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हाथ में एक ग्रंथ

प्राचीन परिवेश में शिल्प और जनजीवन का उपन्यास

फूलों का मौसम बीतने के बाद

कू वूजी · AI सृजन · 9218 अक्षर · लगभग 12 मिनट

गोदाम खुलने के दिन मेइ के पेड़ की पूरबी डाल पर ही कुछ फूल बचे थे। बाक़ी एक साथ नहीं मुरझाए थे। कुछ में अभी हल्का सफ़ेद रंग था, मगर वे इतने पतले हो चुके थे कि उनके आर-पार रोशनी दिखती थी। ज़रा तेज़ हवा में वे छूटकर गिर जाते। गू छिंग ने सुबह गिरे फूल इकट्ठे किए और किसी को देने की जल्दी नहीं की। पहले दहलीज़ के बाहर सूखा कपड़ा बिछाया ताकि गीले फूल कुछ सूख लें। दीवार की दूसरी तरफ़ वन परिवार ने नया झंडेनुमा दुकान का निशान टाँगा। कपड़ा इतना चटख़ था कि पेड़ पर बचा वह हल्का-सा रंग जैसे सारी चहल-पहल में ढक गया।

वन जीछांग लोगों को नया फाटक और गोदाम में माल रखने की जगहें दिखा रहा था, साथ ही यह भी कि गाड़ी आराम से भीतर आ-जा सकती है या नहीं। उसने अपने झंडेनुमा नामपट्ट पर मेइ के फूल नहीं चढ़ाए थे। फिर भी आने वालों में कोई न कोई पेड़ बचाए जाने की बात सुन चुका होता और खुले चौक तक जाना चाहता। श्यू थान उन्हें दिखाने ले जाती और माल के पास पहुँचकर कहती, आस्तीन समेट लें, कहीं नई बोरियों का मुँह उसमें अटककर खुल न जाए। गू छिंग अपने दरवाज़े की झिर्री से देखती रही। उसे लगा, दूसरे लोग जो पेड़ देख रहे थे और जिसे वह रोज़ पानी देती थी, दोनों पूरी तरह एक ही चीज़ नहीं थे।

एक मेहमान ने देखकर कहा कि फूल कम हैं, बरामदे में खूब खिले कैमेलिया का एक गमला रख देना बेहतर होगा। वन जीछांग मान गया। बोला, आँगन जहाँ खुला रहना चाहिए वहाँ खुला रहे। फूल देखने का सारा दारोमदार इसी एक पेड़ पर नहीं है। गु छिंग ने दीवार के पार सुना तो पहले ज़रा बुरा लगा, फिर राहत की साँस ली। अगर वह पेड़ बचाने को ऐसा फ़ायदा बताता जो रोज़ ग्राहक खींचेगा, तो शायद उसे भी खिलने के मौसम की ओर से हर निराश आदमी से माफ़ी माँगनी पड़ती।

त्योहार के बाद पूर्वी बाज़ार में माल साल के अंत से पहले के मुकाबले धीमे आ रहा था। गू छिंग ने बचा हुआ लपेटने का काग़ज़ कुछ टोकरियों में बाँटा। वह उन्हें धूप दिखाकर ताक पर रखना चाहती थी। कमरे में जगह कम थी और अभी लौटी मेज़ ने कुछ हिस्सा घेर लिया था। सो उसने सबसे बाहर की टोकरी कुछ देर के लिए कुएँ के पास लकड़ी के चबूतरे के नीचे रख दी। सोचा, कल सुबह निकाल लेगी। नाली के मुँह से वहाँ अब भी आधी हथेली का फ़ासला था। उसने देखकर खुद से कहा कि इसे दीवार से सटाकर जलावन रखना नहीं कहेंगे, और काग़ज़ भी सीधे कीचड़ से नहीं छू रहा। अपने मन में उसने खुद को इसकी छूट दे दी।

