प्राचीन परिवेश में शिल्प और जनजीवन का उपन्यास
आधे दिन की मज़दूरी
कू वूजी · AI सृजन · 9114 अक्षर · लगभग 12 मिनट
दोंग श्याओमान पहली बार गू परिवार के घर आई तो उसने पहले मेज़ के फूल नहीं देखे, बल्कि रेशम सुखाने की रस्सी छूकर देखी। रस्सी दो पुरानी कीलों के बीच तनी थी। उसने उँगली से दबाया तो बीच में आधा इंच नीचे चली गई। गू छिंग को लगा कि वह जगह की मामूली हालत पर कुछ कहेगी। वह बताने ही वाली थी कि दीवार की मरम्मत की वजह से अभी-अभी सब सरकाया है, मगर श्याओमान ने पूछा कि गीला कपड़ा भी यहीं टाँगती हो? उसने कहा हाँ। श्याओमान ने अपना ऊपरी कपड़ा उतारकर एक और, ज़्यादा नीची छड़ पर डाल दिया और पहले कपड़े के लिए जगह छोड़ दी।
उसे जी भाभी ने भेजा था। सर्दियों में रंगशाला में काम कम था, मगर नए साल का माल समय पर तैयार करना था। कुछ लोग घर जाकर आराम कर सकते थे, कुछ के लिए एक दिन की छुट्टी का मतलब एक दिन की रोटी कम होना था। धागा खरीदते समय गू छिंग ने बताया कि याओ की दुकान कुछ और तरह के कैमेलिया आज़माना चाहती है और उसके पास इतना समय नहीं है। रेशम के आधे थान के पार से जी भाभी ने पूछा कि उसे कोई काम करने वाला चाहिए या कोई उसे उस्ताद कहने वाला। गू छिंग को सवाल अटपटा लगा। उसने कहा कि ज़ाहिर है, उसे अच्छा काम करने वाला चाहिए। तब जी भाभी ने दरवाज़े के पास किसी की गठरी बाँध रही युवती को आवाज़ दी।
श्याओमान उससे तीन साल छोटी थी, मगर बात करने से पहले मुस्कराती नहीं थी। जब उसने सुना कि फूल बनाने हैं, तो पहले पूछा कि रंगी हुई सामग्री कौन जुटाएगा और काम पूरे दिन का होगा या आधे दिन का। कू छिंग ने एक-एक सवाल का जवाब दिया। आखिर में कहा कि पहले आधा दिन काम करेंगी, ज़रा जल्दी आ जाएगी तो खाने से पहले जा सकेगी। मज़दूरी के लिए वह पहले कहना चाहती थी कि आधे दिन के छह वेन देगी, मगर अभी-अभी मँगाए नए धागे पर नज़र पड़ी तो उसे डर हुआ कि कहीं श्याओमान का हाथ धीमा न हो। सो उसने बात बदल दी। पहले डंठलों पर धागा लपेटना है और पंखुड़ियाँ अलग-अलग बाँटनी हैं, एक खेप तैयार करने के दो वेन मिलेंगे, तीन खेप के भी छह वेन ही होंगे।
श्याओमान ने एक बार सिर हिलाया। कौन-सा तरीक़ा उसे बेहतर लगता है, यह नहीं कहा। बस पूछा कि एक हिस्सा किसे गिनेंगे। गु छिंग ने तैयार टहनी दिखाकर समझाया कि फूल के नीचे की डंडी अच्छे से लपेटी जाए और हर टहनी के हिसाब से पंखुड़ियों की गिनती पूरी रखी जाए। बीच का सबसे बारीक हिस्सा कसना उसका काम नहीं होगा। श्याओमान ने टहनी का निचला सिरा पलटकर देखा, धागे की दिशा समझी और उसे मेज़ के बीच रख दिया। दोनों को लगा बात काफ़ी साफ़ हो गई है। फिर यह नहीं पूछा कि कोई हिस्सा ग़लत हो जाए तो क्या होगा या नमूना बदलने के लिए काम रोकने में जो वक़्त जाएगा, वह किस खाते में आएगा।
