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《दीप की बत्ती का फूल काटना》 का आवरण

प्राचीन चीनी शैली का भावपूर्ण संगीत · AI संगीत सृजन

दीप की बत्ती का फूल काटना

कू वूजी · AI संगीत · 3 बार पढ़ा गया

ली छिंगचाओ की 《蝶恋花·暖雨晴风初破冻》 से भाव ग्रहण किए गए हैं। 暖雨晴风初破冻,柳眼梅腮,已觉春心动;酒意诗情谁与共,泪融残粉花钿重。乍试夹衫金缕缝,山枕斜欹,枕损钗头凤;独抱浓愁无好梦,夜阑犹剪灯花弄। गुनगुनी बारिश और साफ़ मौसम की हवा जमी बर्फ़ पिघलाती हैं, विलो की नन्ही कोंपलों और आलूबुखारे के फूलों में वसंत का हृदय धड़कने लगा है;मदिरा का सुरूर और कविता की भावना किससे बाँटूँ, आँसू बचा हुआ श्रृंगार घोलते हैं और माथे का फूल-जड़ित आभूषण भारी लगता है। अभी सुनहरे धागों से सिली दोहरी कमीज़ पहनकर देखी, पहाड़ जैसे तकिए पर तिरछी लेटी तो बालों की पिन का फ़ीनिक्स दबकर बिगड़ गया;गहरे दुख को अकेले सँजोए कोई सुंदर सपना नहीं आता, रात ढलने पर भी दीपक की बत्ती का खिला सिरा काटकर उससे खेलती रहती हूँ। वसंत पहले आ गया, साथ देने वाला अब भी नहीं आया——रात भर दीपक की बत्ती काटी, मन की बातें अब भी सर्दी झेल रही हैं। पुरुष और महिला स्वर एक ही गीत के बोल गाते हैं।

गीत की वह पंक्ति

暖雨晴风初破冻 — गुनगुनी बारिश और साफ़ मौसम की हवा ने जमी बर्फ़ पिघलानी शुरू की

柳眼梅腮,已觉春心动—बेंत की आँख-सी कोंपलों और आलूबुखारे के गाल-से फूलों में,वसंत का मन अभी से मचलता लगता है

पूरे गीत के बोल पढ़ें ↓

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शब्दों में गीत बसे हैं

गीत के बोल

[प्रस्तावना]

[अंतरा 1]

एक गर्म बौछार उतर आती है

जमी हुई मिट्टी दिन-ब-दिन ढीली पड़ रही है

हवा भी अब गर्म बहने लगी है

खिड़की के कागज़ को भनभनाती हुई फड़फड़ाती है

इतना सुहाना मौसम

भला कौन अब भी घर में घुटते रहने को राज़ी होगा

[मुखड़े से पहले]

विलो की कोंपलें मानो मलकर खुली उनींदी आँखें हों

मेहुआ के फूल जैसे गालों पर लाली लगाए हों

[मुखड़ा]

暖雨晴风初破冻 — गुनगुनी बारिश और साफ़ मौसम की हवा ने जमी बर्फ़ पिघलानी शुरू की

柳眼梅腮,已觉春心动—बेंत की आँख-सी कोंपलों और आलूबुखारे के गाल-से फूलों में,वसंत का मन अभी से मचलता लगता है

酒意诗情谁与共 — मदिरा की मस्ती और कविता के भाव किसके संग बाँटूँ

泪融残粉花钿重(आँसू बचे हुए श्रृंगार को घोलते हैं, फूलों का आभूषण भारी लगता है)

गहरा दुख अकेले सँजोए कोई अच्छा सपना नहीं आता

夜阑犹剪灯花弄 — रात ढल गई, फिर भी दीये की बत्ती का गुल काटते हुए उससे खेलती हूँ

[अंतरा 2]

मन की कविता जाग उठी

चूल्हे पर मदिरा भी गरम हो रही है, उसकी महक गहरी है

सिर उठाकर कमरे में देखता हूँ

बस मेरी परछाईं मेरे साथ प्याला टकराती है

जो पंक्तियाँ लिखना चाहता था, फिर निगल गया

कलम रख दी, काग़ज़ पर बस हवा है

[मुखड़े से पहले]