गोदाम खुलने से तीन दिन पहले, तेरह तारीख़ की रात बारिश शुरू हुई। तेज़ नहीं थी, मगर सुबह भी पड़ती रही। गू छिंग टोकरा देखने गई तो लकड़ी के चबूतरे का बाहरी किनारा कीचड़ की छींटों से भरा था। उसने टोकरा और भीतर सरकाया और सामने एक पुराना तख़्ता लगा दिया। शन सू ने कमरे से गरम पानी लाने को कहा। उनकी आवाज़ थोड़ी बैठी हुई थी, इसलिए गू छिंग फिर उकड़ूँ बैठकर नाली देखने नहीं गई। जब तक सुबह का खाना बना, वन परिवार के चावल की पहली गाड़ी आ गई थी। पहिए दक्षिणी फाटक से गुज़रे और बोरियों के कोनों की सूखी घास के टुकड़े लिए कीचड़ भरा पानी नई, नीची चौखट से गली में धीरे-धीरे बहने लगा।

गू छिंग खिड़की के पास फूलों की पंखुड़ियाँ मोड़ रही थी। छन चाची की आवाज़ सुनी तो पहले लगा कि फिर किसी गाड़ी के लिए रास्ता देना होगा। उसने हाथ की पंखुड़ी रखी और दरवाज़ा खोलकर बाहर निकली। छन चाची लकड़ी की डोई से पानी उलीच रही थीं। पानी दोनों घरों की दीवारों की जड़ से ऊपर चढ़ा था। कुएँ की जगत तक नहीं पहुँचा था, मगर सूखी ईंटों की दरारों के साथ फैलकर एक उथली परत बन गया था। गू छिंग ने हाथ डालकर देखा तो ठंड से उँगलियों के जोड़ सिकुड़ गए। उसके मुँह से पहला सवाल निकला कि कहीं वन परिवार के नए दरवाज़े ने सारा बारिश का पानी इधर तो नहीं मोड़ दिया।

छन चाची ने कहा कि पहले यह मत पूछो किसके घर का पानी है, कोई बर्तन ढूँढ़ो। गु छिंग घर से परात लेने गई। लेते-लेते उसे अपनी ही बात और सही लगने लगी। पहले इतना गीला नहीं होता था। दरवाज़ा बनाया और नई ज़मीन दबाई, तो पानी की राह बदलेगी ही। जब उसने परात रखी, वन जीछांग भी पहुँच चुका था। उसके पायँचों पर कीचड़ लगा था और वन परिवार के आँगन में जूट की एक बोरी का तला उठाकर नीचे टेक लगाई जा रही थी। साफ़ था कि वह भी कमरे में आराम से बैठा दूसरों के भीगने का इंतज़ार नहीं कर रहा था।

दोनों ने लगभग एक ही समय में दूसरे की ओर इशारा किया। वन जीछांग ने कहा कि नाली खुली होती तो दहलीज़ के बाहर का इतना-सा पानी यहाँ जमा न होता। गू छिंग ने कहा कि कौन जाने, दीवार की मरम्मत करते वक़्त चूने का मलबा उसमें डाल दिया हो। उसका चेहरा फ़ौरन उतर गया। उसने पूछा कि क्या वह अभी-अभी बनी दीवार भी खुलवाकर जाँचना चाहती है। गू छिंग बात कह चुकी थी और उस पल पीछे हटना नहीं चाहती थी। उलटे फिर बोली कि नाली रखने का वादा किया है तो बस काग़ज़ पर एक लकीर छोड़ देने से काम नहीं चलेगा।

श्यू थान फिर एक पतली लकड़ी की पट्टी लेकर आईं। उन्होंने उस बात का जवाब नहीं दिया। पट्टी उथली नाली में डाली और एक जगह अटकने पर रुक गईं। गू छिंग से कहा कि पहले कुएँ के पास का पुराना तख़्ता उठाए। उसने उठाया तो टोकरी के नीचे का एक गीला काग़ज़ तख़्ते से चिपका दिखा, फिर पानी में डूब गया। उसे देखकर पहले उसका मन थोड़ा कस गया। फिर सोचा कि यह तो बस सबसे बाहर का, छींटों से भीगा एक टुकड़ा था। असली रुकावट भीतर होगी, वरना इतना पानी कैसे भरता।

