चीड़ तले छोड़ी चिट्ठी
दू सान गुम हुए बैलों और घोड़ों के पदचिह्न पहचान लेता था, मगर सातवें पहाड़ी रास्ते पर भी उसे गुरु ये नहीं मिले थे। वेन परिवार उस एकांतवासी को नए विद्यापीठ में पहला व्याख्यान देने बुलाना चाहता था। काम बन जाए तो छह व्यापारिक सरायों के आगे के सारे व्यक्ति-खोज के काम उसे मिलते; चीड़ तले बैठे युवक ने बस कहा कि गुरु जड़ी-बूटियाँ लेने गए हैं और पड़ोसियों ने अलग-अलग दिशाएँ बता दीं। धुंध में आखिर पीछा करने योग्य एक हल्का निशान दिखा, तभी नीचे से पालकी भी आ पहुँची, जिसके किनारे पाँव बाँधने वाले लंबे पट्टे टँगे थे।
यह पुस्तक खोलें