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《दूर देश के अतिथि को किससे ढाढ़स दूँ》 का आवरण

प्राचीन चीनी शैली का भावपूर्ण संगीत · AI संगीत सृजन

दूर देश के अतिथि को किससे ढाढ़स दूँ

कू वूजी · AI संगीत · 4 बार पढ़ा गया

लिउ ज़ोंगयुआन की 《早梅》 से प्रेरित। 早梅发高树,迥映楚天碧;朔吹飘夜香,繁霜滋晓白。欲为万里赠,杳杳山水隔;寒英坐销落,何用慰远客。 अर्थ: ऊँचे वृक्ष पर समय से पहले मेहुआ खिला है, दूर तक छू प्रदेश के नीले आकाश में दमकता है; उत्तरी हवा रात की सुगंध उड़ाती है, घना पाला भोर की सफ़ेदी बढ़ाता है। इसे दस हज़ार ली दूर उपहार भेजना चाहूँ, पर अंतहीन पर्वत और नदियाँ बीच में हैं; शीत के फूल बैठे-बैठे मुरझाकर झर जाते हैं, दूर भटके यात्री को किससे सांत्वना मिले। अगेती मेहुआ निर्मल और उदात्त है, दूर बसे पुराने मित्र के लिए उसे तोड़कर भेजना चाहते हैं, पर पहाड़ और नदियाँ बहुत दूर तक अलग करते हैं; ठंड के फूल आँखों के सामने झरते हैं, भटकता व्यक्ति स्वयं को किससे सांत्वना दे। पुरुष और महिला स्वर में समान बोल गाए गए हैं।

गीत की वह पंक्ति

早梅发高树 — ऊँचे पेड़ पर आलूबुखारे के शुरुआती फूल खिले, छू प्रदेश के आसमान की नीली आभा को प्रतिबिंबित करते हुए

मन है एक डाल तोड़कर पहाड़ों और नदियों के पार भेजूँ

प्रेरणा देने वाली मूल कविता लिउ ज़ोंगयुआन ·《समय से पहले खिला मेइ》
पूरे गीत के बोल पढ़ें ↓

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शब्दों में गीत बसे हैं

गीत के बोल

[प्रस्तावना]

[अंतरा 1]

मेहुआ का एक पेड़ जल्दी खिल उठा

सबसे ऊँची ऊँची डाल पर खिला

छू प्रदेश का आकाश गहरा नीला है

इतना नीला मानो अभी धोया गया हो

वह उसी नीलेपन में प्रतिबिंबित है

बिलकुल साफ़, मैल का ज़रा भी अंश नहीं

[मुखड़े से पहले]

उत्तरी हवा रात भर चली,फूलों की खुशबू चारों ओर भटकती रही

घने पाले ने उलटे सफ़ेदी को, और अधिक पोषित किया

[मुखड़ा]

早梅发高树 — ऊँचे पेड़ पर आलूबुखारे के शुरुआती फूल खिले, छू प्रदेश के आसमान की नीली आभा को प्रतिबिंबित करते हुए

मन है एक डाल तोड़कर पहाड़ों और नदियों के पार भेजूँ

दूर-दूर तक पहाड़ और नदियाँ बीच में हैं

तुम्हारे हाथों तक भेज न सकूँ तो उससे पहले ही मुरझा जाएँ

किससे दिलासा दूँ दूर के पथिक को

दूर भटकते जन की ठंडी रातों के अकेलेपन को ढाढ़स दे

[अंतरा 2]

इतने सुंदर फूल हैं ये

फिर भी वे ऐसी पहाड़ी ढलान पर खिलते हैं जहाँ से कोई नहीं गुज़रता

मुझे दूर बसे तुम्हारी याद आई

मन होता है एक टहनी तोड़कर उसमें अपने मन की बात रख दूँ

भले हज़ार पहाड़ बीच में हों

फिर भी तुम्हारी दिशा में कठिन राह तय करनी है

[मुखड़े से पहले]

मगर पहाड़ और नदियाँ धुँधली दूरियों में हैं

ख़बरें विशाल नदी की लहरों में डूब गईं

[मुखड़ा]

早梅发高树 — ऊँचे पेड़ पर आलूबुखारे के शुरुआती फूल खिले, छू प्रदेश के आसमान की नीली आभा को प्रतिबिंबित करते हुए

मन है एक डाल तोड़कर पहाड़ों और नदियों के पार भेजूँ

दूर-दूर तक पहाड़ और नदियाँ बीच में हैं

तुम्हारे हाथों तक भेज न सकूँ तो उससे पहले ही मुरझा जाएँ

किससे दिलासा दूँ दूर के पथिक को

दूर भटकते जन की ठंडी रातों के अकेलेपन को ढाढ़स दे

[वाद्य-संगीत]

[अंतरा 3]

जब फूल अपने पूरे निखार पर होते हैं

तभी से, एक-एक पंखुड़ी झरने भी लगती है

मैं डालियों के फूल गिनता हूँ

हर दिन कम होते फूल मन को और व्याकुल करते हैं

वह एक डाल जिसे भेजना चाहता हूँ

हिचकिचाहट में दिन ब दिन क्षीण होती है

[सेतु]

फूल इंसान की प्रतीक्षा नहीं कर सकते

मनुष्य भी समय के रथ को रोक नहीं सकता

कभी बर्फबारी कभी पाला

तब डालों की सारी निर्मल सफ़ेदी खुले विस्तार को लौटा देती हैं

तब अगर फिर कुछ भेजने का मन हुआ

डाल पर अब,भेजने लायक कोई फूल नहीं बचा

इसलिए अभी के अवसर को थामना है

जब तक खुशबू गर्म है, जब तक हवा पूरी तरह जम नहीं गई

[अंतरा 4]

भले फूल तुम्हारे पास न पहुँच पाएँ

राह में झर भी जाएँ तो भी सार्थक है

फूल की ओर से उसकी खुशबू बाकी राह पूरी करेगी

बची हुई उस ऊबड़-खाबड़ राह को

अगर तुम्हें हवा में उसकी महक आए

तो मान लेना,मैं तुम्हारे पास आ चुका हूँ

[अंतिम मुखड़ा]

早梅发高树 — ऊँचे पेड़ पर आलूबुखारे के शुरुआती फूल खिले, छू प्रदेश के आसमान की नीली आभा को प्रतिबिंबित करते हुए

मन है एक डाल तोड़कर पहाड़ों और नदियों के पार भेजूँ

दूर-दूर तक पहाड़ और नदियाँ बीच में हैं

तुम्हारे हाथों तक भेज न सकूँ तो उससे पहले ही मुरझा जाएँ

किससे दिलासा दूँ दूर के पथिक को

दूर भटकते जन की ठंडी रातों के अकेलेपन को ढाढ़स दे

[समापन]

जल्दी खिले मेई के फूल अब भी ऊँचे पेड़ पर हैं

अब भी छू प्रदेश के निर्मल आकाश को प्रतिबिंबित करते हैं

शास्त्रीय काव्य का भावलोक और मौलिक गीत-बोल · AI संगीत सृजन

नीचे गीत के बोलों का अनुवाद है; रिकॉर्डिंग में मूल गायन ही है, ऑडियो दोबारा तैयार नहीं किया गया है।

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प्रस्तुति एक · पुरुष स्वर

4:40

प्रस्तुति एक · स्त्री स्वर

4:37

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