साफ़ करने पर सचमुच सिर्फ़ कागज़ नहीं निकला। पुराने और नए गारे के टुकड़े, सूखे पत्ते, गाड़ी से गिरा पुआल और थोड़ी पुरानी काली गाद, सब एक जगह घुल-मिल गए थे। भीगने के बाद कोई उन्हें हाथ से उठाकर साफ़-साफ़ नहीं बता सकता था कि किस घर का हिस्सा कितना है। ह फ़ंगछ्यो ने नाली साफ़ करने के लिए जो छोटा मुँह छोड़ा था, वह काम आया। श्यु थान ने लकड़ी की पट्टी वेन जीछांग को दी, चेन चाची टब उठाकर खाली करने चली गईं और गु छिंग कुएँ के पास उकड़ूँ बैठकर मुँह पर तैरते कचरे को मुट्ठी-मुट्ठी हटाने लगी।

पानी धीरे-धीरे बाहर जाने लगा। थोड़ी ही देर में आधी ईंट दिखने लगी। गू छिंग की आस्तीन के सिरे भीग चुके थे, घुटने ठंडी ज़मीन से सटे थे। उसने उधर से वन जीछांग को कहते सुना कि अभी यहाँ तक खोल देते हैं, भीतर बारिश थमने पर ध्यान से देखेंगे। उसने बार-बार नहीं पूछा कि कागज़ का वह टुकड़ा किसके घर की टोकरी से गिरा था। गू छिंग ने भी खुद से बात नहीं उठाई। बस तसले समेटते समय वह अपनी पूरी कागज़ की टोकरी उठाकर घर के भीतर ले गई। भीगी तली ने देहरी पर एक गहरी लकीर खींच दी। उसे देखकर कहीं से नहीं लगता था कि आधी हथेली का फ़ासला रखने से यह सब टल जाता।

शन सू उसके लिए सूखा पाजामा ढूँढ़ने लगीं। घुटने के पास कीचड़ का एक धब्बा हाथ में आया तो पूछा कि अभी इतनी ज़ोर से क्यों चिल्लाई थी। गू छिंग ने कहा कि उसे डर था पानी कुएँ में चला जाएगा। दादी बोलीं कि कुएँ का मुँह ऊँचा है, पानी अभी वहाँ तक नहीं आया। चिंता हुई तो भी एक ही बात में दूसरों का सारा काम खराब मत ठहरा दो। गू छिंग कहने वाली थी कि उसका डर बेवजह नहीं था। मगर दादी का हाथ कपड़ों के ढेर में धीरे-धीरे टटोलता देखकर उसने बस गीला पाजामा ले लिया और कहा कि कल जाकर भीतर फिर एक बार साफ़ कर देगी।

दूसरे दिन बारिश थमी तो वह सचमुच देखने गई। नाली का मुँह ऊपर से साफ़ था और लकड़ी की पट्टी डालकर टटोला तो वह आगे भी जा रही थी। उसने सोचा कि जिस काम को कल के लिए रखा था, उसे तब करेगी जब सचमुच कुछ फ़ुरसत होगी। सामने का पानी तो बह ही गया था। कागज़ की टोकरी कमरे में रही और काम की मेज़ के पास जगह और तंग हो गई। बैठते समय उसे हर बार पहले घुटने एक तरफ़ मोड़ने पड़ते। श्याओमान ने भीतर आकर यह देखा और अपना बाहरी कपड़ा अपनी गोद में खिसका लिया। कमरे में नई-सी सीलन की गंध क्यों थी, उसने फिर नहीं पूछा।