शन सू कमरे से निकलीं और उसका कुलनाम दोंग सुनकर पूछा कि क्या वह दक्षिणी पुल के रंगाईघर में काम करती है। श्याओ मान ने हाँ कहा और उन्हें दादी शन कहकर पुकारा। दादी ने हाथ हिलाया और मेज़ के पास की एक छोटी चौकी दिखाकर उसे बैठने को कहा। अपनी जगह नहीं छोड़ी। सामान उठाते समय गू छिंग ने देखा कि कमरे के भीतर खिसकाई मेज़ के चारों ओर तीन लोग बैठें तो पैर एक-दूसरे से टकराते हैं। वह पुराने दरवाज़े का तख़्ता लाकर दूसरे सिरे पर लगाने लगी। श्याओ मान ने कहा कि इतनी चौड़ाई की ज़रूरत नहीं, हाथ के पास एक हथेली भर जगह काफ़ी है।
पहला हिस्सा बहुत जल्दी तैयार हो गया। श्याओमान के हाथ में गु छिंग जैसी बारीकी नहीं थी, मगर हाथ सधा था। धागा लपेटते हुए जल्दी में बाँस की डंडी टेढ़ी नहीं खींच देती थी। उसने छँटी हुई सफ़ेद पंखुड़ियाँ चौड़ी से सँकरी तक जमाईं। दो सबसे छोटी पंखुड़ियाँ बड़ी के नीचे दबने नहीं दीं, जैसे रंगाईघर में रेशम सुखाने से पहले वह पहचान लेती हो कि कौन-सा किनारा ज़रा ज़्यादा रंग सोखेगा। गु छिंग देखकर मन ही मन बहुत संतुष्ट थी, फिर भी शुरू में ही खुलकर तारीफ़ करने से हिचकी। डर था कि फिर वह उसके सुझाए बदलाव सुनने को तैयार नहीं होगी।
दूसरे हिस्से में गु छिंग ने दो पंखुड़ियाँ अलग कीं। बोली, किनारे पर ज़रा पतली हैं। श्याओमान ने उठाकर रोशनी में देखा और पूछा कि कपड़ा पहले से पतला था या उसे किनारा काट देना चाहिए था। गु छिंग ने कहा, दोनों बातें गिनी जाएँगी। ग्राहक के हाथ में उधड़ा किनारा आया तो दोष फूल बनाने वाले पर ही जाएगा। श्याओमान ने इस पर कुछ नहीं कहा। दोनों पंखुड़ियाँ बदल दीं और पुरानी दो कतरनों की तश्तरी में रख दीं। उन्हें फिर अच्छी पंखुड़ियों की थाली में नहीं मिलाया। गु छिंग से पूछे बिना रहा नहीं गया कि क्या वे छोटे फूल बनाने के लिए रख सकती हैं। श्याओमान ने कहा, रख सकती हैं। आप अलग रखिएगा, ताकि अगली बार मैं फिर इन्हें अच्छी पंखुड़ियों में न गिन लूँ।
तीसरा हिस्सा आया तो शन सू गू छिंग के लिए सुई में बारीक धागा डालने लगीं। उन्होंने उजली जगह में ही कोशिश की। सुई कभी पास लाईं, कभी दूर की और बड़ी देर में धागा भीतर गया। गू छिंग कहने वाली थी कि रहने दें, मगर श्याओमान ने पहले सुइयों की पोटली नीचे रख दी। बोली, थोड़ा चौड़ा छेद हो तो मोटे धागे का सिरा इतनी आसानी से नहीं बिखरेगा। दादी ने आँख उठाकर कहा कि मोटी सुई महीन रेशम में छेद छोड़ जाती है। श्याओमान ने सिर हिलाया, सुई जैसी थी वैसी लौटा दी और यह साबित करने में नहीं लगी कि उसे भी काम की समझ है।
गू छिंग को लगा कि दोनों के बीच थोड़ी झिझक है। उसने जल्दी से नया कैमेलिया उठाकर श्याओमान की राय पूछी। नमूना याओ की दुकान ने दिया था। बाहर की पंखुड़ियाँ भरी-भरी होनी थीं, बीच का हिस्सा मेई के फूल जैसा विरल नहीं होना था। श्याओमान ने देखकर अचानक एक पंखुड़ी बाहर की ओर मोड़ी और उसे बगल से थामा। लगा जैसे फूल ने पूरी तरह खिलने से पहले ही हवा की ओर मुँह करके करवट ली हो। पहली नज़र में गू छिंग को सुंदर लगा। दूसरी नज़र में लगा कि यह याओ की दुकान के नमूने जैसा नहीं है। उसने श्याओमान से उसे नीचे रखने और पहले पुराने ढंग से बनाने को कहा।
