प्राचीन परिवेश में व्यापारिक मार्गों और पुनर्मिलन पर दीर्घ उपन्यास
बस एक सौ साठ लिए
कू वूजी · AI सृजन · 8362 अक्षर · लगभग 11 मिनट
जब लू यान पैसे उठाकर काउंटर पर रख रहा था, याओ जिया मर्तबान के ढक्कन के नीचे से बाँस की एक पतली खपच्ची निकाल रही थी। कपड़े की पोटली उसके अंदाज़े से ज़्यादा आवाज़ के साथ गिरी। भीतर के सारे सिक्के एक साथ नीचे की ओर धँसे और काउंटर पर रखी बाँस की चम्मच उछल गई। उसने झट हाथ बढ़ाकर चम्मच थामी। याओ जिया तब तक ढक्कन जमा चुकी थी। उसने मुड़कर पूछा, ये सारे पैसे यहीं देने के लिए लाए हो?
“हरे आलूबुखारों के पैसे।” उसने कहा, “और इतने बरसों में जितना ऊपर से जुड़ना चाहिए।”
सुबह उसने रस्सी फिर बाँधी थी। गिनने में दिक़्क़त न हो, इसलिए मूलधन और ब्याज अलग रखे थे। फिर लगा कि दोनों को इतना साफ़-साफ़ अलग करना दिखावे जैसा लगेगा, सो ऊपर नीले कपड़े की एक ही तह लपेटी। अब याओ ज्या ने गाँठ खोलने को हाथ बढ़ाया और पहले रस्सी का छोटा-सा सिरा हल्के से निकाल लिया। उसने तो ख़ुद लू येन से भी जल्दी खोल दिया। जब सिक्कों की दोनों लड़ियाँ उसके हाथों में खुलकर बिछीं, तो उसे उसके अंगूठे पर एक नई दरार दिखी। कहना चाहता था कि सारे गिनने की ज़रूरत नहीं, मगर बात होंठों तक आकर रुक गई। उसने उसे गिनने दिया।
आधे पैसे गिनकर उसने पूछा कि दो काँवड़ भर माल के लिए उसने कितना हिसाब लगाया है।
“एक काँवर के पाँच सौ। उस साल का भाव मुझे याद है। बाहर के ये पाँच सौ मैंने ऊपर से जोड़े हैं, तुम्हारे घर से किसी ने नहीं माँगे।” उसने इतनी जल्दी सफ़ाई दी, मानो डर हो कि अपनी मर्ज़ी से जो ज़्यादा दे रहा है, उसे वह कुछ और समझ लेगी। याओ ज्या ने उसकी ओर देखा, हल्के से ‘ओह’ कहा, ब्याज के सिक्कों की लड़ी एक तरफ़ रखी और काउंटर से एक पुराना काग़ज़ निकाला, जिस पर तह के ऊपर तह पड़ी थी।
काग़ज़ में कुछ चौकोर छेद थे, उन दिनों के निशान जब उसे बही में सिल दिया गया था। उसने उसे उलटा रखकर हाथ से समतल किया, तब पलटकर उसे दिखाया। लू येन की नज़र सबसे पहले पिता के कुलनाम पर पड़ी। आगे लिखा था, दो काँवर आलूबुखारे। थोड़ा किनारे पर देखा तो एक और अक्षर दिखा, ‘退’ यानी वापसी। उसने काग़ज़ पास खींचा। अक्षर की लकीरें इतनी महीन थीं कि वह उस साल की माल-पर्ची जैसी नहीं लगती थी। मानो बस एक बार और देखने पर वह अक्षर किसी और बात से जा जुड़ेगा।
“दूसरी काँवर नाव छूटने से पहले लौट आई थी।” याओ ज्या ने कहा, “चौथे महीने की आठवीं तारीख़ को तुम्हारे पिता ने कहा कि जगह नहीं है और किसी के हाथ लौटा दी। मेरी माँ ने देखा कि टोकरी के तले में कुछ फल दबकर नरम हो गए थे, तो अच्छे वाले ख़ुद चुनकर अचार डाल दिया। वह मर्तबान नए साल पर ही खुला था। मैंने भी खाया था।”