गोदाम खुलने के शुरुआती दिनों में तरह-तरह के लोग आते-जाते रहे, त्योहार से भी ज़्यादा चहल-पहल थी। गू छिंग को पहले लगता था कि वन परिवार से अब उनकी अच्छी पड़ोसदारी हो गई है। अब दरवाज़े के पास खड़ी होती तो कर्मचारी अकसर एक कदम हटने को कहते। वह भी जानती थी कि रास्ते में माल होता है और कोई जान-बूझकर उसकी उपेक्षा नहीं कर रहा। फिर भी हटने को कहा जाता तो पश्चिमी बाज़ार के वे ग्राहक याद आते जो पहले पूछते थे कि वह किस दुकान से है। खाली टोकरी सीने से लगाए वह आँगन में लौटी। एक ऐसा कारोबार पाने की चाह, जो सचमुच उसका अपना हो, पहले से भी उतावली हो गई थी।

याओ ल्याओ एक बार आई थी। वह वन परिवार की औरतों के लिए बालों में लगाने वाले दो फूल लाई और साथ ही गू छिंग का नया नीला नमूना देखने आ गई। वह मेइ के नीचे नहीं रुकी। पहले जूतों से कीचड़ अच्छी तरह खुरचा, फिर भीतर आई। श्याओमान एक मुड़ी पंखुड़ी बना रही थी जो पुराने नमूने से मेल नहीं खाती थी। याओ ल्याओ ने उसे उठाकर रोशनी में आधा घुमाया और कहा कि यही आकार किसी गरम रंग में हो तो वसंत पुष्प मेले में सिर की सजावट के लिए शायद अच्छा बिके। गू छिंग ने झट कहा कि नीली मेइ में इसे आज़मा चुकी है, बदलाव हो सकता है, बस देखना होगा कितनी डालियाँ चाहिए।

याओ ल्याओ ने उसी वक़्त तादाद नहीं बताई। उसने पूछा कि दूसरे महीने में गु छिंग और काम लेना चाहेगी या नहीं। हाँ हो तो वह कुछ दिनों में ख़ुद नमूना ले आएगी। बड़ा सौदा सुनते ही हामी भरने की ज़रूरत नहीं। गु छिंग ने कहा, श्याओमान मदद करेगी तो समय पर हो जाएगा। मेज़ के उस पार श्याओमान के हाथ में धागा पल भर को थमा। उसने फ़ौरन आपत्ति नहीं की, न हामी में सिर हिलाया। अभी बनाई पंखुड़ी उसने अपने छोटे काग़ज़ के पुड़िये में अलग रख ली और उन साधारण पंखुड़ियों को काटने लगी जिनकी बात पहले से तय थी।

श्याओ मान के जाने के बाद गू छिंग को याद आया कि नया नमूना लेती है तो तुलना के लिए वह मुड़ी हुई पंखुड़ी रखनी होगी। आधा मुड़ा डिब्बा हाथ में लिए वह पीछे दौड़ी। गली के मुहाने पर देखा कि श्याओ मान सीधे रंगाईघर नहीं गई थी, बल्कि टोपियों की किनारियाँ बेचने वाले एक छोटे ठेले पर खड़ी थी। दुकानदार ने उसे एक नरम टोपी दी। उसने लेकर पहले टोपी के एक ओर लगा ज़रूरत से ज़्यादा सधा फूल ढीला किया, फिर बाँह से काग़ज़ की वह छोटी पुड़िया निकाली और कोण मिलाकर पंखुड़ी उस पर रख दी।

गु छिंग की चाल धीमी हो गई। गु परिवार की मेज़ पर देखो तो वह नीली पंखुड़ी ग़लत नमूने से बची कोई कतरन भर लगती थी। अब गहरे धूसर किनारे वाली टोपी के साथ उसमें ऐसी ख़ूबसूरती थी जिसकी उसने कल्पना नहीं की थी। श्याओमान ने टोपी पहनकर देखी। उसके कुछ ढीले बँधे बाल टोपी के नीचे दब गए और पूरा चेहरा सधा हुआ लगा। उसे मुस्कराने से पहले यह देखने की ज़रूरत भी नहीं थी कि गु छिंग राज़ी है या नहीं। दुकानदार कुछ कह रहा था। श्याओमान ने हाथ बढ़ाकर टोपी का किनारा थोड़ा और नीचे मोड़ा। पास खड़ी एक ग्राहक ने भी हाथ बढ़ाया और बाहर की ओर मुड़ी रेशमी किनारी छू ली।

