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《पुराना पथ और ढलता सूरज》 का आवरण

प्राचीन चीनी शैली का भावपूर्ण संगीत · AI संगीत सृजन

पुराना पथ और ढलता सूरज

कू वूजी · AI संगीत · 2 बार पढ़ा गया

मा झियुआन की 《天净沙·秋思》, अर्थात थ्येनजिंगशा की धुन पर शरद-विचार, से भाव ग्रहण किए गए हैं। 枯藤老树昏鸦,小桥流水人家,古道西风瘦马;夕阳西下,断肠人在天涯。 अर्थात सूखी लताएँ, पुराना पेड़ और साँझ के कौए, छोटा पुल, बहता पानी और घर, पुरानी राह, पछुआ हवा और दुबला घोड़ा; सूरज पश्चिम में ढलता है, टूटे दिल वाला मुसाफ़िर दुनिया के छोर पर है। नौ बिंब सादे शब्दचित्रों से शरद की ग्रामीण साँझ रचते हैं; मुसाफ़िर दुबले घोड़े को थामे पुरानी राह पर चलता है, घरों के दीप और दूर देश में उसका टूटा दिल आमने-सामने हैं। पुरुष और महिला स्वर समान गीत-पाठ गाते हैं।

गीत की वह पंक्ति

枯藤老树昏鸦 — सूखी बेलें,पुराना पेड़,साँझ के कौए

小桥流水人家(छोटा पुल,बहता पानी,लोगों के घर)

प्रेरणा देने वाली मूल कविता मा झियुआन ·《तियानजिंगशा·शरद के विचार》
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शब्दों में गीत बसे हैं

गीत के बोल

[प्रस्तावना]

[अंतरा 1]

साँझ धीरे-धीरे गहराती जाती है

दूर के गाँव में, दीयों के फूल खिल उठे

कौआ एक बार काँव कर गया

एक पुकार के बाद दूसरी, आवाज़ बैठती जाती है

मैं दुबले घोड़े की लगाम थामे चलता हूँ

घोड़े की टापों ने साँझ को,थका डाला है

[मुखड़े से पहले]

छोटे पुल के नीचे बहता पानी

किसके घर की बाड़ के पास से बहता है

[मुखड़ा]

枯藤老树昏鸦 — सूखी बेलें,पुराना पेड़,साँझ के कौए

小桥流水人家(छोटा पुल,बहता पानी,लोगों के घर)

古道西风瘦马 — पुराना मार्ग, पश्चिमी हवा, दुबला घोड़ा

साँझ का सूरज धीरे-धीरे पश्चिम में ढलता है

断肠人在天涯(टूटे हृदय वाला व्यक्ति दूर दुनिया के छोर पर है)

शरद की हवा ने किसकी व्याकुल चाह को, सुखा दिया

[अंतरा 2]

चूल्हों का धुआँ लकीर दर लकीर उठता है

कुछ लोग चूल्हे की आग के पास, बातें कर रहे हैं

पके भोजन की सुगंध बाहर तैर आती है

परदेसी का गला, भर आता है

लोगों के घरों के दीये सब जल उठे हैं

बस मेरी परछाईं, मेरे साथ चल पड़ती है

[मुखड़े से पहले]

पछुआ हवा हर झोंके के साथ तेज़ होती जाती है

ऐसी बहती है कि मन में, पाला भर जाता है

[मुखड़ा]

枯藤老树昏鸦 — सूखी बेलें,पुराना पेड़,साँझ के कौए

小桥流水人家(छोटा पुल,बहता पानी,लोगों के घर)

古道西风瘦马 — पुराना मार्ग, पश्चिमी हवा, दुबला घोड़ा

साँझ का सूरज धीरे-धीरे पश्चिम में ढलता है

断肠人在天涯(टूटे हृदय वाला व्यक्ति दूर दुनिया के छोर पर है)

शरद की हवा ने किसकी व्याकुल चाह को, सुखा दिया

[वाद्य-संगीत]

[अंतरा 3]

मेरा गाँव हज़ार पहाड़ों के पार है

बादलों के पार, धूल भरी हवाओं के पार

दिल दुख से नहीं टूटता

क्योंकि सपने में माँ पुकार लिया

डूबता सूरज बहुत जल्दी पश्चिम में उतर जाता है

दुनिया के छोर को रोशन कर देता है, किसी चित्र की तरह

[सेतु]

आख़िर दुनिया का छोर कितना दूर है

राहगीरों से पूछा, किसी ने जवाब नहीं दिया

कोई कहता है घर एक दीपक है

जहाँ घर है, वहाँ दीपों की चहल-पहल है

पुरानी राह पर चलते-चलते अँधेरे तक आ पहुँचा

तो तारों की रोशनी,मेरे लिए मोमबत्ती जला देती है

कल फिर आगे चलेंगे

कल आने दो, क्षितिज पर फिर भोर की लालिमा होगी

[अंतरा 4]

रात का अँधेरा पुराने रास्ते पर फैलता है

गाँव सो गया,चाँदनी की महीन ओढ़नी में

मैं और मेरा दुबला घोड़ा

रात साये को, खींचती ही जाती है

चलते थक जाओ तो थोड़ा सुस्ता लो

साथ रखी चाय का एक घूँट लो, जो पूरी ठंडी हो चुकी है

[अंतिम मुखड़ा]

枯藤老树昏鸦 — सूखी बेलें,पुराना पेड़,साँझ के कौए

小桥流水人家(छोटा पुल,बहता पानी,लोगों के घर)

古道西风瘦马 — पुराना मार्ग, पश्चिमी हवा, दुबला घोड़ा

साँझ का सूरज धीरे-धीरे पश्चिम में ढलता है

断肠人在天涯(टूटे हृदय वाला व्यक्ति दूर दुनिया के छोर पर है)

शरद की हवा ने किसकी व्याकुल चाह को, सुखा दिया

[समापन]

भोर होते ही फिर सफ़र पर चलना है

कदम-कदम चलते रहो, कभी तो पहुँचोगे

शास्त्रीय काव्य का भावलोक और मौलिक गीत-बोल · AI संगीत सृजन

नीचे गीत के बोलों का अनुवाद है; रिकॉर्डिंग में मूल गायन ही है, ऑडियो दोबारा तैयार नहीं किया गया है।

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पुराना पथ और ढलता सूरज

कू वूजी · AI संगीत

प्रस्तुति एक · पुरुष स्वर

4:50

प्रस्तुति एक · स्त्री स्वर

4:22

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