श्याओमान ज़रा मुस्कराई, हालाँकि कहना मुश्किल था कि वह मुस्कान ही थी। उसने सहज ही मुड़ी हुई पंखुड़ी को अपने बालों के पीछे लकड़ी की पुरानी सलाई के पास खोंस लिया। उसके बाल बहुत कसकर नहीं बँधे थे। काले बालों के पास पंखुड़ी इतनी हल्की लग रही थी कि किसी भी पल गिर सकती थी, मगर गिरी नहीं। गू छिंग उसे उतारने को कहना चाहती थी। कपड़े का टुकड़ा छोटा सही, उसे यूँ ही पहनकर तो नहीं ले जा सकती थी। बात होंठों तक आई ही थी कि दादी ने पहले कह दिया कि इस तरह चेहरा नहीं ढकता। गू छिंग को बात रोकनी पड़ी। उसने श्याओमान को एक और पंखुड़ी निकालकर दी और कहा कि उसका मतलब कपड़े की कीमत काटना नहीं था, उसे बस डर था कि सौंपने वाली खेप की गिनती कम न पड़ जाए।
श्याओमान ने फूल उतारा और मेज़ के किनारे वापस रख दिया। उसने कहा कि इसे उसके अपने बिगड़े नमूने में गिनें, देने वाले फूलों की गिनती में न मिलाएँ। उसने बात सपाट लहजे में कही, मगर गू छिंग को जाने क्यों कुछ बुरा लगा। जैसे वह अभी किसी की रोज़ी चलाने लायक बनी भी नहीं थी और दूसरों के हाथों का हिसाब निगाह से लगाना पहले ही सीख गई थी। उसने छह वन निकाले। श्याओमान ने तीनों हिस्से सलीके से रख दिए तो उसने पैसे सबसे बाहर की ओर रखे। एक भी सिक्का कम नहीं था।
श्याओ मान ने पैसे तुरंत नहीं उठाए। उसने पूछा कि कल भी आना है? गू छिंग ने कहा हाँ, आज के ही समय पर। अगर उसे बाहर जाना हुआ तो दादी से काम देखने को कह देगी। श्याओ मान ने शन सू की ओर एक नज़र डाली, तभी पैसे कमरबंद की छोटी थैली में रखे। बोली कि कल शायद थोड़ी देर हो जाए, रंगाईघर में एक पीपे का आख़िरी काम बाकी है और पहले उसे उठवाने में हाथ बँटाना होगा। गू छिंग ने मान लिया। मन ही मन वह हिसाब लगाने लगी कि इस थोड़ी-सी देरी में कितना काम कम होगा, मगर उसने यह नहीं पूछा कि उस पीपे का काम एक हिस्से में गिना जाएगा या आधे दिन में।
उसके जाने के बाद दादी ने श्याओमान की खुली छोड़ी हुई मुड़ी पंखुड़ी फिर उठाई और गु छिंग से उसका पिछला हिस्सा देखने को कहा। वह उनके घर के पुराने साँचे से नहीं बनी थी। उसका किनारा थोड़ा तिरछा था, इसलिए बाहर की ओर मुड़ने पर ऐसा नहीं लगता था कि जानबूझकर एक पूरा घेरा बनाया गया है। गु छिंग ने कहा, अच्छी है, मगर याओ की दुकान को यह नहीं चाहिए। शेन सु ने कहा कि उन्होंने भी ग्राहक का नमूना बदलने को नहीं कहा और पंखुड़ी वापस रख दी। गु छिंग को अचानक लगा कि एक ही मेज़ पर दो अलग-अलग तरह की अच्छी चीज़ें रखी थीं। बस इस वक्त दूसरी की ओर ध्यान देने की फ़ुरसत उसे नहीं थी।
