प्राचीन परिवेश में व्यापारिक मार्गों और पुनर्मिलन पर दीर्घ उपन्यास
एक दुकान से सौदा नहीं बना
कू वूजी · AI सृजन · 9291 अक्षर · लगभग 12 मिनट
थाओ की खाने की दुकान का आदमी पहले पहुँचा। पुराने जूते पूरी तरह भीग चुके थे। भीतर आते ही पूछा कि क्या सूखी जगह मिल सकती है जहाँ वह घास की चप्पलें पहन ले। याओ ज्या ने झट दरवाज़े के पास से टूटा बाँस का घोड़ा हटाया और एक नीची चौकी दी। उसने बैठकर जूते उलटे तो पानी की एक छोटी धार निकली। बोला कि सुबह नाव का तख्ता पार करते हुए पाँव ठीक नहीं पड़ा। शुक्र है पास के आदमी ने हाथ बढ़ाकर खींच लिया, वरना आज की भुगतान वाली पर्ची भी पहले पानी में जाती। कहकर वह हँसा। याओ ज्या भी अब चेहरा ताने ग्राहक का स्वागत नहीं कर सकी।
ख़रीद का इंतज़ाम करने वाले का उपनाम सुन था। वह कल भी आया था, आज तीनों दुकानों की अलग-अलग पर्चियाँ भी साथ लाया। उसने उन्हें काउंटर के किनारे दबाकर रखा और पहले ही कह दिया कि वह बस परिचय कराने आया है। दाम पर हर दुकान का ख़रीद सँभालने वाला हामी भरेगा, वह किसी की तरफ़ से बात पक्की नहीं करेगा। थाओ की दुकान से आए आदमी का उपनाम लो था। बाकी दो दुकानें अभी नहीं पहुँची थीं, सो उसने पहले पका सिरका चखा। याओ ज्या की तैयार की हुई तीनों चीज़ें सामने थीं। सिरका, चटनी और अचार वाले मेई अलग-अलग पंक्तियों में दर्ज थे। किसमें कितनी सामग्री लगेगी, कौन-से मर्तबान में जाएगा और कौन-सा काम अलग से करना होगा, सब उस काग़ज़ पर था जिसे वह ख़ुद साफ़ पढ़ सकती थी।
ख़रीद सँभालने वाले लो ने पहले रियायत नहीं पूछी। उसने पहले अचार का एक मेई उठाकर काटा तो चेहरा सिकुड़ गया। याओ ज्या ने लू येन जैसी उसकी सूरत देखी तो हँसी लगभग छूट गई। झट पानी डाला। मगर उसने हाथ हिलाकर कहा कि थाओ की दुकान की धीमी आँच पर पकी मछली के लिए इतनी खटास चाहिए। उसे ख़ुद खट्टा नहीं सुहाता, इसलिए अपनी जीभ के भरोसे रसोइए की ओर से फ़ैसला नहीं कर सकता। याओ ज्या ने पानी उसके हाथ के पास छोड़ दिया और उसके भीतर अचानक ज़रा उजाला हुआ: कोई ऐसा भी हो सकता है जिसे अपना कौर बुरा लगे और फिर भी उसे दूसरी कटोरी का ख़याल रहे।
सोंगहे वॉन्टन की दुकान का खरीद सँभालने वाला आदमी उसके तुरंत बाद आया। वह बेटी के लिए छांगगान से सुइयों की एक पुड़िया लाया था। भीतर आते ही उसे कपड़ों में छिपा लिया कि सिरका न लग जाए। याओ ज्या ने बैठने को कहा तो वह सीट के आधे हिस्से पर ही बैठा। खरीददार लुओ को मछली के बारे में बात करते सुनकर बोला कि उनके यहाँ अचार वाले आलूबुखारे नहीं लगते। पहले पका सिरका चखेंगे, सूअर की हड्डियों के शोरबे के साथ। दोनों अपनी-अपनी दुकान की बात करने लगे और आखिर इस पर देर तक उलझे कि किस शोरबे में हरा प्याज़ पड़ना चाहिए। कोई दूसरे की मानने को तैयार नहीं था। याओ ज्या पास खड़ी थी। उसने अपने घर के पुश्तैनी स्वाद का परिचय देने के लिए बहुत कुछ सोच रखा था। अब उसे बस कटोरे देने थे और उन्हें बोलने देना था।
