प्रस्तुति एक · पुरुष स्वर
4:18ऑडियो अभी नहीं चलाया जा सकता, कृपया कुछ देर बाद फिर कोशिश करें।

प्राचीन चीनी शैली का भावपूर्ण संगीत · AI संगीत सृजन
कू वूजी · AI संगीत · 1 बार पढ़ा गया
सू शि की 《水调歌头·明月几时有》 से भाव लिया गया है। 明月几时有,把酒问青天;不知天上宫阙,今夕是何年。我欲乘风归去,又恐琼楼玉宇,高处不胜寒;起舞弄清影,何似在人间。转朱阁,低绮户,照无眠;人有悲欢离合,月有阴晴圆缺,此事古难全。但愿人长久,千里共婵娟。 उजला चाँद कब से है—प्याला उठाकर नीले आकाश से पूछते हैं; स्वर्ग के महलों में आज कौन-सा वर्ष है, यह नहीं जानते। हवा पर सवार होकर वहाँ लौटना चाहते हैं, पर ऊँचे रत्नजटित महलों की असह्य ठंड से डरते हैं; अपनी साफ़ परछाईं संग नाचते हुए सोचते हैं कि धरती पर रहने जैसा सुख कहाँ। चाँद लाल मंडप के चारों ओर घूमता, नक्काशीदार खिड़कियों तक झुकता और जागते लोगों पर चमकता है। मनुष्य के जीवन में सुख-दुख और मिलन-विछोह हैं, चाँद भी कभी बादलों में छिपता, कभी साफ़ निकलता, घटता और पूरा होता है; प्राचीन काल से सब कुछ पूर्ण होना कठिन रहा है। बस प्रियजन दीर्घायु हों और हज़ारों ली दूर रहकर भी इस सुंदर चाँदनी को साझा करें। बिंगचेन वर्ष के मध्य-शरद पर्व पर भोर तक उल्लास से पीते हुए, गहरे नशे में ज़ियौ को याद करने की उदार दृष्टि और गहरा स्नेह। स्त्री और पुरुष स्वर एक ही गीत-पाठ गाते हैं।
明月几时有,把酒问青天 — उजला चाँद कब से है, प्याला उठाकर नीले आकाश से पूछता हूँ
不知天上宫阙,今夕是何年 — न जाने आकाश के महलों में, आज की रात कौन-सा वर्ष है
नीचे गायन संस्करण चुनें, और इस कविता को पूरा पढ़ने में धुन को अपना साथी बनाएँ।
एक ही काव्यभाव, अलग-अलग गूँज
चुनने के लिए 2 गीत
प्लेलिस्ट में जोड़ें और दूसरे पृष्ठ देखते हुए भी सुनते रहें। सूची के सभी गीत क्रम से बजने के बाद प्लेबैक रुक जाएगा।
शब्दों में गीत बसे हैं
[प्रस्तावना]
[अंतरा 1]
मध्य-शरद की मदिरा भोर होने तक पी
नशे में इंसान, कुछ भी पूछने की हिम्मत कर लेता है
ओ उजले चाँद तुम किस वर्ष जन्मे थे
कैसे सिर उठाते ही,तुम इतने पूरे गोल दिखते हो
तारे सब दूर पीछे हट गए
पूरा रात का आकाश, इस चाँदी की थाली को सौंप देते हैं
[मुखड़े से पहले]
पूछकर भी कोई जवाब नहीं मिलता
चाँद ने अपनी निर्मल रोशनी, मेरे एक कंधे पर बिखेर दी
[मुखड़ा]
明月几时有,把酒问青天 — उजला चाँद कब से है, प्याला उठाकर नीले आकाश से पूछता हूँ
不知天上宫阙,今夕是何年 — न जाने आकाश के महलों में, आज की रात कौन-सा वर्ष है
起舞弄清影,何似在人间 — नाचकर अपनी निर्मल छाया से खेलूँ, पर यह धरती पर रहने के सुख जैसा कहाँ
但愿人长久,千里共婵娟 — बस अपने दीर्घायु रहें, हज़ार ली दूर होकर भी इसी सुंदर चाँद को निहारें
ऊँचाइयों की ठंड असह्य है, मनुष्यों की दुनिया में चूल्हों का धुआँ है
दुख-सुख, मिलन-बिछोह, प्राचीन काल से सब मनचाहा कहाँ होता है
[अंतरा 2]
मन है हवा पर सवार होकर लौट जाऊँ और देखूँ
देखूँ रत्नों के महल कितने सुंदर बने हैं
फिर सुना कि ऊँचाइयों पर बेहद ठंड है
इतनी ठंड कि अमर देवों को भी, कपड़े लपेटने पड़ें
छोड़ो, यहीं ठहर जाता हूँ
