दो तटों के चाँद-दीप
झांग मिंग ने छोटे भाई का भेजा चाँद-दीप पैरों से कुचल दिया, मगर भाई के परिवार के लिए तैयार नई रज़ाइयाँ अब भी कमरे में रखी थीं। बीस वर्षों से नदी के दोनों ओर रहते हुए उनकी मुलाक़ात नहीं हुई थी। इस बार बड़ी मुश्किल से घाट तीन दिन के लिए खुला, मगर पत्र में फिर वही लिखा था कि वह लौट नहीं सकता। टूटे दीप के नीचे छह छेदों वाली ताँबे की पट्टी अब भी सही-सलामत थी; मध्य-शरद की रात नदी पर अचानक धुंध छा गई और बीच धारा से खाली ड्रम की आवाज़ आई—तीन चोटें, फिर एक विराम।
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