गू छिंग अचानक आगे जाकर पूछना चाहती थी कि उस फूल में आखिर किसका सामान लगा है। उँगलियों ने हाथ की पेटी पर दबा निशान बना दिया। कदम उठाकर रुक गई। याद आया, श्याओ मान पहले ही कह चुकी थी कि खराब हुए परीक्षण उसके जिम्मे होंगे, औपचारिक गिनती में नहीं आएँगे। पूछ लेने पर शायद बस पहले अस्पष्ट रही छोटी बात को अप्रिय ढंग से पूछना होता। दो कदम दूर खड़ी उसने ग्राहक को टोपी दूसरी ओर घुमाते देखा। श्याओ मान उसे देखती, उससे पहले ही पेटी लेकर गली में लौट गई।

मेज़ पर लौटकर उसने वह नीला फूल फिर उठाया जिसे पानी के बेसिन में देखकर परखा था। उसे आधा घुमाया, फिर भी उसमें टोपी के किनारे वाले फूल जैसा हलकापन नहीं ला सकी। उसने उसे उधेड़कर बिगाड़ा नहीं। बस वहीं रख दिया और काग़ज़ के डिब्बे पर अपनी उँगलियों से पड़ा निशान पोरों से सहलाकर समतल किया। निशान आख़िर तक पूरी तरह नहीं मिटा। उसने डिब्बे को तली की ओर से पलट दिया, ताकि निशान दरवाज़े की तरफ़ न रहे।

उस दोपहर दादी सुई की मेज़ पर फिर नहीं बैठीं। छन चाची के साथ कपड़ा सुखाने बाहर गईं। दोनों ने गीले कपड़े से आख़िरी बूँद तक निचोड़ी और बाँस पर डाल दिया। हवा चली तो लगा जैसे गली में कई सफ़ेद दरवाज़े खुल-बंद हो रहे हों। गु छिंग चाय देने गई तो सुना कि छन चाची पूछ रही थीं, सच में दक्षिण गईं तो पाँव इतना चलने के आदी हैं? शन सू ने कहा कि दूर नहीं चल पाएँगी तो नाव ले लेंगी। किनारे पर पहुँचने से पहले ही अपने-आप से हार नहीं मान सकतीं। गु छिंग कहना चाहती थी कि अभी नाव का किराया भी पूरा नहीं जुटा, मगर आख़िर बस चाय रख दी।

लौटकर उसने नीले नमूने फिर से सजाए और उनमें से वसंत पुष्प मेले के लिए बनाए जा सकने वाले फूल चुने। बाहर की ओर मुड़ी पंखुड़ियों वाले उन फूलों में सब उसके अकेले के हाथ के नहीं थे, मगर साथ रखे तो किसी नई दुकान की सजावट जैसे लगे। उसने नीचे सफ़ेद कागज़ रखकर पहले 顾 लिखा, फिर 青 आधा लिखकर कलम रख दी कि कहीं स्याही फूलों पर न टपक पड़े। खिड़की के बाहर दादी और चन चाची अब भी हँस रही थीं। सूखते कपड़ों ने आवाज़ को ज़रा रोक लिया और कमरे तक वह बहुत हल्की होकर पहुँची।

