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सूर्य ऊँचा चढ़ आया, कुहासा सिमट गया, फिर देखूँ आज आकाश साफ हुआ या नहीं।

न्येननूच्याओ·वसंत के भाव

सोंग राजवंश・ली छिंगझाओ

萧条庭院,又斜风细雨,重门须闭。宠柳娇花寒食近,种种恼人天气。险韵诗成,扶头酒醒,别是闲滋味。征鸿过尽,万千心事难寄。 सूना आँगन, फिर तिरछी हवा और महीन बारिश, भीतर-बाहर के द्वार बंद करने होंगे। लाड़ले विलो और कोमल फूलों के बीच हानशि पर्व निकट है, तरह-तरह का परेशान करने वाला मौसम। कठिन तुकों की कविता बन गई, सिर भारी करने वाली मदिरा का नशा उतर गया, अवकाश का यह अलग ही स्वाद है। प्रवासी हंस सब गुज़र गए, मन की हज़ारों बातें भेजना कठिन है।

ऊपरी कक्ष में कई दिनों से वसंत की ठंड है,चारों ओर परदे झुके हैं,जेड की रेलिंग पर टिकने का भी मन नहीं।रज़ाई ठंडी,धूप की सुगंध बुझ गई,नए स्वप्न से जाग उठा,दुखी मनुष्य को उठे बिना रहने नहीं देती।सुबह निर्मल ओस बहती है,नए वूथोंग अंकुर खिंचते हैं,वसंत में घूमने की कितनी उमंग है।सूर्य ऊँचा हुआ,धुंध सिमटी,फिर देखूँ आज आकाश खुला है या नहीं。

काव्यभाव को बहने दें

काव्यलोक का एनिमेशन

एनिमेशन की सामग्री मूल चीनी में रखी गई है।

एनीमेशन तैयार है।

AI चित्रांकन

अनुवाद

आँगन सूना और ठंडा है,ऊपर से तिरछी हवा और महीन वर्षा,एक-एक द्वार बंद करने पड़ते हैं।हानशी त्योहार पास है,विलो कोमल हैं,फूल मनमोहक,पर मौसम तरह-तरह से मन खिन्न करता है।कठिन तुकों में कविता पूरी हुई,तीखी मदिरा का नशा भी उतर गया,एकांतवास का अपना अनकहा स्वाद है।दूर उड़ते हंस सब गुजर गए,फिर भी हज़ारों मनोभाव भेजना कठिन है。

ऊपरी कक्ष में कई दिनों से वसंत की ठंड बनी है, चारों ओर परदे लटके हैं, जेड की रेलिंग पर टिकने का भी मन नहीं। रज़ाई धीरे-धीरे ठंडी पड़ती है, धूप का धुआँ बिखर जाता है;अभी स्वप्न से जागी हूँ, दुःखी मन उठना न चाहे तो भी उठना पड़ेगा। भोर की ओस बह रही है, नए वूतोंग में कलियाँ फूटने लगी हैं, और न जाने कितनी बार बाहर वसंत-विहार की इच्छा जगती है। सूरज ऊँचा चढ़े और धुँध हटे, तब देखूँगी कि क्या आज आखिर मौसम साफ़ हुआ है।

टिप्पणियाँ

宠柳娇花:दुलारे और लाड़ले व्यक्ति जैसे मनमोहक विलो और फूल।险韵:दुर्लभ,कठिन तुक।扶头酒:ऐसी तीखी मदिरा जो शीघ्र नशे में चूर कर दे,सिर सँभालने को सहारा चाहिए。

征鸿:दूर उड़ने वाले जंगली हंस, जिन्हें प्रायः संदेश पहुँचाने से जोड़ा जाता है।慵(yōng):किसी काम में आलस्य करना।新梦觉:अभी-अभी स्वप्न से जागना, यहाँ 觉 का उच्चारण jué है।

新桐初引:वुतोंग वृक्ष की नई कोंपलें लंबी होने लगी हैं।烟敛:धुंध छँट गई है।晴未:क्या मौसम साफ़ हुआ है।

रचना का परिचय

रचना-परिचय: ली छिंगझाओ हानशि पर्व के आसपास वसंत की निठल्ली उदासी लिखती हैं। काव्य-पात्र कभी वर्षा से बचने के लिए दरवाज़े बंद करती है और रेलिंग के सहारे खड़े होने का भी मन नहीं करती, तो कभी सुबह की नई कोंपलें देखकर वसंत-विहार की इच्छा से भर उठती है। भावों के इन मोड़ों से “春情”, अर्थात वसंत की अनुभूति, में उपेक्षा, स्मृति और जीवन से आशा—तीनों समा जाते हैं।

रसास्वादन और विवेचन

कविता लिखना और मदिरा पीना मूलतः मन बहलाने के उपाय हैं, लेकिन इस छंद में कविता पूरी होने और नशा उतरने के बाद भी अनाम उदासी बची रहती है। हंस सब उड़ चुके हैं, मानो भाव पहुँचाने की संभावना भी उनके साथ चली गई हो; इसलिए पूर्वार्ध का भाव धीरे-धीरे भारी होता जाता है।

दूसरा खंड अंत तक ठंडी रज़ाई और बची हुई सुगंध में बंद नहीं रहता। तुंग के नए पत्ते और निर्मल ओस फिर वसंत में घूमने की इच्छा जगाते हैं। अंत का “晴未” अर्थात् ‘मौसम साफ़ हुआ या नहीं’ आशा को मौसम के एक अनिश्चित प्रश्न पर टिकाता है, और उदासी के भीतर भी बाहर की दुनिया की ओर जाने की जीवंत इच्छा को सूक्ष्मता से बचाए रखता है।

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चेंग छी ने पूरे वसंत चारों ओर के परदे गिराए रखे, और हर अतिथि से कहा गया कि वह गंभीर रूप से बीमार है। पिछले वर्ष भोज में उपहास का कारण बनी कविता का दुख अभी गया भी नहीं था कि बाहर उसके नाम से एक नई रचना फैलने लगी, जिसका व्यंग्य उसकी पुरानी मित्र लियांग सू पर था। पुस्तक-दुकान का कारोबार दिनोदिन ठंडा पड़ रहा था। चेंग छी ने सफ़ाई लिखने को काग़ज़ बिछाया, लेकिन “断非我作” (यह निश्चित ही मेरी रचना नहीं है) लिखते समय अचानक उसकी क़लम रुक गई।

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AI की सहायता से रचित · पात्र और कथानक काल्पनिक हैं

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