कविताओं में बसी कहानियाँ
नाशपाती के फूलों में स्वप्न का घाट
कू वूजी · AI सृजन · प्राचीन परिवेश की अद्भुत कथाएँ · पूर्ण · 1 अध्याय · 0 बार पढ़ा गया
आँगन का नाशपाती का पेड़ अभी अंकुराया भी नहीं था, मगर सू ली के तकिए के पास एक गीला फूल आ गया था, जिसके बीच में नदी की रेत लगी थी। पिछली रात सपने में उसके दिवंगत पति ने ठीक यही नाशपाती के फूल की टहनी तोड़कर दी थी। जब से उसने दांपत्य-मिलन की वह अधूरी रजाई फिर काढ़नी शुरू की थी, हर पंखुड़ी जोड़ने पर नदी का किनारा कुछ और स्पष्ट हो जाता था। वह अँधेरा होने की प्रतीक्षा करने लगी, मगर घर के फर्श की ईंटों से भी धीरे-धीरे नदी का पानी रिसने लगा और पानी की आवाज के बीच कोई और भी नाव पर दस्तक दे रहा था।
यह कृति AI ने झू शूझेन की 《江城子·赏春》 (जियांगचेंगज़ी: वसंत का आस्वाद) के काव्य-बिंबों से प्रेरित होकर रची है। पात्र और कथानक पूर्णतः काल्पनिक हैं तथा कथा एक कल्पित प्राचीन परिवेश में कही गई है। यह मूल कविता का अनुवाद या रूपांतरण अथवा कवि की जीवनी नहीं है।
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