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हाथ में एक ग्रंथ

प्राचीन परिवेश में व्यापारिक मार्गों और पुनर्मिलन पर दीर्घ उपन्यास

एक चम्मच ज़रूरत से ज़्यादा मीठा

कू वूजी · AI सृजन · 7853 अक्षर · लगभग 11 मिनट

अभी पूरी तरह उजाला नहीं हुआ था कि याओ जिया ने गली के पार दरवाज़े की आवाज़ सुनी। लू यान ख़ाली बाल्टी लिए निकला। कुएँ के पास जाकर पहले हाथ पर कपड़ा लपेटा, फिर रस्सी छोड़ी। उसे डर था कि आज वह कोई बहाना ढूँढ़कर नहीं आएगा। उसे सच में उठा देखकर लगा कि इतनी सुबह से बाहर देखना मानो उसी का इंतज़ार करना हो। उसने कुएँ की जगत से सिर उठाया तो याओ जिया के पास हाथ की राख वाली खुरपी उठाने के सिवा कोई चारा नहीं सूझा। चूल्हे वाले कमरे की ओर इशारा करके पूछा, कल धुआँ कमरे के भीतर तो नहीं आया?

उसने कहा, देख लिया, उधार की देग अभी थोड़ा रिसती है, पानी उबालते नीचे हमेशा आवाज़ आती है। याओ ज्या जानती थी, वह फेई शाओ का गोदाम से निकाला पुराना बर्तन है। बोली, नीचे की नम राख बजती है, पानी कम नहीं। वह कुएँ के उस ओर ध्यान से सुनता रहा, जैसे यह भी मालसूची की न छूटने वाली मद हो। उसे बचपन में सुगंधित चीनी महानीम और दुर्गंध वाले ऐलैंथस का अंतर सिखाना याद आया; हर पत्ता सूँघकर भी आखिर गलत करता। मुसकराहट उभरने लगी तो सिर झुकाकर राख का फावड़ा दरवाज़े से झाड़ा।

सुबह के खाने के लिए उसने आधा कटोरा बाजरे की लपसी ज़्यादा पकाई। लू यान आया तो अपने साथ दो सिके हुए कुलचे लाया। फ़ेइ शाओ ने कल कहा था कि खाना मिलने की बात तय हो, तब भी ख़ाली हाथ नहीं जाना चाहिए। मगर वह अपने घर के कुलचों से भी सूखे कुलचे उठा लाया था और दरवाज़े पर तोड़ते ही ढेर सारे चूरे बिखर गए। याओ ज्या ने उसे एक तश्तरी दी तो उसने चूरा समेटकर अपनी लपसी में डाल लिया। उसने देखा कि कटोरे की लपसी बड़ी तेज़ी से सोखी जा रही है। कहना चाहा कि थोड़ा कम डालो, पर तब तक वह कटोरा उठा चुका था। वह चुप रही और ख़ुद कुलचे का दूसरा आधा लेकर लपसी में धीरे-धीरे नरम करने लगी।

दोनों कल कुछ छोटे खाते ढूँढ़ चुके थे। जिन काग़ज़ों की जाँच बाकी थी, उनके कोने पर उसने छोटी-सी तह लगा दी। बिना तह वाले अलग रखे। जहाँ उसकी माँ की लिखावट में एक पंक्ति आधी दूसरी पर चढ़ती थी, वहाँ दीया तिरछा करके देखना पड़ता था। याओ जिया ने सबसे रोशन जगह बही के लिए छोड़ दी और ख़ुद बग़ल में बाँस की सींकें छीलने लगी। बोली, बाकी में कुछ बातें शायद उन्हीं लोगों को पता होंगी जिनका लेन-देन था। जो पढ़े न जाएँ, उन्हें छोड़ दो, हर हाल में जोड़कर एक वाक्य बनाने की ज़रूरत नहीं। उसने सिर हिलाया और उस खाते पर फिर घेरा बनाया जिसकी शुरुआत का वह अंदाज़ा लगा चुका था।

