प्रस्तुति एक · पुरुष स्वर
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प्राचीन चीनी शैली का भावपूर्ण संगीत · AI संगीत सृजन
कू वूजी · AI संगीत · 2 बार पढ़ा गया
फ़ेंग यान्सी की 《菩萨蛮·回廊远砌生秋草》 से भाव लिए गए हैं। 回廊远砌生秋草,梦魂千里青门道;鹦鹉怨长更,碧笼金锁横。罗帏中夜起,霜月清如水;玉露不成圆,宝筝悲断弦。 अर्थ: लंबे गलियारे और दूर की सीढ़ियों पर पतझड़ की घास उग आई है, स्वप्न में आत्मा हज़ारों ली दूर छिंगमेन के पथ पर लौटती है; तोता लंबी रात पर विलाप करता है, हरे पिंजरे पर सुनहरा ताला लगा है। रेशमी परदों के भीतर आधी रात को उठती हूँ, पाले भरी चाँदनी पानी जैसी निर्मल है; मोती जैसी ओस गोल नहीं बन पाती, अनमोल झेंग की तार दुख से टूट गई है। भीतरी कक्ष में पतझड़ की रात: स्वप्न की आत्मा हर रात विदाई वाले छिंगमेन के पथ पर लौटती है, सुनहरे पिंजरे में बंद तोता लंबी रात पर विलाप करता है, ओस की बूँदें गोल नहीं हो पातीं, झेंग की तार टूट गई है——अधूरी रह जाने वाली केवल ओस की बूँदें कहाँ हैं। पुरुष और महिला स्वर में समान बोल गाए गए हैं।
回廊远砌生秋草(घुमावदार गलियारे और दूर की सीढ़ियों पर पतझड़ की घास उग आई है)
सपनों की आत्मा हज़ारों ली पार कर,छिंगमेन की राह पर लौट दौड़ी
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शब्दों में गीत बसे हैं
[प्रस्तावना]
[अंतरा 1]
पतझड़ की हवा आँगन में चली आती है
गलियारे के उस छोर पर, घास मनुष्य से भी ऊँची उग आई है
सपनों को क़ैद नहीं किया जा सकता
बँध नहीं पाते, तो सपने छिंगमेन की राह पर दौड़ पड़ते हैं
जागने पर तकिए के पास अब भी वही
वही रात, वही पहर गिनती जलघड़ी की टंकार
[मुखड़े से पहले]
तोते सब सो गए हैं
सोने का ताला चाँद तले,सफ़ेद उजास में चमकता है
[मुखड़ा]
回廊远砌生秋草(घुमावदार गलियारे और दूर की सीढ़ियों पर पतझड़ की घास उग आई है)
सपनों की आत्मा हज़ारों ली पार कर,छिंगमेन की राह पर लौट दौड़ी
तोता लंबी रात में पुकारता है,उसकी पुकार मन को व्यथित करती है
हरा पिंजरा सुनहरा ताला,सारी रात का सूनापन बीच में पसरा है
ओस की बूँदें सारी रात लुढ़कती रहीं,फिर भी मिलन पूरा न हुआ
अनमोल चंग के तार टूट गए, दुखभरी धुन शहतीरों के सिरों पर मँडराती है
[अंतरा 2]
दिन में उसे बोलना सिखाता हूँ
उसने विरह की हूबहू नकल करना सीख लिया
रात में वह सपने देखने लगता है
सपने में भी पिंजरा है, ताले और बेड़ियाँ हैं
वह शिकायत करता है कि रात के लंबे पहर काटना कठिन है
महीन रेशमी परदे के पीछे से,उसके साथ भोर तक पहर गिनता हूँ
[मुखड़े से पहले]
आधी रात रेशमी शय्यापर्दा उठाया
पाले का चाँद आकाश में है,इतना निर्मल मानो पानी तैर रहा हो
[मुखड़ा]
回廊远砌生秋草(घुमावदार गलियारे और दूर की सीढ़ियों पर पतझड़ की घास उग आई है)
सपनों की आत्मा हज़ारों ली पार कर,छिंगमेन की राह पर लौट दौड़ी
तोता लंबी रात में पुकारता है,उसकी पुकार मन को व्यथित करती है
हरा पिंजरा सुनहरा ताला,सारी रात का सूनापन बीच में पसरा है
ओस की बूँदें सारी रात लुढ़कती रहीं,फिर भी मिलन पूरा न हुआ
अनमोल चंग के तार टूट गए, दुखभरी धुन शहतीरों के सिरों पर मँडराती है
[वाद्य-संगीत]
[अंतरा 3]
मैं हाथ बढ़ाकर ओस समेटता हूँ
एक गोल बूँद थामना चाहा, पर सब बिखर गईं
अब कुछ भी जोड़कर पूरा नहीं बनता
चाँद पूरा है लोग बिखर गए,तारों की लय भी टूट गई
सुंदर झेंग वीणा उठाकर उसके तार छेड़ूँ
करुण सुर बजते ही, छज्जे के नीचे के पक्षी चौंककर उड़ गए
[सेतु]
छिंगमेन की राह बिछोह की राह है
उस बरस वहीं, घोड़ों की टाप धीरे-धीरे खो गई थी
एक विदाई ने हज़ारों ली की दूरी कर दी
सपनों की आत्मा हज़ारों ली पीछा करती है, पर इतराती घोड़े की टापों तक नहीं पहुँचती
तोता पूछता है मुझे क्या हुआ
मैंने कहा कुछ नहीं, पाला भारी है और अभी बहुत सवेरा है
उसे मनुष्यों के जग की समझ नहीं
बस टूटे तार का दुख सीटी में उतारना सीख लिया
[अंतरा 4]
आधी रात कपड़े ओढ़कर उठ बैठता हूँ
पाले का चाँद पानी जैसा है,हड्डियों तक नमी भर देता है
मोती-सी ओस एक और रात गिरती रही
जो पूर्ण नहीं हो पाता, वह केवल ओस की बूँद का आकार ही कहाँ है
तार टूट जाए तो बदली जा सकती है
दिल टूट जाए,तो किससे फिर मज़बूती से जोड़ें
[अंतिम मुखड़ा]
回廊远砌生秋草(घुमावदार गलियारे और दूर की सीढ़ियों पर पतझड़ की घास उग आई है)
सपनों की आत्मा हज़ारों ली पार कर,छिंगमेन की राह पर लौट दौड़ी
तोता लंबी रात में पुकारता है,उसकी पुकार मन को व्यथित करती है
हरा पिंजरा सुनहरा ताला,सारी रात का सूनापन बीच में पसरा है
ओस की बूँदें सारी रात लुढ़कती रहीं,फिर भी मिलन पूरा न हुआ
अनमोल चंग के तार टूट गए, दुखभरी धुन शहतीरों के सिरों पर मँडराती है
[समापन]
जब पौ फटने को होती है
पतझड़ की घास पर पाला, सूरज के आकर बुहारने की राह देखता है
शास्त्रीय काव्य का भावलोक और मौलिक गीत-बोल · AI संगीत सृजन
नीचे गीत के बोलों का अनुवाद है; रिकॉर्डिंग में मूल गायन ही है, ऑडियो दोबारा तैयार नहीं किया गया है।

कू वूजी · AI संगीत
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