उसे आठ तारीख़ याद थी। मेइ के फलों की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए कि वह बाहरी गोदाम में सील खाए कपड़े का एक गट्ठर ढो रहा था। नदी किनारे से पिता जल्दी करा रहे थे। उसने घर जाकर एक सूखा कपड़ा लेना चाहा, मगर रोक दिया गया। कहा गया कि इस फेरे में बहुत काम हैं, अब और इंतज़ार मत कराओ। वह सारा दिन ढोता रहा। रात में हथेलियाँ रगड़ से तप रही थीं। अगले दिन नाव पर चढ़ा तब पता चला कि कपड़े अब भी गीले हैं। मेइ के फलों के उन दो काँवर-भर बोझों के बारे में उसे बाद में बस यही याद रहा कि वे उस सारे माल के साथ छांगगान से निकल गए थे जिसका दाम पूरा नहीं चुकाया गया था।
“एक दान और है।” उसने मूल रकम की लड़ी थोड़ी-सी उसकी ओर सरकाई।
याओ ज्या ने एक और रसीद निकाली। इस बार लिखावट मोटी थी। उस पर लिखा था, लकड़ी की क़ीमत तीन सौ चालीस, और नीचे ह परिवार का निशान था। उसने वह तिरछी लकीर पहचान ली। बढ़ई ह के पिता अलमारी के कोनों में इसी तरह का काँटा उकेरते थे। उस बार लू परिवार की नाव कुछ बची-खुची लकड़ी ले गई थी। माँ ने छठे दिन उसे याओ परिवार के पीछे के छज्जे के नीचे भिजवाया था। उससे एक टपकती कड़ी की मरम्मत हुई और चूल्हे के पास की सड़ी धरन बदली गई। रसीद पर याओ परिवार की निशानी थी और हरे आलूबुखारों की बही में आठवें दिन की मद में साफ़ लिखा था कि लकड़ी के बदले तीन सौ चालीस काटे गए।
काउंटर के पीछे छज्जे के कोने से लकड़ी की एक हल्के रंग की धार बाहर निकली हुई थी। कल अंदर आने पर उसे बस सिरके की गंध आई थी, उसने ऊपर नहीं देखा था। अब याओ च्या ने ऊपर इशारा किया, तब उसे दिखा कि लकड़ी का वह टुकड़ा सचमुच दोनों तरफ़ की लकड़ी से कुछ ज़्यादा काला था, मानो बरसों की नमी वहीं ठहरी रही हो। उसे याद आया कि कपड़े समेटते हुए माँ ने याओ परिवार के लिए लकड़ी रखने की बात कही थी। उसने ‘हाँ’ कर दी थी, मगर समझा था कि जाने से पहले पड़ोसियों को कुछ बचा-खुचा सामान दिया जा रहा है।
याओ ज्या ने मूल रकम में से एक सौ साठ ताँबे के सिक्के गिने और बाकी वापस सरका दिए, साथ में ब्याज के वे पाँच सौ सिक्के भी। काउंटर पर कपड़े में एक सिलवट उठी और सिक्कों की डोरी अटक गई, तो उसने उसके लिए सिलवट भी समतल कर दी। उसने हिसाब जल्दी कर लिया था, फिर भी पूछा कि क्या वह एक बार और मिलाना चाहता है। लू येन ने सिर हिलाकर मना किया, फिर कुछ देर बाद हामी भरी, और स्वयं मन ही मन पाँच सौ में से तीन सौ चालीस दो बार घटाए।
“तुम्हारे पिता ने तुम्हें नहीं बताया?” उसने पूछा।