आईने के सामने थोड़ा शृंगार सँवार लिया

आँसू गिरते ही, श्रृंगार की मेहनत फिर बेकार हो गई

[मुखड़ा]

暖雨晴风初破冻 — गुनगुनी बारिश और साफ़ मौसम की हवा ने जमी बर्फ़ पिघलानी शुरू की

柳眼梅腮,已觉春心动—बेंत की आँख-सी कोंपलों और आलूबुखारे के गाल-से फूलों में,वसंत का मन अभी से मचलता लगता है

酒意诗情谁与共 — मदिरा की मस्ती और कविता के भाव किसके संग बाँटूँ

泪融残粉花钿重(आँसू बचे हुए श्रृंगार को घोलते हैं, फूलों का आभूषण भारी लगता है)

गहरा दुख अकेले सँजोए कोई अच्छा सपना नहीं आता

夜阑犹剪灯花弄 — रात ढल गई, फिर भी दीये की बत्ती का गुल काटते हुए उससे खेलती हूँ

[वाद्य-संगीत]

[अंतरा 3]

पिछले साल का वह अस्तरवाला कुरता निकालता हूँ

सोने के धागों के टाँके अब भी उतने ही सधे हुए हैं

पहनकर देखती हूँ

आईने में दिखता चेहरा इतना दुबला है कि धुँधला लगता है

पहाड़ जैसे तकिए पर तिरछा टिक जाती हूँ

तकिए से बालों की फ़ीनिक्स वाली पिन टेढ़ी हो गई

[सेतु]

दुख का रंग कैसा होता है

शायद दीप तले,सबसे गहरे अँधेरे जैसी

उसे सीने से लगाकर सो जाना चाहता हूँ

वह उलटे एक-एक करके सुंदर सपनों को खोखला कर देती है

बड़ी मुश्किल से नींद आई

सपने में बोलना शुरू ही किया,कि चौथे पहर जाग उठा

तो फिर सोना ही छोड़ दूँ

दीये की जली बाती बार-बार काटते हुए, भोर की प्रतीक्षा

[अंतरा 4]

दीपक की बत्ती का खिला सिरा तीन बार कतरा

बत्ती का जला फूल मेज़ पर गिरा, लाल मखमल की छोटी ढेरी जैसा

वसंत खिड़की के ठीक बाहर है

पर मेरे मन की बातें अब भी सर्दियाँ काट रही हैं

उसे पिघलने देने की भी जल्दी नहीं

इंतज़ार है दो गर्म हाथों का,जो उसे हल्के से समेट लें

[अंतिम मुखड़ा]

暖雨晴风初破冻 — गुनगुनी बारिश और साफ़ मौसम की हवा ने जमी बर्फ़ पिघलानी शुरू की

柳眼梅腮,已觉春心动—बेंत की आँख-सी कोंपलों और आलूबुखारे के गाल-से फूलों में,वसंत का मन अभी से मचलता लगता है

酒意诗情谁与共 — मदिरा की मस्ती और कविता के भाव किसके संग बाँटूँ

泪融残粉花钿重(आँसू बचे हुए श्रृंगार को घोलते हैं, फूलों का आभूषण भारी लगता है)

गहरा दुख अकेले सँजोए कोई अच्छा सपना नहीं आता

夜阑犹剪灯花弄 — रात ढल गई, फिर भी दीये की बत्ती का गुल काटते हुए उससे खेलती हूँ

[समापन]

जब पौ फटने को होती है

दीये की बाती पर फिर इंद्रधनुष-सी नन्ही चिंगारी फूटी

शास्त्रीय काव्य का भावलोक और मौलिक गीत-बोल · AI संगीत सृजन

नीचे गीत के बोलों का अनुवाद है; रिकॉर्डिंग में मूल गायन ही है, ऑडियो दोबारा तैयार नहीं किया गया है।

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प्रस्तुति एक · पुरुष स्वर

4:28

प्रस्तुति एक · स्त्री स्वर

4:35

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