हेंगशेंग भोजनालय वाला सबसे अंत में पहुँचा। आदमी उम्रदराज़ था, बाल बहुत कसकर सँवारे हुए थे। भीतर आकर पानी नहीं पिया; पहले वे कुछ काग़ज़ देखे और पूछा कि क्या वह रुआन शिन के घर की बेटी है। याओ जिया ने हाँ कहा तो उसने सिर हिलाकर बताया कि पहले जानता था। जवानी में दो बार सब्ज़ियाँ पहुँचाई थीं, शिनन्यांग हर बार भरपूर देती थी। माँ का नाम सुनकर उसने अनायास चटनी की तश्तरी पास खिसका दी। आदमी ने थोड़ा चखा और सचमुच कहा कि पुराना स्वाद खोया नहीं है।
माल की बात चली तब उसे समझ आया कि पुराना स्वाद बचा रहने से माल बिक ही जाए, ऐसा नहीं था। हेंगशंग को सिरका, सॉस और आलूबुखारे, तीनों चाहिए थे। हर चीज़ की मात्रा बाकी दो दुकानों से कम थी, फिर भी हर एक के लिए अलग मर्तबान धोकर भरना पड़ता। उसने कहा कि नाव और सफ़र एक ही हैं, फिर हर चीज़ की मज़दूरी अलग क्यों जोड़ी जाए। उसने कहा कि मर्तबानों के आकार अलग हैं, अलग-अलग भरने में लगने वाले वक़्त को एक करछी भर देने के बराबर नहीं गिना जा सकता। मज़दूरी का नाम सुनते ही वह हँसा और बोला कि कौन-सा कारोबार है जिसमें वक़्त नहीं लगता। अगर इसका भी अलग पैसा लगे तो क्या चाय की दुकान आग जलाने के पैसे भी लेगी।
याओ ज्या ने काग़ज़ पर हाथ रखा और उस मज़ाक का जवाब नहीं दिया। ख़रीद का इंतज़ाम करने वाले सुन ने जल्दी से दोनों के लिए पानी डाला और कहा कि वह पहले से चली आ रही एक अस्पष्ट मद को अलग करके दिखा रही है, अपनी तरफ़ से कोई नया ख़र्च नहीं जोड़ रही। हंगशंग के आदमी ने उसे देखा और कहा कि उसने कुल रकम जोड़ ली है, फिर भी पूरब की गली वाली दुकान से ज़्यादा पड़ती है। उसने एक पर्ची आगे सरकाई। उस पर कुछ अंक बड़े-बड़े लिखे थे, याओ ज्या के अंकों से ज़्यादा साफ़। उसने देखा और समझ गई कि वह सिर्फ़ कहकर दाम नहीं दबा रहा था। दाम सचमुच ऐसे ही थे।
उसने सिर उठाकर कहा कि पूरब की सड़क वाली दुकान का सिरका उसने भी चखा है। उनका सिरका ज़रा तीखा है, इस मर्तबान का स्वाद कुछ नरम है। वह आदमी फिर हँसा और बोला कि ग्राहक शोरबा पीते हैं, कोई प्याली भर सिरका लेकर धीरे-धीरे उसका स्वाद नहीं लेता। ज़रा-सा फ़र्क किसी की तबीयत तो नहीं बिगाड़ देगा। सोंगहे के ख़रीद प्रभारी ने सुना तो सुइयों की अपनी पुड़िया दबाए सिर झुकाए रहा। उसने याओ च्या के पक्ष में कुछ नहीं कहा। ख़रीद प्रभारी लुओ ने फिर एक घूँट चखा और तब भी जवाब देने की जल्दी नहीं की। याओ च्या को अचानक लगा कि अभी-अभी उसके भीतर जो ज़रा-सी रोशनी थी वह बहुत कुछ बिखर गई है। सामने रखा हर कटोरा जैसे किसी और चीज़ से भरे जाने की बाट जोह रहा था।
उसे याद आया कि माँ जब साग-सब्ज़ी पहुँचाने जाती थी, तो कपड़े से मर्तबान को मुँह से तली तक पोंछती थी। घर आकर ही आह भरती कि इस बार फिर बहुत भागदौड़ रही, और अगले दिन फिर तड़के उठ जाती। वह कहना चाहती थी कि अब हालात अलग हैं, लेकिन कहती तो लगता जैसे काउंटर के सामने खड़े उस व्यक्ति को दोष दे रही हो जिसे पूरी पुरानी बात मालूम ही नहीं। आख़िर उसने बस अपने लिखे मेहनताने की पंक्ति दिखाकर कहा कि तीनों चीज़ें चाहिए तो इस बार इतना ही लगेगा, इसमें कटौती नहीं होगी। एक ही स्वाद चाहिए तो एक मर्तबान कम बाँटना पड़ेगा, उतना वक़्त बचेगा और एक मर्तबान की ज़मानत भी।