सुबह के छन पहर के आख़िर में चेन, दुकान का कर्मचारी, फिर पूरब की ओर से आया। इस बार नूडल नहीं लाया। डर था मालिक फिर कहेगा कि आने में देर लगाई। बस एक साफ़ छोटी कटोरी लेकर आया, पुराने सिरके का एक छोटा चम्मच और थोड़ी चीनी उधार माँगी। काउंटर पर याओ ज्या का इंतज़ार करते हुए वह बार-बार कटोरी का तला सहलाता रहा। उसने कहा कि मालिक ने कल चखा था और सिरके का स्वाद वाक़ई भरपूर था। अगर थोड़ा हल्का घोल अलग से बन सके तो कल कुछ लोग नूडल चखने आएँगे, उनके लिए ले जाकर आज़माना चाहता है।

“तुम्हारे यहाँ रसोइया जब मिलाना जानता ही है, तो ले जाकर ख़ुद मिला ले।” याओ ज्या ने कहा।

मुंशी छन का चेहरा लाल हो गया। उसने कहा कि मालिक ने बस पूछने को कहा था, उनकी मर्ज़ी न हो तो रहने दें। उसने कटोरा पीछे खींच लिया और आते समय से भी सिमटा हुआ लगा। याओ ज्या को अपनी आवाज़ की सख़्ती सुनाई दी। उसने बाँस की सलाइयाँ रख दीं और कहा कि बात मर्ज़ी की नहीं है। इतना अच्छा पका सिरका बेवजह फीका कर दिया तो आगे लोग समझेंगे कि याओ परिवार का हर नया मर्तबान पिछले से ख़राब है। मुंशी ने मुँह खोला, फिर बंद कर लिया। आख़िर बोला कि नूडल्स खाने वाले शायद यह भी न पहचानें कि सिरका किसके यहाँ का है। वे बस कहेंगे कि पसंद आया या नहीं।

यह बात उसे अच्छी नहीं लगी। दो दिन पहले तक वह दुकान का पूरा नाम भी नहीं बता पाता था, और अब मानो नूडल्स खाने वाले सभी लोगों की ओर से उसके दरवाज़े के भीतर आ खड़ा हुआ था। लू येन ने हिसाब से नज़र उठाई। उसे इसका आभास हुआ, तो उसने स्वर और सम रखकर एक उथली तश्तरी निकाली और कर्मचारी से चखने को कहा। चीनी डालते समय उसका हाथ कुछ भारी पड़ गया। गहरे सिरके में गिरी वह सफ़ेदी तुरंत घुली नहीं, महीन राख की परत जैसी लगी।

कर्मचारी छेन ने चखा, पहले होंठ चाटे और कहा कि बहुत मीठा है। याओ च्या ने भी चखा। खटास थी, मगर मिठास ने पहले ही जीभ पर परत चढ़ा दी और पके सिरके की खुशबू पीछे छिप गई। दोनों का मेल ज़रा भी ठीक नहीं था। उसे कुछ झुँझलाहट हुई। उस कटोरे के नूडल्स पर, इस चम्मच भर चीनी पर, और खुद पर भी कि जिस चीज़ को पहले कभी नहीं आज़माया, उसे लोगों के सामने आज़माने की क्या ज़रूरत थी। उसने तश्तरी वापस खींच ली और कहा कि इसीलिए मनमाने ढंग से कुछ नहीं डाल सकते। बिगाड़ना आसान है, अच्छा बनाने में वक़्त लगता है।

कर्मचारी ने फिर आग्रह नहीं किया। कल जैसा दो वेन का सिरका लिया और साथ लाए छोटे कटोरे को ढक दिया। जाते हुए बोला कि मालिक कल पास में बाँस की कोंपलें खरीदने आएगा, शायद रास्ते में यहाँ भी आ जाए। मेहरबानी करके थोड़ा अलग नमूना रख दीजिए, ज़्यादा नहीं चाहिए। उसने न रखने की बात कही, न मना किया। जब वह दरवाज़े से निकल गया, तभी उसने ज़रूरत से ज़्यादा मीठे सिरके की तश्तरी सबसे दूर रखी। लू येन की कलम हवा में रुकी देखी तो पूछा कि क्या उसे भी मीठा लगता है।

