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《बादलों के बीच हल्की नाव》 का आवरण

प्राचीन चीनी शैली का भावपूर्ण संगीत · AI संगीत सृजन

बादलों के बीच हल्की नाव

कू वूजी · AI संगीत · 7 बार पढ़ा गया

ली बाई की 《早发白帝城》(भोर में बाइदी नगर से प्रस्थान)से प्रेरित।朝辞白帝彩云间,千里江陵一日还;两岸猿声啼不尽,轻舟已过万重山。(भोर में रंगीन बादलों के बीच बाइदी से विदा ली,हज़ार ली दूर च्यांगलिंग एक ही दिन में लौट आया;दोनों तटों पर वानरों की पुकार थमती नहीं,हल्की नाव असंख्य पर्वत पार कर चुकी है।)क्षमादान मिलने पर पूर्व की ओर लौटते हुए,भोर में बाइदी नगर से विदा ली,रंगीन बादलों के बीच हल्की नाव में धारा के साथ तेज़ी से चले,रास्ते भर वानरों की पुकार विदाई देती रही,हज़ार ली दूर च्यांगलिंग एक ही दिन में पहुँच गए।स्त्री और पुरुष स्वर में एक ही गीत-पाठ का गायन।

गीत की वह पंक्ति

朝辞白帝彩云间 — भोर में रंगीन बादलों के बीच बाइदी नगर से विदा ली

千里江陵一日还 — हज़ार ली दूर जियांगलिंग एक दिन में लौट पहुँचना

प्रेरणा देने वाली मूल कविता ली बाई ·《भोर में बाइदी नगर से प्रस्थान》
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शब्दों में गीत बसे हैं

गीत के बोल

[प्रस्तावना]

[अंतरा 1]

सुबह का बाइदी नगर

रंगीले बादलों ने लाल कर दिया, आधा आसमान

सुबह मैं इस शहर से विदा लेता हूँ

भारी बोझ उतर गया, तन अब अबाबील-सा हल्का है

नदी किनारे नाव इंतज़ार कर रही है

नाव का अगला सिरा चीरता है, लहरों की परतें

[मुखड़े से पहले]

धारा के साथ चलती नाव सबसे तेज़ होती है

हज़ार ली दूर का जियांगलिंग, अब आँखों के सामने है

[मुखड़ा]

朝辞白帝彩云间 — भोर में रंगीन बादलों के बीच बाइदी नगर से विदा ली

千里江陵一日还 — हज़ार ली दूर जियांगलिंग एक दिन में लौट पहुँचना

दोनों किनारों के वानरों की पुकार, राह भर साथ देती है

轻舟已过万重山 — हल्की नाव अनगिनत पहाड़ों को पार कर चुकी है

नदी की हवा भर देती है,मेरे वस्त्र

इतनी तेज़ मानो,चिंताओं को बहुत पीछे झटक दे

[अंतरा 2]

नाव छ्यूतांग घाटी के मुहाने से गुज़रती है

दोनों किनारों के वानर, बार-बार पुकारते हैं

वे लगातार पुकारते रहते हैं

मानो मेरी ओर से, खुशखबरी हर ओर पुकार रहे हों

आवाज़ नाव का पीछा करती दौड़ती है

पकड़ नहीं पाती, इस पत्ते-सी छोटी नाव को

[मुखड़े से पहले]

हल्की नाव उड़ते पंछियों से भी तेज़ है

पहाड़ों की अनगिनत परतें, झलक झलक कर पीछे छूटती हैं

[मुखड़ा]

朝辞白帝彩云间 — भोर में रंगीन बादलों के बीच बाइदी नगर से विदा ली

千里江陵一日还 — हज़ार ली दूर जियांगलिंग एक दिन में लौट पहुँचना

दोनों किनारों के वानरों की पुकार, राह भर साथ देती है

轻舟已过万重山 — हल्की नाव अनगिनत पहाड़ों को पार कर चुकी है

नदी की हवा भर देती है,मेरे वस्त्र

इतनी तेज़ मानो,चिंताओं को बहुत पीछे झटक दे

[वाद्य-संगीत]

[अंतरा 3]

两岸猿声啼不尽 — दोनों तटों पर वानरों की पुकार थमती नहीं

वानरों की पुकार गिरकर, नदी की सतह पर घूमती है

मुड़कर बाइदी नगर को देखता हूँ

सिमटकर रह गया है, स्याही का एक बिंदु

सामने ही जियांगलिंग है

चूल्हों का धुआँ उठने वाली,वह साँझ

[सेतु]

फिर से आज़ाद होना किसे कहते हैं

यही पल है, नदी पर तना पाल

कल तक निर्वासित था

आज वसंत की हवा, मेरे चेहरे पर मुस्कान लाती है

राजदरबार का क्षमादान आ गया

सारे रास्ते मुझे,जियांगनान वापस पहुँचा गई

आगे की राह अभी लंबी है

सब साथ लिए हैं आज का,यह स्नेह

[अंतरा 4]

जियांगलिंग की बत्तियाँ जगमगा उठीं

नाव पहुँच गई, जियांगलिंग की खाड़ी में

मैं कदम बढ़ाकर किनारे उतरता हूँ

पीछे छूटी तीन घाटियाँ, शांत होकर चित्रपट बन गईं

कल फिर सफ़र पर निकलना है

आज रात सोना है, गहरी मीठी नींद में

[अंतिम मुखड़ा]

朝辞白帝彩云间 — भोर में रंगीन बादलों के बीच बाइदी नगर से विदा ली

千里江陵一日还 — हज़ार ली दूर जियांगलिंग एक दिन में लौट पहुँचना

दोनों किनारों के वानरों की पुकार, राह भर साथ देती है

轻舟已过万重山 — हल्की नाव अनगिनत पहाड़ों को पार कर चुकी है

नदी की हवा भर देती है,मेरे वस्त्र

इतनी तेज़ मानो,चिंताओं को बहुत पीछे झटक दे

[समापन]

轻舟已过万重山 — हल्की नाव अनगिनत पहाड़ों को पार कर चुकी है

आने वाले दिनों में,पर्वत ऊँचे और जल विस्तृत हैं

शास्त्रीय काव्य का भावलोक और मौलिक गीत-बोल · AI संगीत सृजन

नीचे गीत के बोलों का अनुवाद है; रिकॉर्डिंग में मूल गायन ही है, ऑडियो दोबारा तैयार नहीं किया गया है।

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बादलों के बीच हल्की नाव

कू वूजी · AI संगीत

प्रस्तुति एक · पुरुष स्वर

4:38

प्रस्तुति एक · स्त्री स्वर

4:21

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