हंगशंग का आदमी फ़ौरन नहीं उठा। उसने उलटे काग़ज़ को एक बार तह किया और फिर पूछा कि आगे से हर महीने पक्का ऑर्डर दे तो क्या भाड़ा भी उसी दाम में शामिल होगा? उसने पूछा, कितना माल? उसने जो मात्रा बताई वह उसकी मौजूदा क्षमता से ज़्यादा थी। उसके मन में बात बैठने लगी। उँगली काउंटर की धार पर फेरते हुए वह लगभग कह बैठी कि इस पर फिर बात हो सकती है। मगर पीछे के आँगन की आधे से ज़्यादा ख़ाली जगह बारह छोटे मर्तबानों ने घेर रखी थी, छत की मरम्मत बाकी थी और पुरानी साझेदारी की कुछ मर्तबान सब्ज़ियाँ अब भी रखी थीं। सिर्फ़ ‘हर महीने’ सुनकर वह रसोई का सारा होने वाला काम पहले से किसी को नहीं दे सकती थी।
उसने कहा कि आज हामी नहीं भर सकती। हंगशंग के आदमी ने आख़िर मेज़ पर हथेली की हल्की थपकी दी। थपकी तेज़ नहीं थी, मगर एक छोटी तश्तरी खनक उठी। उसने कहा कि अगर एक बार के सौदे में रियायत नहीं देतीं और लंबे समय का बड़ा माल भी नहीं लेतीं तो बात मुश्किल है। याओ ज्या ने तश्तरी की ओर देखा। उसका चेहरा गरम हुआ, जैसे उसने सचमुच दोनों रास्ते बंद कर दिए हों। उसने फिर कहा कि शिन न्यांग थीं तो बात करना कहीं आसान था। यहाँ तक आते ही ख़रीद का इंतज़ाम करने वाले सुन ने पहले मुँह खोला और पूछा कि अगर ऐसा है तो क्या आज बाकी दुकानों की बात करें, पीछे इंतज़ार कर रहे लोगों का वक़्त और न लें।
याओ ज्या ने माँ को भी मेज़ पर बहस के लिए नहीं छोड़ दिया। उसने हंगशंग की छोटी पर्ची वापस सरका दी, आलूबुखारों की तश्तरी रहने दी और उससे खाकर जाने को कहा। आने वाले ने पहले हाथ हिलाकर मना किया, फिर दरवाज़े पर पहुँचकर एक उठा लिया। बोला कि स्वाद अच्छा है, बस इस ढुलाई के लायक़ नहीं। आलूबुखारा मुँह में रखकर बाहर गया। याओ ज्या ने सुना कि वह गली के मुहाने पर किसी से कह रहा था, कहीं और पूछते हैं। उसने अपनी आवाज़ उससे छिपाई भी नहीं। उसका हाथ अब भी कागज़ पर दबा था। क़दमों की आवाज़ कुएँ वाली गली से आगे निकल गई, तब पता चला कि दबाई हुई जगह पसीने से पूरी भीग गई है।
बाक़ी दो दुकानों ने भी फ़ौरन बात पक्की नहीं की। ख़रीद प्रबंधक लुओ ने टोपी उतारकर रखी और कहा कि जब सब साफ़ कर ही रहे हैं तो उनका हिसाब भी एक-एक मद करके पूरा कर लें। दोनों दुकानें पके सिरके के छह-छह छोटे मर्तबान आज़माएँगी। हर मर्तबान दस जिन का, कुल बारह मर्तबानों में एक सौ बीस जिन। बारह वेन प्रति जिन, कुल एक हज़ार चार सौ चालीस। बर्तन साफ़ करने, अलग-अलग भरने और बाँधने की मज़दूरी अड़तालीस। युएपू तक नाव का भाड़ा और ढुलाई बहत्तर। बारह ख़ाली मर्तबानों की ज़मानत एक सौ बीस, वापसी योग्य रकम अलग दर्ज होगी। याओ ज्या ने अपने मिलाए हुए आँकड़े पढ़े। आख़िर तक पहुँचते-पहुँचते उसकी आवाज़ शुरू जैसी स्थिर नहीं रही।
