कविताओं में बसी कहानियाँ
पाले में जंगली हंसों की दो परछाइयाँ
कू वूजी · AI सृजन · प्राचीन परिवेश की अद्भुत कथाएँ · पूर्ण · 1 अध्याय · 2 बार पढ़ा गया
तीन दिनों से एक अकेला हंस ताओ ये की छत पर बैठकर उसे धोखेबाज़ कह रहा था। दूसरों को केवल दुखभरी पुकार सुनाई देती थी, मगर वह उसका हर शब्द समझता था। पिछले साल हंसों की उस जोड़ी को उसी ने बिछोड़ा था; अब अकेला हंस उसके बनाए पक्षी-लुभावन लकड़ी के सीटी-साधन का पीछा करते हुए अपना साथी वापस खोजने आया था। बहन की दवा के लिए अब भी पैसे चाहिए थे और सरकारी सिपाही ने बारह शुभ-शकुन वाले पक्षियों का आदेश भी दे दिया था। सरकंडों की खाड़ी में हर रात जाल गिरते और छत की वह आवाज़ थमने का नाम नहीं लेती थी।
यह कृति AI ने नालान शिंगदे की 《临江仙·孤雁》 (लिनजियांगश्येन: अकेला जंगली हंस) के काव्य-बिंबों से प्रेरित होकर रची है। पात्र और कथानक पूर्णतः काल्पनिक हैं तथा कथा एक कल्पित प्राचीन परिवेश में कही गई है। यह मूल कविता का अनुवाद या रूपांतरण अथवा कवि की जीवनी नहीं है।
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