दुनिया के दीयों में, एक-एक में गर्माहट है
[मुखड़े से पहले]
चाँदनी लाल अटारी का मोड़ पार करती है
सजी खिड़की से नीचे उतरकर, मेरी अनिद्र रात पर चमकती है
[मुखड़ा]
明月几时有,把酒问青天 — उजला चाँद कब से है, प्याला उठाकर नीले आकाश से पूछता हूँ
不知天上宫阙,今夕是何年 — न जाने आकाश के महलों में, आज की रात कौन-सा वर्ष है
起舞弄清影,何似在人间 — नाचकर अपनी निर्मल छाया से खेलूँ, पर यह धरती पर रहने के सुख जैसा कहाँ
但愿人长久,千里共婵娟 — बस अपने दीर्घायु रहें, हज़ार ली दूर होकर भी इसी सुंदर चाँद को निहारें
ऊँचाइयों की ठंड असह्य है, मनुष्यों की दुनिया में चूल्हों का धुआँ है
दुख-सुख, मिलन-बिछोह, प्राचीन काल से सब मनचाहा कहाँ होता है
[वाद्य-संगीत]
[अंतरा 3]
चाँद को तो कोई बैर नहीं होना चाहिए
क्यों, बिछड़ने के समय ही इतने पूर्ण गोल होते हो
मुझे अपने छोटे भाई से मिले सात साल हो गए
हज़ार ली के दर्रों-पहाड़ों के पार, एक ही चाँद निहारते हैं
वह खिड़की जहाँ शुरुआती वर्षों में साथ पढ़ते थे
अब हम अलग-अलग, अपनी युवा सूरत पर सफ़ेदी लिए हैं
[सेतु]
人有悲欢离合,月有阴晴圆缺(मनुष्यों के हिस्से दुख-सुख और मिलन-बिछोह आते हैं,चाँद कभी ढकता कभी चमकता है,कभी पूरा कभी अधूरा होता है)
यह बात, प्राचीन काल से ही पूरी होना कठिन रही है
साथ होते समय इसका एहसास नहीं होता
बिछड़ने के बाद, मिलन की याद सताती है
चाँद का पूरा होना चाँद की बात है
लोग दीर्घायु रहें, यही तो लोगों की कामना है
आज रात मैं प्याले की मदिरा
यह प्याला खाली करें, सब अपनी सलामती रखें
[अंतरा 4]
हर बात में पूर्णता की लालसा मत करो
अधूरापन ही उसका ज़्यादातर हिस्सा है
बस सब लोग कुशल रहें
कितनी भी दूरी हो,आसमान तो हमारा साझा है
जब फिर मिलने का वह दिन आएगा
इस चाँद को, तुम्हारे प्याले में उँडेल दूँगा
[अंतिम मुखड़ा]
明月几时有,把酒问青天 — उजला चाँद कब से है, प्याला उठाकर नीले आकाश से पूछता हूँ
不知天上宫阙,今夕是何年 — न जाने आकाश के महलों में, आज की रात कौन-सा वर्ष है
起舞弄清影,何似在人间 — नाचकर अपनी निर्मल छाया से खेलूँ, पर यह धरती पर रहने के सुख जैसा कहाँ
但愿人长久,千里共婵娟 — बस अपने दीर्घायु रहें, हज़ार ली दूर होकर भी इसी सुंदर चाँद को निहारें
ऊँचाइयों की ठंड असह्य है, मनुष्यों की दुनिया में चूल्हों का धुआँ है
दुख-सुख, मिलन-बिछोह, प्राचीन काल से सब मनचाहा कहाँ होता है
[समापन]
अब भोर होने वाली है
但愿人长久,千里共婵娟 — बस अपने दीर्घायु रहें, हज़ार ली दूर होकर भी इसी सुंदर चाँद को निहारें
शास्त्रीय काव्य का भावलोक और मौलिक गीत-बोल · AI संगीत सृजन
नीचे गीत के बोलों का अनुवाद है; रिकॉर्डिंग में मूल गायन ही है, ऑडियो दोबारा तैयार नहीं किया गया है।

कू वूजी · AI संगीत
ऑडियो अभी नहीं चलाया जा सकता, कृपया कुछ देर बाद फिर कोशिश करें।
ऑडियो अभी नहीं चलाया जा सकता, कृपया कुछ देर बाद फिर कोशिश करें।
टिप्पणी अनुभाग
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं…
कुछ कहना चाहते हैं?टिप्पणी में भाग लेने के लिए लॉग इन करें →