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《घने टाँके, देर से वापसी》 का आवरण

प्राचीन चीनी शैली का भावपूर्ण संगीत · AI संगीत सृजन

घने टाँके, देर से वापसी

कू वूजी · AI संगीत · 1 बार पढ़ा गया

मेंग जियाओ की 《游子吟》(परदेसी संतान का गीत) से भाव ग्रहण। 慈母手中线,游子身上衣;临行密密缝,意恐迟迟归。谁言寸草心,报得三春晖。(ममतामयी माँ के हाथ में धागा है, परदेस जाने वाली संतान के तन पर वस्त्र; विदा से पहले घने टाँके लगाती है, डरती है कि लौटने में देर लगेगी। कौन कहता है कि घास के तिनके जैसा हृदय वसंत के तीन महीनों की धूप का ऋण चुका सकता है।) प्रस्थान से पहले दीपक तले कपड़े सिलती माँ: घने-घने टाँके, डर कि बेटा देर से लौटेगा; घास के तिनकों जैसी संतान वसंत जैसी मातृममता का ऋण कभी पूरा नहीं चुका सकती। पुरुष और महिला स्वर में एक ही गीत-बोल गाए गए हैं।

गीत की वह पंक्ति

临行密密缝,意恐迟迟归(विदा से पहले माँ घने टाँके लगाती है,मन में डर है कि लौटने में बहुत देर होगी)

谁言寸草心,报得三春晖 — कौन कहे कि तिनके जितना संतान का मन, वसंत भर की धूप जैसे माँ के स्नेह का ऋण चुका सके

प्रेरणा देने वाली मूल कविता मेंग जियाओ ·《घर से दूर यात्री का गीत》
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शब्दों में गीत बसे हैं

गीत के बोल

[प्रस्तावना]

[अंतरा 1]

慈母手中线,游子身上衣 — ममतामयी माँ के हाथ में धागा, दूर गए बेटे के तन पर वस्त्र

तेल के दीये की बाती बार-बार उकसाई, रात जल जैसी है

कल मुझे दूर सफ़र पर निकलना है

माँ धागों के सिरों को, दाँतों से काटती जाती है

टाँके घने घने हैं

एक टाँके से लगा अगला टाँका, थकान महसूस नहीं होती

[मुखड़े से पहले]

उसने कहा बाहर तेज़ हवा है

एक परत और सी दूँ, तो हवा रुक सकेगी

[मुखड़ा]

临行密密缝,意恐迟迟归(विदा से पहले माँ घने टाँके लगाती है,मन में डर है कि लौटने में बहुत देर होगी)

谁言寸草心,报得三春晖 — कौन कहे कि तिनके जितना संतान का मन, वसंत भर की धूप जैसे माँ के स्नेह का ऋण चुका सके

दीप के नीचे वे हाथ,बिना थके सिलते जाते हैं

हर टाँका, अनमोल भाव से सिला गया है

छोटी-सी घास जैसा यह कृतज्ञ हृदय, हर तरह से तुच्छ ही लगता है

कैसे चुका पाऊँ,वसंत के उजाले का उपकार

[अंतरा 2]

वह नहीं कहती कि बिछड़ना सहन नहीं होता

बस कहती है, जल्दी जाना जल्दी लौटना

पर वह सिलते-सिलते

दीये की बत्ती का फूल गिरा,राख का एक टुकड़ा

मैं सिर झुकाकर सामान समेटता हूँ

अनदेखा करने का अभिनय किया, उसकी आँखों की टूटती अश्रु-चमक को

[मुखड़े से पहले]

भोर होते ही निकलना है

उसने नया वस्त्र, मेरी पीठ पर ओढ़ा दिया

[मुखड़ा]

临行密密缝,意恐迟迟归(विदा से पहले माँ घने टाँके लगाती है,मन में डर है कि लौटने में बहुत देर होगी)

谁言寸草心,报得三春晖 — कौन कहे कि तिनके जितना संतान का मन, वसंत भर की धूप जैसे माँ के स्नेह का ऋण चुका सके

दीप के नीचे वे हाथ,बिना थके सिलते जाते हैं

हर टाँका, अनमोल भाव से सिला गया है

छोटी-सी घास जैसा यह कृतज्ञ हृदय, हर तरह से तुच्छ ही लगता है

कैसे चुका पाऊँ,वसंत के उजाले का उपकार

[वाद्य-संगीत]

[अंतरा 3]

बाहर की दुनिया बहुत बड़ी है

आँधी कितनी भी तेज़ हो, बारिश कितनी भी भारी, कभी पीछे नहीं हटा

कपड़े फटें तो सी लेता हूँ

कपड़े रफ़ू करने का हुनर, माँ ने सिखाया

उन टाँकों पर हाथ फेरते हुए

मानो माँ के हाथ, अब भी सहला रहे हों

[सेतु]

कौन कहता है कि नन्ही घास का मन

जिसका ऋण चुकाए नहीं चुकता, वह वसंत का उपकार है

माँ ही मेरा वसंत है

मुझे धूप से गरमाती है, उजाले से सुंदर बनाती है

जब मैं कुछ बन जाऊँगा

उसे यहाँ ले आऊँगा,हर दिन उसके साथ रहूँगा

नन्ही घास भी पूरी जान लगाकर बढ़ेगी

ढलान भर, नन्हे फूल खिला दे

[अंतरा 4]

इस साल की सर्दियों से पहले

मैं चल पड़ूँगा, घर की ओर उड़ चलूँगा

माँ के सिले कपड़े पहनकर

हवा और पाला कितने भी ठंडे हों,मन में गर्माहट का एहसास है

घर का द्वार खोलते ही निकली वह पुकार

माँ मैं लौट आया,अभी अँधेरा भी नहीं हुआ

[अंतिम मुखड़ा]

临行密密缝,意恐迟迟归(विदा से पहले माँ घने टाँके लगाती है,मन में डर है कि लौटने में बहुत देर होगी)

谁言寸草心,报得三春晖 — कौन कहे कि तिनके जितना संतान का मन, वसंत भर की धूप जैसे माँ के स्नेह का ऋण चुका सके

दीप के नीचे वे हाथ,बिना थके सिलते जाते हैं

हर टाँका, अनमोल भाव से सिला गया है

छोटी-सी घास जैसा यह कृतज्ञ हृदय, हर तरह से तुच्छ ही लगता है

कैसे चुका पाऊँ,वसंत के उजाले का उपकार

[समापन]

谁言寸草心,报得三春晖 — कौन कहे कि तिनके जितना संतान का मन, वसंत भर की धूप जैसे माँ के स्नेह का ऋण चुका सके

इतनी देर होने की प्रतीक्षा मत करो कि केवल पछतावा रह जाए

शास्त्रीय काव्य का भावलोक और मौलिक गीत-बोल · AI संगीत सृजन

नीचे गीत के बोलों का अनुवाद है; रिकॉर्डिंग में मूल गायन ही है, ऑडियो दोबारा तैयार नहीं किया गया है।

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घने टाँके, देर से वापसी

कू वूजी · AI संगीत

प्रस्तुति एक · पुरुष स्वर

4:19

प्रस्तुति एक · स्त्री स्वर

4:52

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