लू येन चौंका, जैसे उसने सोचा ही न हो कि सवाल उसके कटोरे में आ गिरेगा। उसने कहा कि अभी चखा नहीं था। याओ ज्या ने तश्तरी आगे कर दी। उसने बाँस की तीली से ज़रा-सा लिया और बड़ी सावधानी से चखा, फिर दूसरी बार भी तीली डुबोई। उसकी भौंहें देखकर याओ ज्या ने कहा कि अच्छा नहीं है तो कह दो, मैं इतनी नाज़ुक नहीं कि सुन न सकूँ। आखिर वह हँसा और बोला कि नदी पर कभी खरीदी एक मिठाई जैसी है। पहले मीठी, फिर अचानक इतनी खट्टी कि दाँतों की जड़ें कस जाएँ। मगर वह मिठाई अलग से खाई जाती है, नूडल में नहीं डाली जाती।

वह हँस पड़ी और फ़ौरन हँसी रोक ली। लू यान ने बाँस की तीली रख दी। किसकी बात सही थी, इसका फ़ैसला उसकी ओर से किए बिना वह फिर उस पंक्ति को ढूँढ़ने लगा जहाँ रुका था। उसे याद आया कि बचपन में दोनों ने चोरी से मिठाई ख़रीदी थी और माँ ने देख लिया था। माँ ने डाँटा नहीं, बस कहा कि मुँह में मिठाई रखकर बोलो। दोनों बच्चों की बात में एक शब्द साफ़ नहीं निकला और सबसे ज़ोर से माँ ख़ुद हँसी थीं। अब पास रखी मीठे सिरके की छोटी-सी तश्तरी उसे उनकी याद किसी के मँजे हुए स्वाद की तारीफ़ करने से कहीं ज़्यादा दिला रही थी।

दोपहर से पहले बढ़ई ह पीछे के दरवाज़े से आया और सीढ़ी लगाकर छत देखने चढ़ा। याओ ज्या ने सीढ़ी का पाया पकड़ा। ऊपर उसके कुछ खुरचने की आवाज़ आई और मिट्टी के टुकड़े गिरे तो उसने झट मुँह फेर लिया। लू यान हाथ बँटाने बढ़ ही रहा था कि बढ़ई ह ने छज्जे से याओ ज्या को पुकारकर पूरब की ओर वाली पुरानी लकड़ी देखने को कहा। वही जगह थी जो उसने कल लू यान को दिखाई थी। धरन अब भी मज़बूत थी, बगल का हिस्सा ख़राब था, पूरी धरन बदलने की ज़रूरत नहीं थी। उसने यह सब जल्दी-जल्दी कहा, मगर जब याओ ज्या ने पूछा कि कितने दिन लगेंगे, तो रुककर बोला कि यह इस पर है कि वह भीतर के मर्तबान किस दिन हटाने को तैयार होगी।

उसके मुँह से पहली बात निकली कि मर्तबान यूँ ही इधर-उधर नहीं किए जा सकते। कहते ही समझ गई कि उसने फिर पहले सामान की हिफ़ाज़त की। बढ़ई हे ने सीढ़ी पर से कुछ नहीं कहा। हाथ की पतली छड़ी से टेढ़ी खपरैल को खटखटाया। मतलब साफ़ था, खपरैल भी हमेशा टेढ़ी नहीं रह सकती। याओ च्या ने होंठ काटा और बात बदली। कहा कि कल दोपहर पहले देखेगी किन मर्तबानों को हटा सकती है, सबसे पुराने वाले को अभी नहीं छुएगी। उनकी जगहें बताते हुए उसके स्वर में अब भी थोड़ी ज़िद थी। बढ़ई हे ने दबाव नहीं डाला। नीचे उतरकर तलवों का कीचड़ खुरचा और कहा कि उसे भी पहले उत्तरी सड़क का काम पूरा करना है।