ख़रीद प्रभारी सुन ने काग़ज़ पर एक बार हिसाब लगाया और कहा कि दोनों दुकानों के आठ सौ चालीस वेन प्रति दुकान हुए। सोंगहे के आदमी ने पूछा कि एक सौ बीस वेन ज़मानत में दिए तो क्या गए समझें। याओ च्या ने झट से बर्तनों की ज़मानत वाली पंक्ति के चारों ओर फिर घेरा खींचा। कहा कि बर्तन सही-सलामत लौटेंगे तो पैसे वापस मिलेंगे। इसे उसके सिरके की बिक्री का मुनाफ़ा नहीं गिन सकते। ख़रीद प्रभारी लुओ ने पूछा कि रास्ते में एक मर्तबान टूट गया तो आख़िर भरपाई कौन करेगा। उसने कहा कि ढुलाई वाले से साफ़ पूछकर ही लिखने की हिम्मत करेगी। आज पहले माल की बात कर लें। अगर भाड़ा बदला तो पेशगी लेने से पहले उन्हें बता देगी।
“हमें चौथे महीने की तीस तारीख़ को माल चाहिए।” ख़रीद के प्रभारी लुओ ने कहा, “पाँचवें महीने की शुरुआत में दावतें बढ़ेंगी। दो दिन पहले आज़माएँगे, तभी पता चलेगा कि आगे भी ले सकते हैं या नहीं। वरना पहली बार की आज़माइश का वह मौक़ा बीत गया तो फिर किसी को जल्दी नहीं रहेगी।”
उसने तारीख़ लिख ली, पक्का वादा नहीं किया। सोंगह ने भी तारीख़ मान ली। उनकी तरफ़ से यह भी कहा गया कि तीस के बाद दुकान के रसोइयों की बारी-बारी छुट्टी है, उनके लिए एक-एक मर्तबान चखने वाला कोई नहीं होगा। याओ ज्या समझ गई कि कोई दुकान जान-बूझकर मुश्किल खड़ी नहीं कर रही थी। हर रसोई का अपना तय क्रम था। उसने कहा कि परसों जवाब देगी। समय पर पहुँचा सकेगी तभी हर दुकान से चार सौ बीस वेन पेशगी लेगी। पहले बात होगी, फिर पैसा। दोनों ने आपस में थोड़ी बात की और कहा कि ठीक है।
ग्राहक उठे तो सोंगह के ख़रीद प्रभारी की गोद से सुइयों की पुड़िया अचानक गिर पड़ी। काग़ज़ के कोने से कई लंबी सुइयाँ निकलकर देहरी पर जा गिरीं। उसका चेहरा एकदम बदल गया। याओ जिया ने झट सबको पैर रोकने को कहा और उकड़ूँ बैठकर ढूँढ़ने लगी। अभी तक काउंटर भर में मोलभाव कर रहे सारे लोग अब इंच भर की देहरी के चारों ओर थे। ख़रीद प्रभारी लुओ ने टोपी उठाकर धूप रोकी और ख़रीददार सुन ने जूते का तलवा पलटकर देखा। हर मिली सुई काग़ज़ पर रखी गई। जब सारी इकट्ठी हो गईं, तब सोंगह के आदमी ने लंबी साँस छोड़ी। बोला, मेरी बेटी को सबसे ज़्यादा डर रहता है कि मैं हर बार उसके लिए बेकार की चीज़ उठा लाऊँगा। इस बार बड़ी मुश्किल से ठीक वही ख़रीदा था जो उसने कहा था।
याओ ज्या ने सुइयों की पुड़िया सूखे काग़ज़ की एक और परत में लपेट दी। उस ज़रा-से काग़ज़ के पैसे नहीं लिए और उसे ऐसा भी नहीं लगा कि अभी-अभी किया सारा हिसाब बेकार था। लोगों के दूर जाने पर वह कटोरियाँ आँगन में ले गई और एक साँस में कई धो डालीं। पानी ठंडा नहीं था, मगर उँगली के बग़ल की दरार में सिरके का दाग़ छूते ही दर्द हुआ। उसने सोचा कि अगर हंगशंग को बस कुछ वेन पर आपत्ति थी, तो कहीं उसने मज़दूरी की मद इतनी उभारकर लिखने में जल्दी तो नहीं की। फिर सोचा कि उसे सचमुच मिटा दिया तो आगे हर बार उसी जगह से बात नए सिरे से उठानी पड़ेगी। पानी के नीचे उसकी मुट्ठी और कसती गई।