उसका पहला ख़याल पिता की तरफ़ से जवाब देने का था। काम ही इतने थे, फिर वे बीमार भी पड़ गए, भला ये सब कैसे याद रहता। मगर उसने वजह नहीं पूछी थी, बस पूछा था कि बताया था या नहीं। काग़ज़ पर लिखे 退, यानी ‘वापस’, को देखते हुए उसने आख़िर कहा कि नहीं बताया। कहते ही गर्दन से एक लहर-सी ऊपर उठी, सिक्के ढोते वक़्त से भी तेज़। उसने सोचा था कि आज ज़्यादा से ज़्यादा देर से कर्ज़ चुकाने की शर्म उठानी पड़ेगी। इतने ज़्यादा पैसे ले आने पर समझ नहीं आएगा कि उन्हें कहाँ रखे, इसके लिए वह तैयार नहीं था।
उसने लिए हुए पैसे एक छोटी लकड़ी की संदूकची में रखे, काउंटर की रेज़गारी में नहीं मिलाए। लू येन की निगाह संदूकची के साथ गई। उसने अचानक पूछा, “इन सालों में जब तुम लोगों पर मुश्किल पड़ी, तो बात बस इन एक सौ साठ की तो नहीं रही होगी।”
याओ ज्या का हाथ संदूकची के ढक्कन पर ठहर गया। आँगन के बाहर कोई पत्थर से एक ख़राब मिट्टी की कटोरी तोड़ रहा था। तीन-चार चोटें पड़ीं तब जाकर वह फूटी। लू यान को लगा कि वह उसकी बात पूरी होने का इंतज़ार कर रही है, इसलिए कहता गया कि पिता के कारोबार में नुक़सान होने के बाद युएपू में उन्होंने भी कठिन दिन काटे थे, पैसे की कमी का स्वाद जानते हैं। आगे याओ परिवार में बस वह और उसकी माँ रह गई थीं, उनके लिए तो और मुश्किल रहा होगा। अगर उसे लगता है कि बाक़ी पैसे ब्याज में नहीं गिने जा सकते, तो आज उसके लौटने पर उसकी ओर से एक छोटी भेंट मान ले।
“पहले ये पैसे वापस ले जाओ।” उसने कहा।
उसकी आवाज़ ऊँची नहीं थी, फिर भी उसने हाथ खींच लिया। उसने संदूकची का ढक्कन बंद किया और पहले दरवाज़े पर जाकर कटोरा कूटने वाले से पूछा कि क्या वह पुराना बर्तन लौटाने आया है। उसने कहा कि कटोरे का मुँह पहले से टूटा था, वह याओ परिवार का नहीं था। बस दीवार की जड़ में तोड़ रहा था ताकि आँगन का गड्ढा भर सके। याओ ज्या ने देखा और सड़क के बीच लुढ़के मिट्टी के कुछ टुकड़े वापस सरकाकर कहा कि नुकीले सिरे बाहर की तरफ़ मत छोड़ना। वह वहाँ उकड़ूँ बैठी थी। लू येन काउंटर के पास खड़ा था, कपड़े की पोटली खुली थी, जैसे उसे अभी तक असल जवाब नहीं मिला था।
उसके लौटने पर लू येन ने कहा कि उसका कोई और मतलब नहीं था। याओ ज्या ने कुछ देर उसे देखा और पूछा, क्या वह उससे फिर सुनना चाहता है कि ये साल कैसे बीते। उसकी आवाज़ तीखी नहीं थी, चेहरे पर कुछ थकान भी थी। मगर लू येन को तुरंत अपना अभी-अभी दिया हुआ हमदर्दी का लंबा बयान याद आया। उसकी नज़र आस्तीन के हल्के धागे पर पड़ी। कल रात तक वह पूछना चाहता था कि उसकी आस्तीन किसने रफ़ू की। अब अचानक समझ नहीं आया कि कहाँ से पूछना ठीक होगा।
“मेरी माँ जो छोड़ गईं, उसमें बस यह उधार ही बाक़ी नहीं है।” उसने दोनों काग़ज़ सँभाल लिए। “उनका शुक्रिया करना है तो पहले जो कुछ कटोरे सब्ज़ी उन्होंने तुम्हें खिलाई थी, उन्हें याद रखना काफ़ी है। इस संदूकची में कच्चे मेई हैं। दूसरी बात है, उसे इसमें मत उड़ेलो।”