बढ़ई के जाने के बाद लू येन ने लकड़ी की एक फाँक उठाई जो लुढ़ककर काउंटर के नीचे चली गई थी। पूछा कि क्या उसे रखना है। उसने और लोगों की तरह यह नहीं कहा कि अब घर में मर्द है तो इन बातों की फ़िक्र उसे नहीं करनी। उसने कहा कि रख दो, खिड़की के कोने में फँसाने के काम आएगी। लू येन ने उसके बताए स्थान पर फाँक रखी। उसकी कलाई खिड़की के पल्ले से लगी और खिड़की के काग़ज़ पर जमी धूल झरने लगी। वह समय पर हट नहीं सका और नाक की नोक धूल से भर गई। याओ ज्या ने गीला कपड़ा दिया। उसे खिड़की से पहले चेहरा पोंछते देख उसके मन में शरारत सूझी। दूसरी तरफ़ इशारा करके कहा, अभी वहाँ भी है, और जब उसने फिर पोंछा तब बोली, झूठ कहा था।

उसने उसकी ओर देखा, पर वह हाथ धोने के लिए मुड़ चुकी थी। पिछवाड़े में धूप गरम थी, पानी पर अनार का एक पत्ता तैर रहा था। उसने पत्ते को सरकाकर हौद के किनारे कर दिया और अचानक लगा कि आज की पूरी सुबह कल से छोटी थी। उसने सोचा था कि अठारह वेन देकर वह बेफिक्री से हिसाब के सारे काग़ज़ लू येन को सौंप सकेगी और खुद बस अपना काम करेगी। मगर जब वह यहाँ बैठा होता, तो वह ध्यान देती कि वह कब कलम रोकता है, कब पानी पीता है, और सुनती कि ग्राहकों से बात करते समय वाक्य के आखिर में उसकी आवाज़ लड़कपन के दिनों से कितनी गहरी हो गई है। इन सबका हिसाब अठारह वेन में कैसे होता।

गाओ ज्यांग दोपहर बाद बाँस की नई कोंपलों की छोटी टोकरी लाई। बस कुछ ही थीं। बोली, रिश्तेदारों ने बाँटी हैं। घर में मुलायम सिरे खाएँगे, मोटी वाली तुम्हारे लिए हैं। याओ ज्या ने टोकरी ली तो तले में मिट्टी लगी जड़ का एक छोटा टुकड़ा भी था। गाओ ज्यांग ने देखा तो झट उसे निकालने को हाथ बढ़ाया और कहा कि इसे जानबूझकर एक पूरी कोंपल में नहीं गिना है। याओ ज्या ने हँसकर रोका। बोली, चूल्हे के मुँह पर टेक देने को रहने दो, तुम्हें रास्ते भर फिर नहीं ढोना पड़ेगा। दोनों में थोड़ी खींचतान हुई और मिट्टी लगी जड़ आख़िर याओ के घर ही रही। गाओ ज्यांग ने वहीं कोई नया काम नहीं उठा लिया। बोली कि श्याओ गेंग को दोपहर बाद किसी को घास की टिड्डी बुनते देखना है। वादा किया है तो जाना पड़ेगा।

याओ च्या ने उसके जाने की बाट देखी, फिर बाँस की कोंपल छीली। अंदर का सफ़ेद हिस्सा लगभग पारदर्शी था, नोक पर ज़रा-सा कोमल पीलापन था। उसने पतली फाँकें काटकर अपने छोटे कटोरे में रखीं और कल वाले मर्तबान से पका सिरका करछी में लिया। हाथ आधे रास्ते में ही रुक गया। उसे पता था कि अचार में रखी सर्दियों की बाँस की कोंपलों के साथ क्या मिलाना है और चिकने शोरबे का स्वाद मुँह में भारी न पड़े, इसके लिए क्या करना है। मगर सामने की इस फाँक में अभी साफ़ पानी जैसी ताज़गी थी। अचानक उसे सूझा ही नहीं कि थोड़ा कम सिरका डालने के सिवा और क्या आज़माने को उसका मन होगा।

