पुसुआनज़ि · मेइ पुष्प की स्तुति
सोंग राजवंश・लू योउ
सोंग राजवंश・लू योउ
पड़ाव के बाहर टूटे पुल के पास, अकेली खिलती हूँ, कोई स्वामी नहीं। पहले ही साँझ है और अकेले दुखी हूँ, ऊपर से हवा और वर्षा भी।
वसंत के लिए कष्ट सहकर होड़ की इच्छा नहीं, दूसरे फूल ईर्ष्या करें तो करें। झरकर मिट्टी बने, पिसकर धूल हो जाए, केवल सुगंध पहले जैसी रहती है।
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पड़ाव के बाहर टूटे पुल के पास मेइ का फूल अकेला खिलता है, उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं। साँझ हो गई है; वह अकेले दुख सहता है, फिर हवा और वर्षा की मार भी झेलता है। वसंत की शोभा के लिए होड़ करने की उसकी इच्छा नहीं, दूसरे फूल ईर्ष्या करें तो करें; झरकर मिट्टी में मिलने और धूल में पिस जाने पर भी उसकी सुगंध नहीं बदलती।
驿:प्राचीन काल में सरकारी पत्र पहुँचाने और आने-जाने वालों को ठहराने का डाक-पड़ाव।无主:जिसकी कोई सुध या देखभाल न करे।更著:उस पर और जुड़ना।苦:पूरा ज़ोर लगाकर, जी-जान से।
一任:पूरी तरह छोड़ देना, जैसा हो होने देना। 群芳:विभिन्न फूल;वास्तविक जीवन में समकक्षों से संबंधों की अनुभूति भी इसमें निहित हो सकती है। 碾:पीसकर चूर करना। 如故:पहले जैसा।
रचना-परिचय:लू योउ मेइ के फूल की परिस्थितियों से अपनी अटल निष्ठा व्यक्त करते हैं। पहला खंड अकेलेपन और बाहरी आघातों का वर्णन करता है, दूसरा मेइ की इच्छा और सुगंध का; इस प्रकार परिस्थितियों और चुनाव का विरोध उभरता है। विश्वसनीय प्रमाण के अभाव में इसे किसी एक राजनीतिक घटना से जबरन जोड़ना आवश्यक नहीं।
टूटा पुल, साँझ और हवा-बारिश एक के बाद एक मेइ के फूल का अकेलापन गहरा करते हैं, पर उसका मूल्य उसके परिवेश से तय नहीं होता। दूसरे खंड में “无意” और “一任”—स्पर्धा की इच्छा न रखना और दूसरों को अपनी मर्ज़ी करने देना—आते हैं; निष्क्रिय पीड़ा की जगह अपना चुनाव लेना शुरू करता है।
अंत क्रमशः फूल झरने से मिट्टी बनने और फिर धूल होने तक का विनाश लिखता है, जबकि “香如故”—सुगंध पहले जैसी है—अपरिवर्तित रहता है। व्यक्तित्व का प्रतीकात्मक अर्थ इस अनुभूत सुगंध में निहित है; वह दृढ़ भी है और वस्तु-वर्णन की ठोस छवि भी बनाए रखता है।
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गुरुकुल से निकाले जाने के बाद श्ये वेई ने टूटे पुल के पास झोंपड़ी बनाकर उपचार शुरू किया, और अपने निर्दोष होने का प्रमाण देने वाला एक काग़ज़ सँजोए रखा। वर्षा की रात उसने तीर से घायल यात्री के लिए पुरानी धूप जलाई, लेकिन उसी से उन घोड़ों की घंटियाँ आ पहुँचीं जो दो वर्ष से उसे खोज रहे थे; और घायल वही व्यक्ति था जिसने तब उसके निष्कासन के आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। सुगंध की थैली अब भी उसकी कमर से लगी थी, पुल की मेहराब के बाहर पानी धीरे-धीरे चढ़ रहा था, और उसे पूर्वी सागर जाने वाली वह नाव याद आई जिस पर बहुत पहले चढ़ जाना चाहिए था।
पढ़ना शुरू करेंAI की सहायता से रचित · पात्र और कथानक काल्पनिक हैं