लू यान ने सिर झुकाकर एक हज़ार तीन सौ चालीस वेन फिर बाँध दिए। नीला कपड़ा अब भी चौकोर था, मगर भीतर कुछ कम हो गया था और जैसे भी तह करता, वह आते समय जैसा सपाट नहीं बैठता था। रस्सी लपेटते हुए उसकी उँगलियाँ एक बार उलझीं। याओ ज्या उसे सुलझाने नहीं आई। उसने आख़िर एक ढीली गाँठ छोड़ी और पैसे वापस थैले में रख लिए। कंधा एकाएक भारी हो गया, मगर मन इतना हलका कि ज़रा घबराहट-सी हुई।
टोफू बेचने वाला एक बूढ़ा काँवर लेकर दरवाज़े पर आया और भीतर की ओर शिन न्यांग पुकारा। बोलते ही खुद ठिठक गया। याओ ज्या ने कहा, आई, पहले काँवर उतार लो। उसने झट सुधारा, कुमारी ज्या, और कहा कि बीस साल से पुकारते-पुकारते ज़बान आँखों से तेज़ हो गई है। वह हल्के से हँसी और खाली कटोरा निकाला। लू येन एक तरफ़ हो गया। उसने देखा कि बूढ़ा टोफू काटते वक्त हमेशा कोने से थोड़ा ज़्यादा दे देता है और याओ ज्या पैसे गिनते वक्त कभी कम नहीं देती। दोनों ने उस छोटे कोने का ज़िक्र नहीं किया।
वह जाने ही वाला था, मगर काउंटर के नीचे नीले कपड़े की पोटली दिखी तो पूछ बैठा कि क्या हिसाब का अभी बहुत कुछ देखना बाक़ी है। याओ ज्या के हाथ में पकड़े टोफ़ू से पानी की एक पतली धार कटोरे में गिरी। उसने कहा, पुराने हिसाब में कई तरह की लिखावट है। कौन-सी रक़म माल से चुकाई गई, किसका बस वादा हुआ, यह जानने को आगे-पीछे की लिखत मिलानी पड़ती है। छत भी सुधरवानी है और वह पूरा दिन ख़ाली नहीं कर सकती। उसने लू येन की पैसे की थैली पर नज़र डाली और जोड़ा कि वह उससे बाक़ी सारा हिसाब अपने सिर लेने को नहीं कह रही।
“मैं देखने में मदद कर सकता हूँ।” लू येन ने कहा।
बात मुँह से निकलते ही आख़िर उसे लगा कि कोई जाना-पहचाना काम हाथ आया है। अंकों का मिलान करना और पुरानी पर्चियाँ ढूँढ़ना उसे आता था। यूँ खड़े रहकर सोचने से आसान था कि क्या कहे। याओ ज्या ने पूछा कि रोज़ का क्या लोगे। वह लगभग तुरंत कहने वाला था कि कुछ नहीं चाहिए। ‘न’ ही निकला था कि उसने देखा, याओ ज्या ने टोफ़ू का कटोरा सबसे दूर की सूखी जगह पर रख दिया और बाकी बात सुनने के लिए ठहर गई। उसे नए सिरे से कहना पड़ा कि युएफू में दूसरी दुकानों के फुटकर खाते जाँचने के उसे अठारह वन मिलते हैं, साथ में दिन भर का खाना।
उसने तुरंत हामी नहीं भरी, पहले पूछा कितने दिन लगेंगे। उसने बही उठाई और बीच में पलटकर देखा तो शादी की दावत के लिए उधार ली गई मेज़-कुर्सियों की पर्चियाँ भी दबी थीं। एक सुबह में निपटाने का दावा नहीं किया। बोला, पहले तीन दिन देखें। जो मिल जाए साफ़ कर देंगे, जो न मिले उसे अलग रखेंगे। उसने थोड़ा हिसाब लगाया और कहा कि आज भी एक दिन गिना जाएगा, अभी से दोपहर के बाद तक। कल और परसों थोड़ा जल्दी आना, वह खाना रखेगी। उसने सिर हिलाया। हथेली के नीचे पुराने कागज़ का खुरदुरा कोना लगा और पहली बार उसे तुरंत समतल करने की जल्दी नहीं हुई।
