हाओशी जिन·पर्दे के बाहर अंतिम पहर की हवा
छिंग राजवंश・नालान शिंगदे
छिंग राजवंश・नालान शिंगदे
पर्दे के बाहर अंतिम पहर की हवा, भोर की ठंड सहने का समय है। शरद की रज़ाई का बस आधा हिस्सा बाँहों में है, पर्दे से छनते ढलते चाँद को भी समेटे हुए।
निर्मल आँसू भला बर्फ कैसे न बनें, जब सबसे मधुर घड़ी में ही सहज बिछोह कर लिया। सोचता हूँ, विदाई की इस पीड़ा को भोर की ठंड आने पर फिर कहूँगा।
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पर्दे के बाहर अंतिम पहर की हवा बह रही है, भोर की ठंड सहने का यही समय है। शरद की रज़ाई का केवल आधा हिस्सा बाँहों में समेट सकती हूँ, पर्दे से छनती ढलते चाँद की ठंडी रोशनी भी गोद में पड़ती है। निर्मल आँसू भला बर्फ़ जैसे क्यों न जम जाएँ?मिलन अभी सुखद हुआ ही था कि फिर सहज ही बिछुड़ गए। मैं इन वियोग-व्यथाओं को सँजोकर, भोर होने पर, सुबह की इस ठंड से विस्तार में कहना चाहती हूँ।
五更:रात का अंतिम पहर, जब भोर होने वाली हो। 消受:सहना, ग्रहण करना;यहाँ कठिनाई से सहने का भाव है। 衾(qīn):रज़ाई।
争教:कैसे होने दूँ, कैसे अनुमति दूँ।好处:सुंदर समय या गहरे स्नेह का क्षण।拟:इरादा करना।重说:फिर से कहना।
“秋衾一半”(शरद की रजाई का आधा हिस्सा)अकेले सोने का संकेत देता है; केवल इस पंक्ति के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि कविता विशेष रूप से किसी के शोक में लिखी गई थी।
रचना परिचय:नालान शिंगते ने विरह को पाँचवें पहर,भोर से पहले की ठंडी घड़ी में रखा है।कविता में संबंधित व्यक्ति का नाम नहीं दिया गया,इसे बिछोह और अकेले सोने के दुख के रूप में समझना उचित है,रचना की संकोची अभिव्यक्ति बनाए रखते हुए अपनी ओर से कोई निश्चित जीवनकथा नहीं जोड़नी चाहिए。
हवा पर्दे के बाहर से आती है, चाँदनी पर्दे से भीतर उतरती है, पर आधी शय्या पर पड़ी शरद की रजाई गरमाहट नहीं देती। ये सभी छोटे विवरण “寒”—ठंड—के इर्दगिर्द हैं और साथी के अभाव को मूर्त करते हैं।
“泪成冰”—‘आँसू बर्फ हो गए’—शरीर की ठंड और भावना की ठंड जोड़ता है। अंत में ‘भोर की ठंड’ से अपना दुख कहने की इच्छा बताती है कि बात करने वाला कोई नहीं; मानवीकरण यहाँ चहल-पहल नहीं लाता, बल्कि एकाकीपन को और गहरा करता है।
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श्यु लिंग की कपड़े रफू करने वाली सुई एक तलाक-पत्र में जा धँसी, जिस पर पिछली शरद की तारीख थी। उस समय वह इतनी बीमार थी कि उठ नहीं पाती थी और उसका पति हर दिन उसे पीठ पर उठाकर वैद्य के पास ले जाता था; अब उसे अगली सुबह सरकारी कर्मचारियों के साथ उत्तर जाना था, और उसने बस इतना कहा था कि व्यापारिक मार्ग के माल-कर का मिलान करने जा रहा है। दीपक के नीचे कागज फैला था। उसने तैयार रखे मोटे मोजे और खाँसी की दवा एक-एक कर गठरी से निकाली और पूछा कि इस पूरे वर्ष वह फिर भी घर में भोजन क्यों करता रहा।
पढ़ना शुरू करेंAI की सहायता से रचित · पात्र और कथानक काल्पनिक हैं