पश्चिमी खिड़की पर दीप की परछाईं
यू झाओ ने घर लौटने का किराया जूते के तलवे में छिपा रखा था। सांगपिंग का यह प्रदर्शन पूरा होते ही वह अपनी पुरानी छाया-कठपुतलियाँ बेचकर चाँदी लेकर उस पत्नी से मिलने जाएगा जिससे दो साल से मिलना नहीं हुआ था। रात भर शरद की वर्षा हो रही थी, पर्दे पर वैभव के साथ घर लौटते प्रवासी का गीत चल रहा था और दर्शकों में किसी ने पूछा कि क्या ऐसा भी कोई नाटक है जिसमें अमीर हुए बिना घर लौटा जा सके। तभी पीछे के छज्जे से लकड़ी टूटने की आवाज़ आई। छह परिवारों के शरद के रेशम-कोये बढ़ते पानी की चपेट के पास थे, मगर पुरानी कठपुतलियों का वह सेट, जिसकी सुपुर्दगी तय हो चुकी थी, ज़रा भी भीग नहीं सकता था।
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