याओ ज्या टोफ़ू धोने पीछे के आँगन में गई और उसे काउंटर के आगे छोड़ दिया। लू यान ने अपनी कलम निकाली और उससे स्याही घिसने की शिला माँगी। उसने खिड़की के पार से कहा कि सबसे ऊपर वाले खाने में है, बगल के छोटे कटोरे में पानी नहीं है। हाथ बढ़ाते ही उसे खटास की एक लहर मिली और वह हँस पड़ा। वह फिर लगभग सिरके को पानी समझकर स्याही घिसने वाला था। भीतर उसकी हँसी सुनकर याओ ज्या भी हँसी और बोली कि माँ पहले भी सिरका यहीं रखती थीं और वह हर बार ग़लती करते-करते बचता था।
वह कलम थामे कुछ देर खड़ा रहा। याद आया कि लड़कपन में उसकी माँ ने कैसे उसके माथे पर उँगली से चपत लगाई थी। उस कमरे में वह कभी पूरी तरह निश्चिंत होने की हिम्मत नहीं करता था, फिर भी हमेशा भरपेट खा लेता था। उसने ऐसे दिनों को भी उस बड़े कर्ज़ में समेट रखा था, मानो आज सब चुका दे तो पुराने पड़ोसियों के सामने सिर उठाकर खड़ा हो सकेगा। अब कटोरी उसी जगह थी और वह शख़्स बस याद में था। बही में चुकाने को केवल एक सौ साठ वेन थे। उसने उस रकम की प्राप्ति दर्ज की, फिर एक नया काग़ज़ लिया और याओ ज्या के कहे मुताबिक़ पहले वे तारीख़ें लिखीं जिन्हें आगे-पीछे के ब्यौरों से मिलाना बाक़ी था।
दोपहर से पहले की रोशनी दरवाज़े से सरककर काउंटर के कोने तक आ गई। नीले कपड़े की पोटली से रेत का एक बेहद बारीक कण गिरा। लू येन ने उसे झाड़ा तो देखा कि अगले पन्ने के किनारे एक बहुत छोटा गोला है, जैसे किसी नन्हे बच्चे ने कलम स्याही में डुबोकर वहाँ दबा दी हो। याओ च्या टोफ़ू लेकर आई। उसे देखते पाया तो उसने हाथ बढ़ाकर पन्ना धीरे से पलट दिया और कहा कि अभी हँसना मत। बचपन में वह मेज़ से परे खड़े होने को तैयार नहीं थी, ज़िद करके माँ की बाँह के नीचे घुस गई थी, तभी का निशान है। कहने के बाद उसने उस गोले को छिपाने की जल्दी भी नहीं की।
· अध्याय समाप्त ·
यह पुस्तक AI की सहायता से रचित मौलिक कृति है, जिसका विस्तार ली बाई की 《长干行二首》 (छांगगान के दो गीत) और इस वेबसाइट की मूल लघुकथा 《青梅旧账》 (कच्चे मेह फलों के दिनों का पुराना हिसाब) से किया गया है। पात्र, व्यापारिक प्रतिष्ठान, मूल्य, भूगोल और कालगणना सभी काल्पनिक हैं; इसमें पुराने ऋणों का पूरा हिसाब साफ़ करना, हुनर और श्रम को फिर से पहचान मिलना, तथा वयस्क होने पर संबंधों की शर्तें नए सिरे से तय करना जैसे मूल रचना के केंद्रीय तत्व सुरक्षित रखे गए हैं। यह कवि की जीवनी नहीं है।
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