः प्रस्तुत करते हैं; इसी कारण वे हर युग के पाठकों के मन में लहरें जगाते हैं।

पूरी कविता तीन भागों में बँटी है: आरंभ से 「惊破霓裳羽衣曲」—युद्ध की आहट से ‘इंद्रधनुषी वस्त्र और पंखों की पोशाक’ की धुन टूटने तक—पहला भाग है। इसकी बत्तीस पंक्तियों में कवि तांग मिंगहुआंग और यांग गुइफेई का प्रेमजीवन, उससे उपजी शासन की उपेक्षा और देश की अव्यवस्था, तथा आन-शी विद्रोह का आरंभ बताता है। दूसरा भाग 「九重城阙烟尘生」—राजधानी के महलों पर युद्ध की धूल उठने से—「魂魄不曾来入梦」—उसकी आत्मा के सपने में भी न आने तक—बयालीस पंक्तियों का है। इसमें मावेई पड़ाव के सैनिक विद्रोह में यांग गुइफेई की हत्या और उसके बाद तांग श्वेनज़ोंग का उसे याद करना वर्णित है। 「临邛道士鸿都客」—लिनछ्योंग के ताओवादी साधक, राजधानी के अतिथि—से अंत तक अंतिम भाग है, जिसमें साधक तांग श्वेनज़ोंग की सहायता के लिए अमर पर्वत पर यांग गुइफेई को खोजता है।

कवि आरंभ में ही 「汉皇重色思倾国」(हान सम्राट रूप का लोभी था, अनुपम सुंदरी चाहता था)के माध्यम से तांग काल की विपत्ति का कारण बताता है और कथा के दुखांत तत्व को प्रकट करता है। यह साधारण लगता है, मानो कहानी यहीं से शुरू होनी चाहिए थी और लेखक को विशेष विचार नहीं करना पड़ा हो; वस्तुतः इन सात अक्षरों में अत्यधिक अर्थ समाया है। ये पूरी रचना का सूत्र हैं, दुखांत तत्व को उजागर भी करते हैं और समूची कविता को जागृत कर उसका संचालन भी करते हैं। आगे की सारी घटनाएँ यहीं से निकलती हैं। इसके बाद कविता धीरे धीरे, परत दर परत खुलती है:पहले तांग श्वेनज़ोंग की रूपासक्ति और सुंदरियों की हर तरह से खोज का वर्णन है, जिसके बाद वह अंततः यांग गुइफेई को अपने आलिंगन में लेता है, जिनके लिए कहा गया है 「回眸一笑百媚生,六宫粉黛无颜色」(मुड़कर एक मुस्कान बिखेरते ही सौ मोहक अदाएँ खिल उठती हैं, छह महलों की सभी सुंदरियाँ फीकी पड़ जाती हैं)。इसके बाद यांग गुइफेई के सौंदर्य और मोहकता का चित्रण है, और यह कि इसी कारण उन्हें अंतःपुर में विशेष कृपा मिली। 「姊妹弟兄皆列土」(बहनों और भाइयों सभी को जागीरें मिलीं), ठीक उस कहावत की तरह 「一人得道,鸡犬升天」(एक व्यक्ति सिद्धि पाए तो उसके मुर्गे और कुत्ते भी स्वर्ग पहुँचते हैं); यांग गुइफेई के कारण यांग परिवार अत्यंत शक्तिशाली और अहंकारी हो गया। यांग गुइफेई को पाकर तांग श्वेनज़ोंग भोग और मनोरंजन का जीवन जीने लगा, दिन भर गीत, नृत्य, मदिरा और रूप में डूबा रहता, यहाँ तक कि 「从此君王不早朝」(तब से सम्राट सुबह की राजसभा में नहीं गया)。कवि इसे बार बार उभारता है, जिससे आन शि विद्रोह के फूटने का कारण स्पष्ट होता है। यह भाग संपूर्ण प्रेम त्रासदी का आधार है और 「长恨」(चिरंतन विरहव्यथा)का आंतरिक कारण है। 「कवि राजमहल के जीवन के इस यथार्थ चित्रण से कुछ व्यंग्य के साथ कथा के नायक और नायिका से परिचय कराता है:एक सम्राट जो रूप को अधिक और राज्य को कम महत्व देता है, एक मोहक राजपत्नी जो मिली कृपा पर इठलाती है। साथ ही सजीव संकेत देता है कि तांग श्वेनज़ोंग की रूपमोह में राज्य की उपेक्षा ही इस त्रासदी की जड़ है।

