कविताओं में बसी कहानियाँ
नारंगी दीप में चमकती धार
कू वूजी · AI सृजन · प्राचीन परिवेश की रहस्यकथा · पूर्ण · 1 अध्याय · 0 बार पढ़ा गया
झोंग छ्युए को गुरुकुल छोड़े एक दिन भी नहीं हुआ था कि दाएँ हाथ पर तलवार का वार पड़ा; गुरुकुल छोड़ने का दस्तावेज़ आस्तीन में छिपा था, और घाट की संतरे की दुकान ही इस समय विश्राम का एकमात्र ठिकाना थी। मालकिन आ चेंग ने उसे रात रुकने को कहा, लेकिन संतरा छीलती उसकी कलाई ने उसे तलवार चलाने की एक दूसरी शैली याद दिला दी। रात के तीसरे पहर तक पत्थर का पुल पाले से भर चुका था। कमरे का दीपक अचानक बुझ गया, बाहर किसी ने उसे छोटा सहशिष्य कहकर पुकारा, और वह संतरा अब भी उसके हाथ के पास था।
यह रचना AI ने झोउ बांगयान की 《少年游·并刀如水》(युवा का भ्रमण·बिंग की कैंची जल जैसी उजली) के काव्य बिंबों से प्रेरित होकर रची है। पात्र और कथानक पूरी तरह काल्पनिक हैं और कथा एक कल्पित प्राचीन परिवेश में कही गई है; यह मूल कविता का अनुवाद या रूपांतरण अथवा कवि की जीवनी नहीं है।
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