साल के पहले महीने की अठारह तारीख की सुबह पास की डाल पर बचा मेई का आखिरी फूल गिर गया। ठीक नई दीवार के मोड़ के भीतर गिरा, गु परिवार के आँगन में नहीं। शेन सु दीवार के पार कुछ देर देखती रहीं और किसी को उसे उठाने के लिए नहीं कहा। गु छिंग को लगा कि दादी का मन उस फूल में अटका है। उसने पूछा कि क्या उधर जाएँ। दादी ने सिर हिलाकर कहा कि उधर का फूल उधर ही गिरा रह सकता है। इतना कहकर उन्होंने पुराना कपड़ा समेट लिया। उसमें पिछले दिनों गिरी पंखुड़ियाँ सूखकर एक छोटी-सी पुड़िया बन गई थीं। पहले उनके रंग कहीं गहरे तो कहीं हल्के थे। अब लगभग सब एक जैसे फीके पड़ गए थे।

गू छिंग ने नई दीवार छुई। बारिश के बाद की थोड़ी ठंडक अब भी ईंटों में थी। दीवार पेड़ के लिए मुड़ गई थी, मगर फूल के लिए एक दिन भी और नहीं रोक पाई थी। उसे इस बात से अभी कुछ और नहीं सूझा। वह बस भीतर लौटी, सफ़ेद कागज़ पर 青 अक्षर पूरा किया और उसे पलटकर हिसाब लगाने लगी कि अगर याओ ल्याओ बड़ा नमूना लाईं तो उसकी मेज़ के पास ज़्यादा से ज़्यादा कितनी तश्तरियाँ रखी जा सकेंगी।

· अध्याय समाप्त ·

यह पुस्तक AI की सहायता से मौलिक रूप में लिखी गई है और वांग आनशी की 《梅花》(प्लम के फूल) तथा इस वेबसाइट की मूल लघुकथा 《不卖春风》(वसंत की हवा बिक्री के लिए नहीं) का विस्तार है। पात्र, व्यापार, भूगोल और कालगणना सभी काल्पनिक हैं; यह कवि की जीवनी नहीं है। मूल रचना में पेड़ बचाने, रेशमी फूलों में सुगंध न होने और दादा-दादी तथा पोते-पोती की दो पीढ़ियों के कमल देखने के केंद्रीय चुनाव बनाए रखे गए हैं।

इस पुस्तक की विषयसूची · 36 अध्याय
  1. ठंडी महक रेशम में नहीं
  2. सफ़ेद चूने से घिरी जगह
  3. चाँद के नीचे कैंची
  4. मेज़ पर रेशमी मेई
  5. दरवाज़े का मुँह दूसरी ओर
  6. सिक्कों की दो छोटी लड़ियाँ
  7. जगह देने वाला मोड़
  8. बिना महक का दुकान का नामपट्ट
  9. आधे दिन की मज़दूरी
  10. वह फूल जो फूल नहीं है
  11. बर्फ़ के बाद पेटी बाँधना
  12. एक टहनी कितने की
  13. किसी और के घर नए साल की रात
  14. फूलों का मौसम बीतने के बाद
  15. कागज़ पर नाम छापना
  16. ठंडे भात का एक कटोरा
  17. पहली बार दोबारा बनाने की इजाज़त नहीं
  18. लौटाया हुआ डिब्बा
  19. दो लोगों का आँगन
  20. बारिश का पानी पुरानी नाली से गुज़रता है
  21. श्याओमान का हिसाब
  22. छतरी के किनारे की खाली जगह
  23. ग्राहकों को जैसा वसंत चाहिए
  24. मेज़ पर छूटे फूल
  25. एक व्यक्ति की राह
  26. पाँचवाँ महीना कारोबार के हवाले नहीं
  27. फूल देखने वाले
  28. पैसों की तीसरी थैली
  29. गर्मियों में पेड़ का क्या होगा
  30. नाव पर चढ़ने से पहले
  31. जलमार्ग का पहला पड़ाव
  32. कमल के पत्ते अभी खुले नहीं हैं
  33. पानी के बीच का वह फूल
  34. लौटते समय फूलों के मौसम की जल्दी नहीं
  35. मेई के पेड़ की गर्मियों की छाँह
  36. फिर एक नई फूल-डाली बनाएँ

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