इस प्रेम-त्रासदी में यांग गुइफ़ेई की मृत्यु एक निर्णायक प्रसंग है। दूसरे भाग में कवि आन-शी विद्रोह के बाद सम्राट और उसकी सेना के घबराकर दक्षिण-पश्चिम भागने का विस्तार से वर्णन करता है, विशेषकर इस उथल-पुथल में तांग श्वेनत्सोंग और यांग गुइफ़ेई के प्रेम के विनाश का। यही यांग गुइफ़ेई की मृत्यु का कारण बनता है।「六军不发」, अर्थात सेना आगे बढ़ने से इनकार कर यांग गुइफ़ेई की मृत्यु माँगती है; इससे पता चलता है कि उनके प्रति सम्राट का पक्षपात और मोह जनाक्रोश जगा चुका था। कवि छह पंक्तियों में उनका अंतिम बिछोह लिखता है:「六军不发无奈何,宛转蛾眉马前死。花钿委地无人收,翠翘金雀玉搔头。君王掩面救不得,回看血泪相和流。」अर्थात सेना न चली, कोई उपाय न रहा; सुंदर नारी घोड़े के आगे प्राण गँवा बैठी। फूलदार आभूषण ज़मीन पर पड़े रहे, हरे पंख, सुनहरी चिड़िया और जेड की केशपिन किसी ने न उठाई। राजा मुख ढाँपे उसे बचा न सका; पलटकर देखा तो रक्त और आँसू साथ बहे। दुख शब्दों से उमड़ पड़ता है। विशेषतः「君王掩面救不得,回看血泪相和流」में कवि सूक्ष्म लेखनी से श्वेनत्सोंग का अंतर्द्वंद्व और पीड़ा मूर्त करता है: प्रिय को खोना असह्य है, फिर भी बचाना उसके वश में नहीं।

यांग गुइफ़ेई की मृत्यु के बाद तांग श्वानज़ोंग की विरहपीड़ा का कवि ने सीधा वर्णन नहीं किया। उन्होंने पात्र के अंतर्मन की हृदयविदारक 「恨」—अतृप्त वेदना—को पकड़कर कोमल, करुण विरहभाव व्यक्त किया है। 「君臣相顾尽沾衣」 से 「魂魄不曾来入梦」 तक—राजा और मंत्री एक-दूसरे को देखकर आँसुओं से वस्त्र भिगोते हैं, पर उसकी आत्मा स्वप्न में भी नहीं आती—का भाग बताता है कि स्थिति स्थिर होने के बाद तांग मिंगहुआंग शू से राजधानी लौटे और मार्ग में मावेई ढलान ने पीड़ादायक स्मृतियाँ जगा दीं। राजधानी लौटने पर दृश्य और अधिक दुःख जगाते हैं;सुबह-शाम की यादों से उपजी उदासी दूर नहीं होती। महल लौटकर वस्तुएँ वही हैं, व्यक्ति बदल चुके हैं। दिन में वस्तुएँ देखकर दुःख होता है;रात में 「孤灯挑尽」—अकेले दीपक की बत्ती सँभालते-सँभालते रात बीत जाती है—फिर भी 「成眠」—नींद—नहीं आती। दिन-रात का स्मरण भी इस गहरे, उलझे विरह को समाप्त नहीं कर पाता। स्वप्न से आशा बाँधते हैं;एक जीवित और दूसरी मृत, अलग हुए कितने महीने बीत गए, पर 「魂魄不曾来入梦」—उसकी आत्मा कभी सपने में नहीं आई। 「长恨」 की यह 「恨」—चिरस्थायी अतृप्त वेदना—अंतर्मन को झकझोर देती है।