वह तय किए हुए पाँच दिन नहीं रुक सकी। अगले दिन दोपहर बाद ही आठों टहनियाँ देखने पूर्वी बाज़ार पहुँच गई। याओ ल्याओ ने कहा कि पाँच बिक गईं और तीन अभी पड़ी हैं। प्रति टहनी छह वेन के हिसाब से आज तीस का भुगतान हो सकता है। गु छिंग ने पैसे लिए। पहले सड़क किनारे एक-एक टहनी बेचकर जो पैसे जुड़ते थे, उनके मुकाबले यह कहीं सधा हुआ हिसाब था। फिर भी उसका मन उतना हल्का नहीं हुआ जितना उसने सोचा था। वह नई सामग्री पहले ही खरीद चुकी थी, श्याओमान की मज़दूरी दे चुकी थी और जो तीन टहनियाँ नहीं बिकीं, उन्हें भी नमूना बदलने के लिए वापस ले जाना था। हाथ में सिक्कों की यह लड़ी होने का मतलब यह नहीं था कि सारे पैसे किसी और काम में लगा सकती है।
याओ ल्याओ ने उसे रकम पर नज़र गड़ाए देखा तो पूछा कि क्या अब वह काम छोड़ देगी। गू छिंग ने सिर हिलाया और जल्दी से कहा कि उसे दाम पर आपत्ति नहीं है। पहली बार कोई उसके काम में हाथ बँटा रहा है, वह बस हिसाब लगाना चाहती है कि काम कैसे समय पर पूरा हो। याओ ल्याओ ने कहा कि वह भी रोज़ यही हिसाब लगाती हैं। तीन औरतों में से एक को इन दिनों घर जाकर किसी बीमार की देखभाल करनी है, पर त्योहार के फूल कम नहीं हो सकते। गू छिंग सचमुच ज़्यादा दे सके तो वे कैमेलिया और मेई दोनों लेंगी, मगर हर बार नमूना पहले तय होगा। ऐसा नहीं चलेगा कि फूल बना लेने के बाद शिकायत हो कि ग्राहक उसे मंज़ूर नहीं करते।
गु छिंग ने बिना बिकी तीनों टहनियाँ फिर से सजाकर रखीं। उनमें एक छोटी थी। बहुत देर काउंटर के किनारे टिकी रहने से वह थोड़ी टेढ़ी हो गई थी। गु छिंग ने उसे ठीक करने के लिए हाथ बढ़ाया तो काउंटर के पीछे की औरत ने धागे का एक छोटा टुकड़ा थमाया और कहा कि ज़ोर लगाकर मत मोड़ो। गु छिंग ने मुस्कराकर धन्यवाद दिया। वह औरत भी मुस्कराई और पूछने लगी कि उसके यहाँ नई आई लड़की का कुलनाम दोंग है क्या। पता चला कि वह उसी के साथ रंगाईघर में काम कर चुकी थी। श्याओमान को दूसरी जगहों पर भी लोग उसके पुराने काम से जानते थे। यह सुनकर गु छिंग को न जाने क्यों कुछ अचरज हुआ, जैसे जिस लड़की को उसने आधे दिन के लिए रखा था, उसे तो पूरे दिन उसकी मेज़ का ही होना चाहिए था।
पंद्रह तारीख़ को श्याओमान सचमुच एक घड़ी देर से आई। भीतर आई तो उसकी आस्तीन पर गहरे नीले रंग का धब्बा था और धोने के बाद भी उसमें नमी थी। गू छिंग ने पहले पूछा कि कहीं उसके यहाँ के सफ़ेद कपड़े पर रंग तो नहीं लगा। श्याओमान ने कहा कि उसने कपड़ा छुआ तक नहीं और ख़ुद ही हाथ धोने चली गई। लौटकर आई तो गू छिंग ने पिछले दिन के बाँस के डंठलों का एक हिस्सा उसकी ओर सरकाया। कहा, इनमें दो ठीक से कसे नहीं हैं, दोबारा बनाने होंगे। श्याओमान ने छूकर देखा, बहस नहीं की। बस पुराना धागा खोलकर छोटी तश्तरी में रखा और दोनों डंठल फिर लपेट दिए।
उस आधे दिन में उसने बस दो हिस्से सौंपे। कू छिंग ने हिसाब से चार वेन निकाले। श्याओ मान ने हाथ बढ़ाया, फिर ज़रा रुककर पूछा कि जिन दो डंठलों का धागा खोला, उनकी मेहनत नहीं गिनी जाएगी क्या। कू छिंग ने कहा कि वे पहली बार ठीक नहीं बने थे, याओ की दुकान वाले भी उसके साथ ऐसे ही हिसाब करते हैं, वापस आया काम फिर करना पड़ता है। श्याओ मान ने सिर उठाकर उसे देखा, जैसे कोई लंबी बात कहना चाहती हो, मगर आख़िर में बस इतना कहा कि समझ गई। उसने चार वेन सँभालकर रखे और जाने से पहले मेज़ अब भी बुहारकर साफ़ की। न दरवाज़ा पटका, न दादी को अपना दुख दिखाया।