शाम को लू यान आया तो उसने याओ ज्या को एक ख़ाली मटका थामे बार-बार भीतर झाँकते देखा। पूछा कि क्या वह चूता है। उसने कहा नहीं, वह बस ठीक से देखना चाहती है कि उसमें कितना समा सकता है, ताकि इतनी देर बात करने पर सिर्फ़ पैसों की आवाज़ न सुनाई दे। वह उकड़ूँ बैठा और दूसरी ओर से मटके के मुँह में झाँका। भीतर की अँधेरी दीवार पर दोनों के चेहरे आगे-पीछे झलके। कोई भी दूसरे का पूरा चेहरा नहीं देख पाया। लू यान ने अचानक कहा कि मटके के हत्थे इंसान की नाक जैसे हैं। याओ ज्या ठिठकी और सिर झुकाकर देखा। वाक़ई दाएँ-बाएँ दो हत्थे थे, एक ऊँचा और दूसरा नीचा, इतने बेतरतीब कि जैसे पूरी संजीदगी से उन्हें बदसूरत बनाया गया हो।
वह ज़रा-सा हँसी, मगर आँखें गरम हो आईं। उसने जल्दी से मर्तबान टिकाकर रखा। उसने नहीं पूछा कि वह उदास क्यों है। इंतज़ार किया, जब तक उसने ख़ुद नहीं कहा कि तीन में से सिर्फ़ दो दुकानों से बात बनी है और उनके लिए भी अभी नाव की पूछताछ बाक़ी है। उसने कहा, जानती है कि मेहनत की क़ीमत होती है, मगर जब लोग कहते हैं कि उसकी माँ से बात मनवाना आसान था, तो उसे लगता है जैसे उसने माँ के साथ कुछ ग़लत किया हो। लू येन पत्थर की मुंडेर पर बैठ गया। बोला, पहले उसकी माँ को उसका बाँस का घोड़ा कमज़ोर लगता था, और ऐसा भी नहीं कि उन्होंने कभी किसी को नाराज़ होते न देखा हो। याओ ज्या को घोड़े का वह आधा टेढ़ा सिर याद आया। आख़िर उसकी हँसी इस बार कुछ ज़्यादा देर टिकी।
उसने दोनों दुकानों की पर्चियाँ उसे दीं और पूछा कि माल महीने के आख़िर तक पहुँच सकेगा क्या। अगर नहीं, तो जान-पहचान की वजह से हाँ मत करना। लू येन ने तीस तारीख़ वाली पंक्ति देखी, फिर बारह छोटे मर्तबानों पर नज़र डाली। सोचा कि गोदाम में बाँस के पत्तों के गट्ठर बड़े ज़रूर हैं, मगर हल्के हैं, इस थोड़े-से सिरके के लिए जगह होनी चाहिए। उसने ‘होनी चाहिए’ मन में दबा लिया और कहा कि कल फ़ेइ शाओ से पूछेगा। नाव का भाड़ा फर्म के असल हिसाब से होगा, राह एक होने का मतलब यह नहीं कि भाड़ा नहीं लगेगा। उसने हामी भरी और काग़ज़ उसके हाथ की ओर फिर बढ़ाए। उसने लेकर तारीख़ के पास उँगली रखी। उसे अब भी लगता था कि बस नाव में माल ठीक से जमा दे तो आज जिस दुकान से बात नहीं बनी, उसकी अहमियत कुछ कम लगने लगेगी।
· अध्याय समाप्त ·
यह पुस्तक AI की सहायता से रचित मौलिक कृति है, जिसका विस्तार ली बाई की 《长干行二首》 (छांगगान के दो गीत) और इस वेबसाइट की मूल लघुकथा 《青梅旧账》 (कच्चे मेह फलों के दिनों का पुराना हिसाब) से किया गया है। पात्र, व्यापारिक प्रतिष्ठान, मूल्य, भूगोल और कालगणना सभी काल्पनिक हैं; इसमें पुराने ऋणों का पूरा हिसाब साफ़ करना, हुनर और श्रम को फिर से पहचान मिलना, तथा वयस्क होने पर संबंधों की शर्तें नए सिरे से तय करना जैसे मूल रचना के केंद्रीय तत्व सुरक्षित रखे गए हैं। यह कवि की जीवनी नहीं है।
टिप्पणी अनुभाग
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं…
कुछ कहना चाहते हैं?टिप्पणी में भाग लेने के लिए लॉग इन करें →