「临邛道士鸿都客」से कविता के अंत तक ताओवादी साधु द्वारा तांग श्वेनत्सोंग को यांग गुइफ़ेई की खोज में सहायता देने का वर्णन है। कवि कल्पनाप्रधान शैली अपनाता है, कभी आकाश में, कभी धरती के नीचे जाता है:「上穷碧落下黄泉,两处茫茫皆不见」, अर्थात ऊपर नीले गगन और नीचे मृत्युलोक तक खोजा, पर दोनों अथाह लोकों में वह न मिली। बाद में समुद्र के मायावी अमर पर्वत पर यांग गुइफ़ेई मिलती हैं।「玉容寂寞泪阑干,梨花一枝春带雨」, अर्थात एकाकी सुंदर मुख पर आँसू बहते हैं, जैसे वसंत-वर्षा में नाशपाती के फूलों की एक डाल—इस रूप में वे अमर लोक में फिर दिखाई देती हैं। वे हान राजघराने के दूत का स्नेह से स्वागत करती हैं, प्रेमभरी दृष्टि रखती हैं, वस्तुओं और संदेश द्वारा भाव पहुँचाती हैं और पुरानी प्रतिज्ञा दोहराती हैं। यह श्वेनत्सोंग की उनकी याद का प्रत्युत्तर है और “长恨”, अर्थात अंतहीन विरह-वेदना, के विषय को गहरा करता है। अंत में「天长地久有时尽,此恨绵绵无绝期」, अर्थात आकाश और धरती की दीर्घ आयु भी कभी समाप्त होगी, पर यह वेदना अनवरत रहेगी—से विषय स्पष्ट होता है और आरंभ की प्रतिध्वनि मिलती है। साथ ही「清音有馀」, अर्थात निर्मल स्वर की गूँज शेष रहती है, जो पाठक को कल्पना और पुनरास्वादन की जगह देती है।

《长恨歌》 अर्थात चिरंतन विरह का गीत सबसे पहले अपनी मार्मिक, मोड़भरी कथा और सूक्ष्म, अनूठी कलात्मक परिकल्पना से सौंदर्य का आनंद देता है। पूरी रचना का केंद्र 「长恨」—अंतहीन विरह—का गायन है, पर कवि 「重色」—रूप के प्रति आसक्ति—से आरंभ करता है और उसका भरपूर विस्तार करता है। 「日高起」—सूरज चढ़ने पर उठना, 「不早朝」—प्रातः दरबार न जाना, 「夜专夜」—हर रात उसी को समर्पित होना, 「看不足」—देखकर भी मन न भरना—आदि परम आनंद, मानो किसी सुखांत नाटक का दृश्य लगते हैं; किंतु यही चरम सुख आगे के अनंत दुख को और तीखा करता है। थांग श्वानत्सोंग के भोगविलास ने राज्य को हानि पहुँचाई और राजनीतिक त्रासदी पैदा की, जिसने फिर उनके और यांग ग्वेइफेइ के प्रेम की त्रासदी को जन्म दिया। त्रासदी रचने वाला अंत में उसका नायक बनता है:यही कथा की विशेषता और जटिल मोड़ है, तथा दोनों प्रमुख पात्रों के अंतहीन विरह का कारण भी। पहले अनेक लोगों ने इस कविता में व्यंग्यात्मक चेतावनी देखी है; उसका आशय यहीं है। मावेइ ढलान पर यांग ग्वेइफेइ की मृत्यु का दृश्य कवि ने अत्यंत सूक्ष्मता से उकेरा है। श्वानत्सोंग अपने प्रेम को छोड़ नहीं पाते, पर बचाना चाहते हुए भी बचा नहीं सकते; उनका यह आंतरिक संघर्ष और पीड़ा मूर्त रूप में सामने आते हैं। इसी 「血泪相和流」—रक्त और आँसू साथ बहने—वाले मृत्यु-वियोग से अंतहीन दुख जन्म लेता है। इसके बाद कवि अनेक दृष्टियों से बार-बार विस्तारपूर्वक श्वानत्सोंग की यांग ग्वेइफेइ के लिए तड़प उभारता है। किंतु कथानक एक भाव-बिंदु पर रुकता नहीं। पात्र के भीतरी संसार की परतें खुलती हैं, उसकी भावना से अनुरूप दृश्य बदलते हैं और समय तथा कथा आगे बढ़ते हैं; विचार और भाव ही कथानक को विस्तार और गति देते हैं। श्वानत्सोंग मृत्यु-वियोग के बाद शू भागते हैं और भीतर से बहुत दुखी तथा व्यथित हैं; राजधानी लौटते समय पुराने स्थान फिर देखने से दर्दभरी स्मृतियाँ जागती हैं; महल लौटकर दिन में वस्तुएँ देखकर दुख होता है और रात में करवटें बदलते नींद नहीं आती। दिन-रात सोचने पर भी मिलन नहीं होता, इसलिए स्वप्न से आशा बाँधते हैं, पर 「悠悠生死别经年,魂魄不曾来入梦」—जीवन और मृत्यु का लंबा बिछोह वर्षों चला, फिर भी उसकी आत्मा सपने में कभी न आई। यहाँ तक कविता चिरंतन विरह के दुख को अत्यंत मर्मस्पर्शी बना चुकी है; कथा यहीं समाप्त हो सकती थी। फिर भी कवि अचानक लेखनी मोड़कर नया लोक खोलता है। कल्पना के रंगीन पंखों पर सुंदर, मनमोहक अमर लोक रचकर वह त्रासद कथा को चरम पर पहुँचाता है; कथा और घुमावदार, उतार-चढ़ाव तथा तरंगों से भरी बनती है। यह मोड़ अप्रत्याशित भी है और भाव तथा तर्क के अनुकूल भी। निजी इच्छा और वस्तुगत वास्तविकता के निरंतर संघर्ष और टकराव से कविता पात्र के मन के असंख्य मोड़ों को पूरी तरह व्यक्त करती है; इससे कथा और भी मार्मिक हो जाती है।

