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《खुली धूप में नदी पर घूमती बर्फ़》 का आवरण

प्राचीन चीनी शैली का भावपूर्ण संगीत · AI संगीत सृजन

खुली धूप में नदी पर घूमती बर्फ़

कू वूजी · AI संगीत · 6 बार पढ़ा गया

दोंग यिनिंग की 《卜算子·雪江晴月》(बुसुआनज़ी · बर्फ़ीली नदी पर निर्मल चाँद) से भाव ग्रहण(यह उलटे क्रम में भी पढ़ी जाने वाली रचना है, उलटा पढ़ने पर 《巫山一段云》 अर्थात वू पर्वत पर बादल का एक टुकड़ा बनती है)。明月淡飞琼,阴云薄中酒;收尽盈盈舞絮飘,点点轻鸥咒。晴浦晚风寒,青山玉骨瘦;回看亭亭雪映窗,淡淡烟垂岫。(उजले चाँद में उड़ती बर्फ़ फीकी चमकती है, हल्के काले बादलों तले मदिरा का नशा है; लहराते, नाचते रुई जैसे हिमकण सिमट जाते हैं, बिंदु-बिंदु हल्के जलपक्षी मानो मंत्र बुदबुदाते हैं। निर्मल तट पर साँझ की हवा ठंडी है, हरे पर्वत की जेड जैसी हड्डियाँ दुबली हैं; मुड़कर देखें तो सुंदर बर्फ़ खिड़की पर झलकती है, हल्की धुंध पर्वतशिखरों से लटकती है।) बर्फ़ीली नदी की चाँदनी रात का निर्मल दृश्य, सीधे और उलटे दोनों क्रम में कविता बनता है। पुरुष और महिला स्वर में एक ही गीत-बोल गाए गए हैं।

गीत की वह पंक्ति

उजले चाँद के नीचे,बर्फ़ हल्के रंग के जेड की तरह बहती है

पतले बादल जैसे नशे में हों

पूरे गीत के बोल पढ़ें ↓

नीचे गायन संस्करण चुनें, और इस कविता को पूरा पढ़ने में धुन को अपना साथी बनाएँ।

शब्दों में गीत बसे हैं

गीत के बोल

[प्रस्तावना]

[अंतरा 1]

बर्फ़बारी थमने के बाद नदी की सतह

चाँद ने उसे चमकाकर रेशम जैसा कर दिया

मैंने खिड़की खोलकर एक छोटी सी दरार बनाई

तो बर्फ़ की चमक छोटे भवन में उमड़ आई

इतनी निर्मल रात

आह भरना भी बेमौक़ा लगता है

[मुखड़े से पहले]

किसी ने मुझे कविता उलटी पढ़ना सिखाया

कहा वही दृश्य,एक नया आशय पा लेगा

[मुखड़ा]

उजले चाँद के नीचे,बर्फ़ हल्के रंग के जेड की तरह बहती है

पतले बादल जैसे नशे में हों

आकाश भर नाचते रेशे आस्तीन में समेटे नहीं समाते

दूर बिंदुओं-से हल्के समुद्री पक्षी लगातार पुकारते हैं

साफ़ घाट पर शाम की हवा हर झोंके के साथ और सिहराती है

हरे पहाड़ छरहरे होकर जेड की अस्थियों से सुंदर हो गए

[अंतरा 2]

शाम को नदी किनारे टहलने जाऊँ

हवा कपड़ों के छोर बेतरतीब फड़फड़ाती है

दूर के हरे पहाड़ों पर बर्फ़ गिर गई है

सिमटकर सुरमे-सी भौंह की एक सिकुड़न रह गए

पहाड़ के नीचे नदी की खाड़ी का पानी

नीलापन इतना गहरा कि काला लगे,बहुत निर्मल और नीरव

[मुखड़े से पहले]

कुछ हल्के समुद्री पंछी पानी को छूते हुए उड़ते हैं

मानो छिटकी स्याही की कुछ बूँदें, तैर रही हों

[मुखड़ा]

उजले चाँद के नीचे,बर्फ़ हल्के रंग के जेड की तरह बहती है

पतले बादल जैसे नशे में हों

आकाश भर नाचते रेशे आस्तीन में समेटे नहीं समाते

दूर बिंदुओं-से हल्के समुद्री पक्षी लगातार पुकारते हैं

साफ़ घाट पर शाम की हवा हर झोंके के साथ और सिहराती है

हरे पहाड़ छरहरे होकर जेड की अस्थियों से सुंदर हो गए

[वाद्य-संगीत]

[अंतरा 3]

इस त्सी कविता को उलटे क्रम में पढ़ो

पढ़ते हुए समय का एक और रूप उभर आता है

सीधे क्रम में पढ़ो तो 雪江(बर्फ़ की नदी)है

उलटा पढ़ो तो वह वूशान की ओर चल पड़ता है

पता चला कि दृश्य भी

इस पर निर्भर होता है कि तुम किस छोर से कहना शुरू करते हो

[सेतु]

मुड़कर देखता हूँ,बर्फ की उजास खिड़की पर पड़ रही है

खिड़की का काग़ज़ दिन के एक छोटे टुकड़े-सा उजला है

हल्का धुआँ पहाड़ों के बीच से नीचे लटकता है

हल्के से पहाड़ी शिखरों पर लटकता है

सीधे पढ़ो या उलटे, वही रहता है

बर्फ़ और चाँद दोनों समझौता करने को तैयार नहीं

जीवन को इस ओर से देखो या उस ओर से

बस दूसरी निगाह से आनंद लेना है

[अंतरा 4]

तो चाँदनी के साथ आगे चलते चलो

जहाँ पहुँचें वही एक सुंदर संयोग होगा

बर्फ थमेगी चाँद भी आगे बढ़ेगा

कविता पढ़ने वाले को ज़िद नहीं करनी चाहिए

कल शाम किसी दूसरी खिड़की से देखना

बर्फ़ से ढकी नदी को फिर देखना भी पुराना नहीं लगता

[अंतिम मुखड़ा]

उजले चाँद के नीचे,बर्फ़ हल्के रंग के जेड की तरह बहती है

पतले बादल जैसे नशे में हों

आकाश भर नाचते रेशे आस्तीन में समेटे नहीं समाते

दूर बिंदुओं-से हल्के समुद्री पक्षी लगातार पुकारते हैं

साफ़ घाट पर शाम की हवा हर झोंके के साथ और सिहराती है

हरे पहाड़ छरहरे होकर जेड की अस्थियों से सुंदर हो गए

[समापन]

चाँद कुछ और ऊपर चढ़ आया है

हल्की धुंध अब भी पहाड़ी शिखर पर लटकी है

शास्त्रीय काव्य का भावलोक और मौलिक गीत-बोल · AI संगीत सृजन

नीचे गीत के बोलों का अनुवाद है; रिकॉर्डिंग में मूल गायन ही है, ऑडियो दोबारा तैयार नहीं किया गया है।

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प्रस्तुति एक · पुरुष स्वर

5:07

प्रस्तुति एक · स्त्री स्वर

4:11

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