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《हज़ारों मील पार घर की रोशनी की ओर》 का आवरण

प्राचीन चीनी शैली का भावपूर्ण संगीत · AI संगीत सृजन

हज़ारों मील पार घर की रोशनी की ओर

कू वूजी · AI संगीत · 4 बार पढ़ा गया

ली बाई की 《经乱离后天恩流夜郎忆旧游书怀赠江夏韦太守良宰》 (अशांति और बिछोह के बाद सम्राट की आज्ञा से येलांग निर्वासन के दौरान पुरानी यात्राओं को याद करते हुए अपने भाव जियांगश्या के प्रशासक वेइ लियांगज़ाइ को भेंट) का विस्तार। इसमें युवावस्था की आकांक्षा, युद्धजनित बिछोह और निर्वासन, पुराने मित्रों का स्नेह तथा क्षमादान मिलने के बाद भी जनसाधारण की चिंता करते रहने की कामना व्यक्त है। पुरुष और महिला स्वर के गायन अलग-अलग उपलब्ध हैं।

गीत की वह पंक्ति

नदी भर चाँदनी उधार लूँ,हज़ारों ली दूर अपने घर को रोशन करूँ

कितने बिछड़े हुए लोग, अब भी किसी खिड़की की राह देखते हैं

पूरे गीत के बोल पढ़ें ↓

नीचे गायन संस्करण चुनें, और इस कविता को पूरा पढ़ने में धुन को अपना साथी बनाएँ।

शब्दों में गीत बसे हैं

गीत के बोल

[प्रस्तावना]

[अंतरा 1]

युवावस्था में कभी श्वेत जेड की स्वर्गीय नगरी निहारी थी

बारह अटारियों के सामने चाँदनी पाले जैसी है

तलवार थामे द्वार से निकला, जन्मभूमि से विदा ली

मन की बातें राजदरबार को भेजना चाहता हूँ

आधे जीवन की आँधियाँ और बारिश इंसान को बूढ़ा कर देती हैं

काग़ज़ भर की खोखली शोहरत दूर की नदी में गिर गई

[मुखड़े से पहले]

पुराने साथ के दिन मुड़कर देखूँ तो साथी दूर जा चुके हैं

केवल पुराना मित्र मेरा दर्द जानता है

[मुखड़ा]

नदी भर चाँदनी उधार लूँ,हज़ारों ली दूर अपने घर को रोशन करूँ

कितने बिछड़े हुए लोग, अब भी किसी खिड़की की राह देखते हैं

मैं खोखली शोहरत छोड़ देता हूँ, पुराने वचन सँजो लेता हूँ

राह भर आँधी और बर्फ़ से गुज़रा, रक्त का जोश कभी ठंडा नहीं पड़ा

काश हज़ारों घरों के दीप, घर लौटने की राह रोशन करें

कामना है यह देश सुरक्षित रहे, लोगों को दर-दर भटकना न पड़े

[अंतरा 2]

बख़्तरबंद घोड़ों की उड़ाई धूल धूप ढक लेती है

जन्मभूमि के पेड़-पौधे सब पीड़ा से भरे हैं

सफ़ेद हड्डियाँ चुपचाप जंगली घास में दबी हैं

आम जन का क्या अपराध कि विपत्ति सहें

खोखली कीर्ति ने भटकाकर मुझे विशाल युद्धनौका पर चढ़ा दिया

पश्चिम में येलांग की ओर जाने वाली राह लंबी है

[मुखड़े से पहले]

पुराने मित्र के एक वचन के आगे सोना हल्का है

मेरे तन पर जमी सारी पाला-ठंड दूर कर दो

[मुखड़ा]

नदी भर चाँदनी उधार लूँ,हज़ारों ली दूर अपने घर को रोशन करूँ

कितने बिछड़े हुए लोग, अब भी किसी खिड़की की राह देखते हैं

मैं खोखली शोहरत छोड़ देता हूँ, पुराने वचन सँजो लेता हूँ

राह भर आँधी और बर्फ़ से गुज़रा, रक्त का जोश कभी ठंडा नहीं पड़ा

काश हज़ारों घरों के दीप, घर लौटने की राह रोशन करें

कामना है यह देश सुरक्षित रहे, लोगों को दर-दर भटकना न पड़े

[वाद्य-संगीत]

[अंतरा 3]

नदी एमेई की बर्फ का ठंडा रंग साथ लिए बहती है

हज़ार पाल चाँद को ढोते शुनयांग से गुज़रते हैं

तुम नदी किनारे की अटारी में पुरानी मदिरा खोलते हो

हमराज़ संग एक प्याला सर्द खिड़की को गर्मा देता है

[सेतु]

निर्मल जल से कमल सहज ही खिल उठता है

बिना अलंकरण के ही सुगंध प्रकट होती है

तुम्हारा कवि-हृदय उजले चाँद सा है

वचन सोने से भी कीमती है, मैं भूलता नहीं

忽闻赦书随雁到 — अचानक सुना कि कलहंसों के साथ क्षमादान का फ़रमान आया है

तन पर पाला और हिम लिए वसंत की रोशनी देखता हूँ

लंबी घर-वापसी की राह पर दीपों की रोशनी पास आ गई

आधी रात को भी पुराने रणक्षेत्र की चिंता रहती है

[अंतरा 4]

क्षमादान के फ़रमान ने तन पर जमी पाले की परत उतार दी

पर दो जगह बिछड़े लोगों का दुख मिटाना कठिन है

कब युद्ध की सारी आग बुझेगी

हज़ारों घरों के दीप सुख और कुशलता को रोशन करें

[अंतिम मुखड़ा]

नदी भर चाँदनी उधार लूँ,हज़ारों ली दूर अपने घर को रोशन करूँ

कितने बिछड़े हुए लोग, अब भी किसी खिड़की की राह देखते हैं

मैं खोखली शोहरत छोड़ देता हूँ, पुराने वचन सँजो लेता हूँ

राह भर आँधी और बर्फ़ से गुज़रा, रक्त का जोश कभी ठंडा नहीं पड़ा

काश हज़ारों घरों के दीप, घर लौटने की राह रोशन करें

कामना है यह देश सुरक्षित रहे, लोगों को दर-दर भटकना न पड़े

[समापन]

मैं यांग्त्से की ओर प्याला उठाकर देखता हूँ

काश उजला चाँद चारों दिशाओं में प्रकाश फैलाए

शास्त्रीय काव्य का भावलोक और मौलिक गीत-बोल · AI संगीत सृजन

नीचे गीत के बोलों का अनुवाद है; रिकॉर्डिंग में मूल गायन ही है, ऑडियो दोबारा तैयार नहीं किया गया है।

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प्रस्तुति एक · पुरुष स्वर

4:50

प्रस्तुति एक · स्त्री स्वर

4:45

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