《长恨歌》(अनंत विरह का गीत)गहरे गीतात्मक भावों वाली कथात्मक कविता है। कथा कहने और पात्र रचने में कवि ने चीनी पारंपरिक काव्य की भावाभिव्यक्ति की कुशल विधियों का प्रयोग किया है,और कथा,दृश्य-वर्णन तथा भावाभिव्यक्ति को सुसंगत रूप से मिलाकर कविता में भावों के बार-बार लौटने की विशेषता बनाई है। कभी कवि पात्रों के विचार और भाव दृश्यों में भर देता है,और दृश्यों में उनके प्रतिबिंब से मनःस्थिति उभारता है;कभी पात्रों के आसपास की विशिष्ट वस्तुओं और दृश्यों को पकड़कर,उनके प्रति पात्रों की अनुभूति से भीतर के भाव प्रकट करता है। इस तरह परत-दर-परत रंग भरते हुए वह उन भावनाओं को सटीक ढंग से व्यक्त करता है जो मन की गहराई में संचित हैं और कहना कठिन है। तांग श्वानज़ोंग के दक्षिण-पश्चिम की ओर पलायन के रास्ते में हर ओर पीली धूल,चट्टानों से लगे लकड़ी के पथ और ऊँचे पर्वत हैं,धूप म्लान है,ध्वज निष्प्रभ हैं,शरद का दृश्य उदास है। यहाँ विषादपूर्ण शरद-दृश्य से पात्र की शोकभरी स्मृतियाँ उभारी गई हैं। शू प्रदेश में हरे पर्वतों और निर्मल जल के सामने भी वह सुबह-शाम अपना प्रेम नहीं भूल पाता। शू के पर्वत और नदियाँ मूलतः अत्यंत सुंदर हैं,पर अकेले और दुःखी तांग श्वानज़ोंग की आँखों में पर्वतों का 「青」(हरा)और जल का 「碧」(पन्ने जैसा नीला-हरा)भी मन को चोट पहुँचाते हैं। प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेने के लिए शांत मन चाहिए,जो उसके पास नहीं,इसलिए भीतर का कष्ट और बढ़ जाता है। यह सुंदर दृश्य के माध्यम से शोक व्यक्त करना है,जिससे भावना एक परत और गहरी हो जाती है। अस्थायी राजप्रासाद की चाँदनी और वर्षा की रात की घंटियों की ध्वनि पहले से ही भाव जगाने वाली हैं। कवि इन सामान्य किंतु विशिष्ट वस्तुओं को पकड़कर पाठक को दुःख और हृदयविदारक व्यथा के संसार में ले जाता है। साथ ही देखी और सुनी चीज़ें,रंग और ध्वनियाँ,एक-दूसरे में गुंथकर भाषा और स्वर में भी पात्र के मन की उदासी और सूनेपन को व्यक्त करती हैं। यह एक और परत है। राजधानी लौटते समय 「天旋地转」(आकाश और धरती मानो पलट गए),यह मूलतः प्रसन्नता की बात थी,पर उन्हीं पुरानी जगहों से दोबारा गुजरते हुए वह सुंदर मुख नहीं दिखता,तो अनायास दुःख के आँसू बह निकलते हैं। कथा में पीड़ादायक स्मृति की एक और परत जुड़ जाती है। छांगआन लौटने के बाद,「归来池苑皆依旧,太液芙蓉未央柳。芙蓉如面柳如眉,对此如何不泪垂」。