कविताओं में बसी कहानियाँ
बंदी की घर-वापसी
कू वूजी · AI सृजन · प्राचीन परिवेश की रहस्यकथा · पूर्ण · 1 अध्याय · 7 बार पढ़ा गया
जालसाज़ी के कारण हे ज्यो दो साल से बंदी था। आखिर उसने खिड़की की लकड़ी घिसकर ढीली कर ली, माल की पर्ची की नकल बना ली और सुबह होने पर नगर से बाहर जाने वाली काग़ज़ की गाड़ी में छिपने की तैयारी कर ली। मगर साथ चलने का वादा करने वाला शी झाओ इसी रात तेल का एक पीपा ले आया, जिसकी तीखी गंध दरारों से निकल रही थी। दोनों पहरेदार ड्यूटी बदलने की चाय पीने चौकी में जाने वाले थे, दीवार के बाहर गाड़ी के पहिए सुनाई देने लगे थे और लंबे समय से सोची गई उसकी घर-वापसी की राह में अचानक एक ऐसी चीज़ जुड़ गई थी जिस पर कभी बात तय नहीं हुई थी।
यह कृति AI ने झाओ गू की 《长安晚秋 / 秋望 / 秋夕》 (छांगआन की देर की शरद / शरद-दर्शन / शरद की साँझ) के काव्य-बिंबों से प्रेरित होकर रची है। पात्र और कथानक पूर्णतः काल्पनिक हैं तथा कथा एक कल्पित प्राचीन परिवेश में कही गई है। यह मूल कविता का अनुवाद या रूपांतरण अथवा कवि की जीवनी नहीं है।
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