शन सू बीच में कुछ नहीं बोली थीं। गू छिंग जब फूल का बीच बनाने लगी, तभी उन्होंने पूछा कि अगर उन दो डंडियों पर धागा लपेटने की दिशा उसने परसों ठीक से समझाई ही न हो तो? गू छिंग ने कहा कि उसने नमूना दिखाया था। दादी ने पूछा, उस नमूने की जड़ पर धागे का एक और फेरा छिपा हुआ नहीं था? पहले श्याओ मान को दिखाते वक़्त उसे खोला था क्या? गू छिंग का हाथ रुक गया। उसे अचानक याद आया कि पहली बार उसने बस बाहर का हिस्सा पलटकर दिखाया था, फूल के बीच की गाँठ सचमुच नहीं खोली थी। वह पीछे जाकर वे दो वन देना चाहती थी, मगर गली के मुहाने पर भीड़ बढ़ती देख उसने ख़ुद से कहा कि कल कहने से भी वही बात होगी।
अगले दिन फिर नया सामान था और नए ग्राहक फूल पूछ रहे थे। उसने वे दो वन सुई ख़रीदने के खुले पैसों के साथ रख दिए और सामान हटाते वक़्त भूल गई कि कौन-से पैसे किस मद के थे। श्याओमान अब भी वक़्त पर आती थी। कभी अपने बालों के पीछे की लकड़ी की पिन की दिशा बदल लेती, मगर अब कोई भी नई पंखुड़ी यूँ ही नहीं लगा लेती थी। मेज़ के किनारे बाहर की ओर मुड़ी पंखुड़ी वाला नमूना एक ख़ाली कटोरे के नीचे दबा था। गू छिंग को उसकी याद आई, तब तक उसमें हवा जैसा जो हलकापन पहले था, वह दिखाई नहीं देता था।
सत्रह की शाम गू छिंग ने देखा कि उसके बाहर रहने के दौरान दादी ने छह फूलों के बीच वाले हिस्से पूरे कर दिए थे। टाँके धीरे-धीरे लगे थे और एक फूल में एक कतार ग़लत थी। देखते ही उसका मन उसे उधेड़ने को हुआ। शन सू अंगीठी के पास बैठी थीं। उनके हाथों की पीठ लाल थी और उन्होंने अपने काम की गिनती नहीं बताई। आख़िर गू छिंग ने कैंची नहीं उठाई। वह फूल अलग रखकर पहले पूछा कि दादी ने खाना खाया या नहीं। दादी ने कहा, आधा कटोरा दलिया खाया था। वह रसोई में बचा हुआ आधा कटोरा गरम करने चली गई। वह उन छह फूलों के बीच की ओर देखना नहीं चाहती थी, न यह मानना चाहती थी कि जाने कब से उसे एक तरफ़ दूसरों की मदद में खोट दिखने लगी थी और दूसरी तरफ़ वह चाहती थी कि मेज़ पर बचा काम हमेशा कोई उसके लिए पूरा कर दे।
· अध्याय समाप्त ·
यह पुस्तक AI की सहायता से मौलिक रूप में लिखी गई है और वांग आनशी की 《梅花》(प्लम के फूल) तथा इस वेबसाइट की मूल लघुकथा 《不卖春风》(वसंत की हवा बिक्री के लिए नहीं) का विस्तार है। पात्र, व्यापार, भूगोल और कालगणना सभी काल्पनिक हैं; यह कवि की जीवनी नहीं है। मूल रचना में पेड़ बचाने, रेशमी फूलों में सुगंध न होने और दादा-दादी तथा पोते-पोती की दो पीढ़ियों के कमल देखने के केंद्रीय चुनाव बनाए रखे गए हैं।
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