(लौटकर देखा,ताल और उद्यान पहले जैसे हैं,ताइये के कमल और वेइयांग के विलो। कमल उसके मुख जैसे हैं,विलो उसकी भौंहों जैसे,इन्हें देखकर आँसू कैसे न बहें。)दिन में परिवेश और दृश्य मन को छूते हैं,दृश्यों से उस व्यक्ति की याद आती है। दृश्य वैसे ही हैं,पर वह नहीं रही,और आँसू रोके नहीं रुकते। ताइये ताल के कमलों और वेइयांग महल के विलो में मानो यांग गुइफेई का रूप दिखाई देता है। इससे पात्र के अत्यंत जटिल और सूक्ष्म मानसिक भाव प्रकट होते हैं। 「夕殿萤飞思悄然,孤灯挑尽未成眠。迟迟钟鼓初长夜,耿耿星河欲曙天。」(साँझ के महल में जुगनू उड़ते हैं,मन नीरव विषाद में डूबा है;अकेले दीपक की बाती पूरी सँवार ली,फिर भी नींद नहीं आई। घंटों और नगाड़ों की धीमी ध्वनि में लंबी रात शुरू हुई;जगमगाती आकाशगंगा के साथ भोर होने को है。)साँझ से भोर तक का यह वर्णन रात में स्मृतियों से घिरे रहकर देर तक न सो पाने की दशा को केंद्रित रूप से दिखाता है। यह पीड़ाभरी याद 「春风桃李花开日」(वसंत की हवा में आड़ू और आलूबुखारे के फूल खिलने के दिनों)में भी ऐसी ही है,और 「秋雨梧桐叶落时」(शरद-वर्षा में वुतोंग के पत्ते झरने के समय)में भी। जब वह देखता है कि पुराने 「梨园弟子」(लीयुआन के कलाकार)और 「阿监青娥」(महल की सेविकाएँ)भी श्वेतकेशी और वृद्ध हो गई हैं,तो पुराने सुखों की याद और जागती है,और मन स्वाभाविक रूप से गहरे विषाद में डूब जाता है। चारों ओर बिखरी पीली धूल से शू के हरे पर्वतों तक,अस्थायी प्रासाद की वर्षा से विजय के बाद लौटने तक,दिन से रात तक,वसंत से शरद तक,हर जगह वस्तुएँ दुःख जगाती हैं,हर समय दृश्य प्रिय की याद दिलाते हैं। इस तरह अनेक दिशाओं से कविता के मुख्य पात्र की व्याकुल खोज को बार-बार गहरा किया गया है। वास्तविक जीवन में नहीं मिलती तो सपने में खोजता है;सपने में नहीं मिलती तो अमर लोक में खोजता है। इन उतार-चढ़ावों,बार-बार लौटने और परत-दर-परत भाव गहराने से पात्र की अनुभूति घूमती हुई ऊपर उठती है और चरम पर पहुँचती है। इसी क्रमिक विस्तार,बार-बार की भावाभिव्यक्ति और पुनरावर्तन से कवि पात्र के विचारों और भावों को अधिक गहरा तथा समृद्ध करता है,कविता की 「肌理细腻」(बुनावट सूक्ष्म और कोमल)बनाता है,और उसकी कलात्मक प्रभावशीलता बढ़ाता है。

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AI की सहायता से रचित · पात्र और कथानक काल्पनिक हैं

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