कविताओं में बसी कहानियाँ
हिमबाज़
कू वूजी · AI सृजन · प्राचीन परिवेश का साहसिक कथानक · पूर्ण · 1 अध्याय · 0 बार पढ़ा गया
सफ़ेद बाज़ अपने बसेरे में लौटा तो पंखों में लाल धागा और था, जिसमें चार चीनी अक्षरों का संदेश छिपा था: कल पहाड़ जलाना है। बारह वर्ष से पक्षी पाल रहा लू यान अब भी अपनी मुक्ति के लिए चाँदी जोड़ रहा था, और इस समय सबसे कम किसी झमेले में पड़ना चाहता था। लेकिन शिकारी स्त्री छिन मान को यक़ीन था कि वह पहाड़ी डाकुओं के संदेश पहुँचाता है। उसने उसका हाथ पकड़ लिया और पक्षी के जाने की दिशा में जाँच करने पर अड़ गई। बर्फ़ निःशब्द गिर रही थी, किंतु बाज़ के पंजों पर लगी धान के पुआल की राख दोनों को पश्चिमी घाटी की ओर ले गई।
यह कृति AI ने माओ पांग की 《上林春令·十一月三十日见雪》 (शांगलिन छुनलिंग: ग्यारहवें महीने के तीसवें दिन हिमपात देखना) के काव्य-बिंबों से प्रेरित होकर रची है। पात्र और कथानक पूर्णतः काल्पनिक हैं तथा कथा एक कल्पित प्राचीन परिवेश में कही गई है। यह मूल कविता का अनुवाद या रूपांतरण अथवा कवि की जीवनी नहीं है।
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