कविताओं में बसी कहानियाँ
झूयू की दो टहनियाँ
कू वूजी · AI सृजन · प्राचीन परिवेश की यात्रागाथा · पूर्ण · 1 अध्याय · 2 बार पढ़ा गया
पेई जी दो सौ ली यात्रा करके दोहरे नवम पर्व का रेशमी ध्वज जीतने आया था, लेकिन उसकी सुरक्षा-रस्सी सँभालने वाला बड़ा भाई पिछले कस्बे में बीमार पड़ा था। उत्सव के प्रमुख को उसकी अकेले देश भर घूमने की ख्याति पसंद थी, और अनजान रस्सी-कर्मी सहायता को तैयार था, पर वह अपनी जान उसके हाथों सौंपने का साहस नहीं कर पा रहा था। दस ल्यांग का इनाम बड़े भाई को एक ऋतु भर विश्राम दे सकता था। उसने वृद्धा की दी हुई झूयू की टहनियाँ ले लीं, लेकिन अतिरिक्त टहनी किसे देनी है, यह भी अब तक नहीं सोचा था।
यह कृति AI ने वांग वेई की 《九月九日忆山东兄弟》 (नौवें महीने के नौवें दिन पर्वत के पूर्व के भाइयों की याद) के काव्य-बिंबों से प्रेरित होकर रची है। पात्र और कथानक पूर्णतः काल्पनिक हैं तथा कथा एक कल्पित प्राचीन परिवेश में कही गई है। यह मूल कविता का अनुवाद या रूपांतरण अथवा कवि की जीवनी नहीं है।
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