सामने के काउंटर से लू येन के अंक पढ़ने की आवाज़ आई। वह सब्ज़ी के एक पुराने हिसाब के बारे में पूछ रहा था, जिसके आगे 辛 लिखा था। क्या इसका मतलब था कि पैसे रुआन शिन ने लिए थे, या यह कि सब्ज़ी रुआन शिन ने बनाई थी। उसने कहा कि वह खुद देखकर बताएगी, मगर पहले बाँस की वह फाँक खा ली। सिरके की खुशबू अच्छी थी, पर बाँस की ताज़गी केवल पहला कौर काटते समय महसूस हुई। उसके बाद वही जानी-पहचानी खटास थी। उसने बिना सिरके की एक और फाँक उठाई और धीरे-धीरे अंत तक चबाई। तब जाकर जीभ की जड़ में हल्की मिठास उभरी, जैसे किसी ने बहुत दूर खड़े होकर धीमे से एक बार पुकारा हो।

उसने दोनों कटोरे पास-पास रख दिए, किसी को भी नहीं उड़ेला। बही की उस मद में लिखे ‘辛’ का मतलब समझाने पर लू यान ने किनारे पर छोटे अक्षरों में कुछ लिखा और कहा कि दूसरे लोगों की मदें भी इसी तरह लिखी हैं, हर एक से जाकर पूछना होगा। याओ ज्या ने माँ के नाम को देखा। अचानक लगा कि सुबह के मुक़ाबले वह नाम कितना लंबा हो गया है। वह उसकी पीठ सीधी कर सकता था और बग़ल में बढ़ता उसका पाँव भी रोक सकता था। उसने वह ज़रूरत से ज़्यादा मीठा नमूना पीछे रसोई में रखकर छोटे कटोरे से ढक दिया। अगर कल मुंशी छन का मालिक सचमुच आया तो कम से कम उसके सामने हड़बड़ी में वह एक चम्मच नहीं भरना पड़ेगा।

· अध्याय समाप्त ·

यह पुस्तक AI की सहायता से रचित मौलिक कृति है, जिसका विस्तार ली बाई की 《长干行二首》 (छांगगान के दो गीत) और इस वेबसाइट की मूल लघुकथा 《青梅旧账》 (कच्चे मेह फलों के दिनों का पुराना हिसाब) से किया गया है। पात्र, व्यापारिक प्रतिष्ठान, मूल्य, भूगोल और कालगणना सभी काल्पनिक हैं; इसमें पुराने ऋणों का पूरा हिसाब साफ़ करना, हुनर और श्रम को फिर से पहचान मिलना, तथा वयस्क होने पर संबंधों की शर्तें नए सिरे से तय करना जैसे मूल रचना के केंद्रीय तत्व सुरक्षित रखे गए हैं। यह कवि की जीवनी नहीं है।

इस पुस्तक की विषयसूची · 38 अध्याय
  1. आस्तीन में हरे आलूबुखारे
  2. मर्तबान के मुँह से उठती भाप
  3. बस एक सौ साठ लिए
  4. एक चम्मच ज़रूरत से ज़्यादा मीठा
  5. 竹马旁的墨点
  6. आलूबुखारे पहले नरम पड़ गए
  7. 回船的日子
  8. एक दुकान से सौदा नहीं बना
  9. 一只等凉的碗
  10. ज़बान को याद नहीं रहता
  11. वह खाना जिसमें जगह कम पड़ी
  12. नाव के दो करार
  13. पत्ते जो पहले किनारे रख दिए गए
  14. 没有问的那句
  15. नदी पर जगह नहीं है
  16. गर्मियों के नूडल के लिए स्वाद बहुत तेज़ है
  17. पिता अब भी मेज़ के पास हैं
  18. 叶子在日头下
  19. 把那一夜说全
  20. 瓦巷里的午饭
  21. पूरा हिसाब चुकाने से पहले
  22. 账里少了谁
  23. धारा के विरुद्ध तीन दिन
  24. ये ग्यारह साल ख़ाली नहीं थे
  25. एक-एक गठरी लौटाना
  26. 一小碟淡些的
  27. माँ के तीन दिन
  28. 等不来的酸味
  29. 你回来时
  30. 不照少年时
  31. पहले और बाद में जाने वाली नावें
  32. 一碟不卖的梅
  33. दीपक पानी के नीचे उतरता है
  34. धारा के साथ दो दिन
  35. 在他的岸上
  36. वह गली जिसे वह ख़ुद देखना चाहती थी
  37. एक रहने लायक़ कमरा
  38. 新页还有空

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